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ये हैं सबसे ऊंची चोटी Mount Everest पर तिरंगा फहराने वाला पहला भारतीय

Mount Everest अपने कद पर खूब इतराया करता था, लेकिन एक दिन हिंदुस्तानी ने अपना हौसला दिखाया और उसे बौना बना दिया.जानें कौन है वो..

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Avtar Singh Cheema
Avtar Singh Cheema

20 मई 1965 का वो दिन हर एक भारतीय के लिए गर्व का दिन साबित हुआ जब पहली एक हिंदुस्तान ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवेरेस्ट पर तिरंगा फहराया था. एवरेस्ट चोटी को शायद अपनी ऊंचाई पर घमंड था लेकिन कैप्टन अवतार सिंह चीमा पहले भारतीय थे, जिन्होंने नवांग गोम्बू के साथ एवरेस्ट चोटी पर फतह हासिल की.

जानते हैं कैप्टन अवतार सिंह चीमा के एवरेस्ट चोटी के सफर के बारे में ...

1. कैप्टन अवतार सिंह चीमा राजस्थान राज्य के श्रीगंगानगर जिले के निवासी थे.

2. वह भारतीय सेना के दो असफल प्रयासों के बाद 1965 में Mount Everest  पर चढ़ने के लिए तैयार किये गये तीसरे मिशन का हिस्सा बने.

3. वह भारतीय सेना में पैराशूट पलटन का हिस्सा थे. बाद में उन्हें के पद पर प्रमोशन मिला.


4 अवतार सिंह चीमा को उनकी उपलब्द्धियों के लिए 'अर्जुन पुरस्कार' और 'पद्म श्री  अवार्ड'  से सम्मानित किया गया.

5. जब एवरेस्ट पर चढ़ने की पहली कोशिश की गई तो भारतीय दल Mount Everest की चोटी से सिर्फ 700 फुट की दूरी पर थे. जबकि दूसरी कोशिश में ये दूरी 400 फुट थी. लेकिन दोनों ही बारी में आगे की यात्रा को खराब मौसम के कारण रोकना पड़ा.

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6. वहीं भारत ने तीसरे अभियान की कामयाबी के बाद , भारत पूरी दुनिया में उन देशों में शामिल हो गया जिन्होंने Mount Everest की चोटी पर अपने देश का झंडा लहराया.

7. एवरेस्ट पर जाने वाले भारतीय दल का नेतृत्व मनमोहन सिंह कोहली ने किया था, जिसमें 19 सदस्य थे. हालांकि इनमें से Everest पर चढ़ने में सिर्फ 9 सदस्यों को कामयाबी मिली थी, जिसमें कैप्टन अवतार सिंह चीमा भी शामिल थे.


8. कैप्टन अवतार सिंह के साथ नवांग गोम्बू भी थे दो बार एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने वाला पहला शख्स बना.

9. सबसे ज्यादा 9 सदस्यों के साथ एवरेस्ट फतह करने का विश्व रिकॉर्ड भी इस दल के नाम है.

10. हालांकि 17 साल तक ये रिकॉर्ड कायम रहा लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 51 सालों के बाद भारतीय सेना ने Mount Everest का गुरूर तोड़ दिया. जहां लेफ्टिनेंट कर्नल रणवीर जामवाल की लीडरशिप में भारतीय सेना के पर्वतारोहियों की टीम ने Mount Everest के शिखर पर पहुंचकर, देश को एक बार फिर सम्मान और गौरव का मौका दिया है.

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