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आंखों की रोशनी गंवाने के बावजूद पूरा किया सपना, बन गया क्रिकेट चैंपियन

महज आठ साल की उम्र में दीपक ने आंखों की रोशनी खो दी थी लेकिन उसके कारनामे पर आज क्र‍िकेट की दुनिया का बड़े से बड़ा ख‍िलाड़ी नाज कर रहा है...

Deepak Malik Deepak Malik

'मेरे गांव में हर कोई चैंपियन बनना चाहता था. कोई तैराकी में, कोई कुश्ती में तो कोई गुल्ली-डंडे में. मैं भी चैंपियन बनना चाहता था लेकिन क्रिकेट में'.

हरियाणा में पैदा हुए दीपक मलिक ने भी हर बच्चे की तरह चैंपियन बनने का सपना देखा था. उनका सपना देश के लिए क्रिकेट खेलने का था.

हो सकता है कि आप इंडियन टीम के लिए खेलने वाले दीपक मलिक को नहीं जानते होंगे. लेकिन ब्लाइंड क्रिकेट टीम में भारत के लिए खेलने वाले ये ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने टीम को वर्ल्ड कप, एशिया कप और T20 वर्ल्ड कप जि‍ताने में मदद की है.

दीपक गांव के दूसरे बच्चों की तरह ही थे. क्रिकेट खेलना उनका शौक ही नहीं जुनून भी था लेकिन दिवाली के दिन हुई एक घटना ने उनसे उनकी आंखों की रोशनी छीन ली. उस समय वो महज आठ साल के थे. आंखों की रोशनी जाने के बाद भी उन्होंने आशा का दामन नहीं थोड़ा और वो अपने सपने को पूरा करने की दिशा में काम करते चले गए.

कई जगहों से रिजेक्ट होने और काफी निराशा के बीच वह दिल्ली के ब्लाइंड स्कूल में पहुंचे. वो वहां क्रिकेट खेलने लगे. धीरे-धीरे स्कूल लेवल क्रिकेट से स्टेट लेवल क्रिकेट तक में खुद को साबित करने लगे. यही नहीं, ऑल-राउंडर दीपक को जहीर खान जैसे खिलाड़ियों के साथ खेलने का भी मौका मिला. जहीर खान उन्हें चैंपियन कहकर बुलाते थे.

दिल्ली डेयरडेविल्स के एक वीडियो में वो बड़े गौरव के साथ कहते हैं कि उन्होंने वर्ल्ड कप, एशिया कप और T20 कप में पाकिस्तान को हराया. इसके अलावा वो ब्लाइंड क्रिकेट में सबसे तेज यानी 17 गेदों में 50 रन बनाने वाले खिलाड़ी भी हैं. दीपक अपने सफलता का श्रेय दिल्ली को देते हैं, जिसने उन्हें चैंपियन बनाने में मदद की है.

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