अन्ना आंदोलन के बाद जन लोकपाल कानून साल 2014 से लागू है
लेकिन अभी तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो
पाई है. जिसके लिए
केंद्र सरकार लोकपाल की नियुक्ति की तैयारी में
है. सरकार ने लोकपाल की नियुक्ति को लेकर
सेलेक्शन कमेटी की बैठक 1 मार्च को शाम में बुलाई है. इस बैठक में
पीएम मोदी, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन,
देश के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को न्योता दिया गया है. आइए जानते हैं
जन लोकपाल बिल के बारे में आखिर इसकी
शुरुआत कहां से हुई.
जानें क्या है जन लोकपाल बिल - जन
लोकपाल बिल भारत में नागरिक समाज द्वारा
प्रस्तावित भ्रष्टाचार विरोधी बिल का मसौदा है.
कैसे हुई जन लोकपाल बिल की शुरुआत-
साल 2011 में दिल्ली के जंतर-मंतर में एक
ऐसी चिंगारी को हवा मिली, जो देश के
ज्यादातर लोगों के दिलों में सुलग रही थी. ये
बढ़ते भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्से की चिंगारी थी. भ्रष्टाचार के
खिलाफ जनता का गुस्सा साल 2011 में फूटा.
जब जन लोकपाल बिल की मांग के
साथ अन्ना हजारे ने दिल्ली
स्थित जंतर-मंतर पर अपना अनशन
शुरू किया.
अन्ना हजारे के इस छोटे से अनशन ने देशभर में आग लगा दी. भ्रष्टाचार के खिलाफ
भारत का सबसे बड़ा आंदोलन माना जाता है.
अनशन के दौरान अन्ना हजारे भ्रष्टाचार विरोधी
आंदोलन के सबसे ताकतवर चेहरा बन गए थे.
16 अगस्त, 2011 को अन्ना हजारे ने अनशन की घोषणा थी.
वहीं अनशन शुरू होने से 4 घंटे पहले ही सरकार
ने अन्ना हजारे को 16 अगस्त 2011 को हिरासत
में लेकर तिहाड़ जेल भेज दिया. जिसके विरोध में
देशभर में जनता सड़कों पर आ गई थी. भारी जन
दबाव देखते हुए अन्ना की रिहाई के आदेश उसी
दिन जारी हो गए, लेकिन अन्ना रामलीला मैदान
में अनशन जारी रखने की अनुमति मिलने के
पश्चात् ही 19 अगस्त को जेल से बाहर निकले.
आंदोलन के लिए अडिग अन्ना ने अपना अनशन
जेल में ही शुरू कर दिया था जिसे उन्होंने रिहाई
के बाद रामलीला मैदान में जारी रखा.
धीरे- धीरे इस आंदोलन ने ज्वालामुखी का रूप
ले लिया. जिसमें लोगों का गुस्सा आग की
तरह नजर आ रहा था. अन्ना के आंदोलन के
समर्थन में जनसैलाब जहां दिनों-दिन बढ़ता गया,
वहीं दूसरी ओर देश भर में गली-गली में भ्रष्टाचार
पर नुक्कड़ सभाएं और प्रदर्शन इस आदोलन के
समर्थन में होने लगे.
27 अगस्त, 2011 में आखिकार सरकार को
झुकना पड़ा. हकीकत में इस आंदोलन को उम्मीद
से कहीं ज्यादा कामयाबी मिली. सरकार संसद में
लोकपाल बिल पर चर्चा के लिए तैयार हो गई थी.
वहीं सरकार ने संसद में अन्ना की प्रमुख तीन
मांगों पर चर्चा की.
ये थी तीन मांगें- अन्ना की तीन प्रमुख मांगों
में सबसे पहली थी कि राज्यों में भी लोकपाल की
ही तर्ज पर लोकायुक्त कायम हो. दूसरे, सभी
केंद्रीय कर्मचारी लोकपाल के और राज्य सरकार के
सभी कर्मचारी सम्बन्धित राज्य के लोकायुक्त के
दायरे में आएं. अन्ना की तीसरी मांग थी कि
नागरिक घोषणा-पत्र (citizen charter) के जरिए
जनता के सारे काम तय समय सीमा में हों.
तीन प्रमुख मांगों के प्रति सैद्धान्तिक सहमति
का प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में 27 अगस्त,
2011 को (अन्ना के अनशन के 12वें दिन)
सर्वसम्मति से पारित किया गया. इस प्रस्ताव को
पारित कराने के लिए छुट्टी के दिन ही संसद की
बैठक आहूत की गई थी. बता दें, साल 2011 में
जन लोकपाल बिल पारित होने के बाद भी कई
बदलाव हुए.
28 अगस्त 2011 को जन लोकपाल बिल पारित होने के बाद अन्ना हजारे ने
दो बच्चियों के
हाथों नारियल पानी पीकर अपना
अनशत तोड़ दिया था.