बिहार बोर्ड ने उस वक्त 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे जारी कर दिए, जिस वक्त अन्य राज्य बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन कर रहे हैं. इस बार बोर्ड रिकॉर्ड टाइम में नतीजे जारी कर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और अन्य बोर्ड से आगे निकल गया है. दरअसल बोर्ड ने परीक्षा के 44 दिन बाद ही नतीजे जारी कर दिए और 28 दिन में पेपर जांच की प्रक्रिया को पूरा कर लिया.
इस बार ना सिर्फ जल्दी घोषित किया गया, बल्कि रिजल्ट भी काफी अच्छा रहा. बोर्ड की ओर से जारी किए गए नतीजों में 79.76 फीसदी उम्मीदवार सफल हुए हैं, जबकि पिछली साल 17 फीसदी कम करीब 53 फीसदी उम्मीदवार पास हुए थे. आपको बता दें कि ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी बोर्ड परीक्षा के नतीजे मार्च में ही जारी कर दिए गए हैं. जानते हैं रिजल्ट जल्दी आने के क्या कारण रहे...
तकनीक का किया गया इस्तेमाल
बोर्ड के चेयरमैन आनंद किशोर ने बताया कि इस बार कॉपियों की जांच में तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल किया गया. इसके लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया था और जिस दिन कॉपियों की जांच हो रही थी, उसी दिन उनकी एंट्री सॉफ्टवेयर पर कर दी गई.
हालांकि इससे पहले पहले कॉपी की जांच होती थी और फिर उसके नंबर एक शीट में लिखे जाते थे और उन्हें दूसरे एक कागज में अपडेट करना होता और उसके बाद उन्हें बोर्ड में भेजा जाता था. बोर्ड में नंबर की जानकारी आने के बाद उनकी जांच कर उन्हें आखिरकार सॉफ्टवेयर पर अपडेट किया जाता था, जिससे प्रोसेस में लंबा टाइम लगता था और रिजल्ट घोषित होने में देरी होती थी. हालांकि इस बार इसे सीधे अपडेट किया जाता है. इसके लिए हर मूल्यांकन केंद्र पर कंप्यूटर की व्यवस्था की गई थी.
बार कोड वाली कॉपी का हुआ इस्तेमाल
पहली बार किसी भी स्टेट बोर्ड में बार कोड और प्री-प्रिंटेड कॉपी का इस्तेमाल किया गया. बारकोड के साथ ही ओएमआर शीट भी छात्रों को दी गई थी और इसका असर रिजल्ट पर पड़ा. इससे कॉपियों के डेटा को एकत्रित करने में दिक्कत नहीं हुई और कम समय में सभी के डेटा का एक स्थान पर कर लिया गया.
टॉपर्स की कॉपी के लिए अलग व्यवस्था
दरअसल पहले 90 फीसदी से अधिक अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों की कॉपियों को पहले बिहार बोर्ड मंगाया जाता था और उसकी जांच की जाती थी. हालांकि अब यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है. अब टॉपर्स की कॉपी को बिहार बोर्ड में नहीं मंगाया जाता है.
गौरतलब है कि 2 मार्च को मूल्यांकन कार्य शुरू किया गया और 28 दिन के अंदर रिजल्ट जारी कर दिए गए. वहीं इस बार पेंडिंग रिजल्ट की संख्या भी काफी कम हो गई है. पहले पेंडिंग रिजल्ट की संख्या 3 हजार रहती थी, लेकिन इस बार तकनीक का इस्तेमाल करने की वजह से यह संख्या 174 ही रह गई है. इस बार महज 0.15 फीसदी छात्रों का रिजल्ट ही पेंडिंग रहा है.