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जिस शख्सियत ने दुनिया को गुनाहों का देवता दी...

धर्मवीर भारती हिंदी साहित्य के ऐसे सहयोगी रहे हैं जो जीते जी किंवदंती बन गए. वे साल 1997 में 4 सितंबर के रोज ही दुनिया से रुखसत हो गए थे.

Dharamvir Bharati Dharamvir Bharati

हिंदी भाषा में वैसे तो समय-समय पर कई साहित्यकार हुए हैं लेकिन लीजेंड तो डॉ धर्मवीर भारती ही कहे जा सकते हैं. उन्होंने हिंदी साहित्य को कुछ बेहद ही खूबसूरत तोहफे दिए. गुनाहों का देवता, सूरज का सातवां घोड़ा, अंधा युग, द्रों का गांव और ठेले पर हिमालय उनकी कालजयी रचनाएं हैं. वे साल 1997 में 4 सितंबर के रोज ही दुनिया को विदा कह गए थे.

1. कम उम्र में पिता के देहांत की वजह से उन पर जल्द ही परिवार की वित्तीय जिम्मेदारियों का बोझ आ गया.

2. उन्होंने फील्ड रिपोर्टर के तौर पर भारत-पाकिस्तान युद्ध कवर किया. इसके बाद ही बांग्लादेश आजाद हुआ.

3. वे हिंदी की साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग का संपादन साल 1960 से 1997 के बीच करते रहे. इस पत्रिका को मील के पत्थर का दर्जा प्राप्त है.

4. उन्हें पद्मश्री, संगीत नाटक अकादमी और व्यास सम्मान समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया.

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