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एजुकेशन

सबरीमाला में हरी झंडी, मगर इन मंदिरों में अब भी महिलाओं पर बैन

सबरीमाला में हरी झंडी, मगर इन मंदिरों में अब भी महिलाओं पर बैन
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सबरीमाला मंदिर में सभी लड़कियों और महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से मंदिर के द्वार आज खुलने जा रहे हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद यहां महिलाओं को प्रवेश नहीं देने की कोशिश की जा रही है, जिससे तनाव भी बढ़ रहा है. सबरीमाला मंदिर में तो सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी है, लेकिन भारत में आज भी कई ऐसे मंदिर हैं, जहां महिलाएं प्रवेश नहीं कर सकती.
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बिमाला खांडा शक्ति पीठ (जगन्नाथ मंदर परिसर, पुरी ओडिशा)- पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ के मंदिर परिसर में स्थित बिमला माता के मंदिर में दुर्गा पूजा के दौरान 16 दिनों तक महिलाओं का प्रवेश वर्जित होता है. कहा जाता है कि सभी महिलाएं मां काली की अवतार हैं, इसलिए दुर्गा पूजा में उनका प्रवेश निषेध है.
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मवाली माता मंदिर (धमतरी, छत्तीसगढ़)- छत्तीसगढ़ के मवाली माता के मंदिर में भी महिलाओं के लिए 'नो इंट्री' का बोर्ड लगा हुआ है. यहां पुजारी को आए सपने के बाद महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई.
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मंगल चंडी मंदिर (बोकारो, झारखंड)- माना जाता है कि झारखंड के मंगल चंडी में महिला प्रवेश कर गई तो उस पर आपदा आ सकती है. यहां 100 फीट तक महिलाओं के आने पर रोक है, उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान है.
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कीर्तन घर (बरपेचटा सत्रा, असम)- यह असम का एक वैष्णव मंदिर है, महिलाओं के प्रवेश पर रोक है. यहां प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को जाने से मना कर दिया था.
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सोलह शिवलिंग शनैश्वर (देवस्थान सतारा, महाराष्ट्र)- कई शनि मंदिरों की तरह इस मंदिर में भी महिलाओं के आने पर खुला प्रतिबंध है. यहां रोक को लेकर एक बोर्ड भी लगा हुआ है.
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घटई देवी मंदिर (सतारा, महाराष्ट्र)- यहां मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है, मंदिर से बोर्ड गायब है, लेकिन इजाजत अभी भी नहीं है.
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कार्तिकेय मंदिर (पेहोवा, हरियाणा)- ब्रह्मचारी कार्तिकेय के मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है और साथ ही श्राप मिलने का डर है.

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कामख्या- यह मंदिर असम में नीलांजन की पहाडिय़ों पर बना हुआ एक विख्यात मंदिर है. कामाख्या देवी के इस मंदिर के गर्भगृह में जो आराध्य मूर्ति स्थापित है, वह किसी बलशाली देव की नहीं, बल्कि स्त्री की योनि की है. चार दिनों तक स्त्री के शरीर से हर महीने निकलने वाले रक्त का उत्सव मनाने वाले इस विश्व विख्यात मंदिर का एक सच और भी है, यहां पीरियड्स के दौरान महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत नहीं है.
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यही हाल राजस्थान के पुष्कर स्थित कार्तिकेय मंदिर का भी है, जहां औरतों को आशीर्वाद की बजाए शाप मिलता है.
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केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के कक्ष में महिलाओं को प्रवेश नहीं मिलता. केरल के कोवलम में अवधूत देवी के मंदिर के बाहर नीले रंग के बोर्ड पर मोटे-मोटे सफेद अक्षरों में लिखा है—मासिक धर्म के समय प्रवेश करना मंदिर की संस्कृति के विरुद्ध है.
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राजस्थान के रणकपुर जैन मंदिर में भी रजस्वला महिलाओं के लिए साफ संदेश लिखा हुआ है—मासिक धर्म के दौरान प्रवेश वर्जित है.
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