दुनिया के महान वैज्ञानिकों में से एक स्टीफन हॉकिंग को दूसरा आइंसटाइन माना जाता था. उन्होंने ब्रह्मांड के कई रहस्यों से पर्दा उठाया और उन्हें शोध के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया. हालांकि उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित नहीं किया गया. क्या आप जानते हैं इसके पीछे क्या वजह हो सकती है कि उन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं दिया गया.
स्टीफन के पास 12 मानद डिग्रियां थीं और उनके काम के चलते उन्हें अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान भी दिया गया था. बताया जाता है कि उनकी सिद्धांतों को साबित नहीं किया जा सका, इसलिए वो इस पुरस्कार से वंचित रहे. नोबेल कमेटी सबूत पर काम करती है और वो बड़े आइडिया को लेकर पुरस्कार की घोषणा नहीं करती.
नेशनल जियॉग्रफिक मैगजीन में 'द साइंस ऑफ लिबर्टी' के लेखक टिमोथी फेरिस का कहना है कि ब्लैक होल्स को लेकर स्टीफन हॉकिंग की थिअरी को सैद्धांतिक भौतिकी में स्वीकार कर लिया गया है लेकिन इसे साबित करने का कोई तरीका अभी नहीं मिला है.
साथ ही ही टिमोथी का कहना है कि 'समस्या यह है कि इसे साबित करने का कोई तरीका है भी नहीं. जो हॉकिंग का सिद्धांत है अगर उसे वाकई देखा जा सकता तो उन्हें नोबेल पुरस्कार मिल सकता था. लेकिन यह अरबों सालों में भी नहीं होता.'
कैलिफोर्निया इंस्टीट्यटू ऑफ टैक्नोलॉजी के फिजिक्सिट सेन केरॉल ने कहा था कि नोबल पुरस्कार किसी बुद्धिमान व्यक्ति या साइंस को दिए योगदान को नहीं दिया जाता है, बल्कि ये खोज को दिया जाता है.
उन्होंने बताया कि उनके सबसे अच्छे सिद्धांतों को साबित नहीं किया जा सका, इसलिए उन्हें पुरस्कार नहीं मिला. उनकी तुलना हमेशा आइंसटाइन से की जाती थी और उनका निधन भी उनके जन्मदिवस के दिन हुआ था.
बताया जाता है कि आइंसटाइन को भी नोबेल पुरस्कार उनकी जनरल रिलेटिविटी की थ्योरी की वजह से नहीं दिया गया था.
स्टीफन का जन्म 8 जनवरी, 1942 को यूनिइटेड किंगडम में हुआ था. शारीरिक अक्षमता के बावजूद वे विश्व के सबसे बड़े वैज्ञानिक माने गए. स्टीफन की जिंदगी, उनकी थ्योरी और किताबों पर कई फिल्में बन चुकी है. साल 2014 में रिलीज फिल्म 'द थ्योरी ऑफ एवरीथिंग' में स्टीफन की असल जिंदगी को पर्दे पर दर्शाया गया.