scorecardresearch
 
Advertisement
एजुकेशन

कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा

कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा
  • 1/10
भारतीय जनता पार्टी की महत्वपूर्ण स्तंभ और अपनी प्रखर बुद्धि के साथ वाकपटुता में माहिर रहीं सुषमा स्वराज देश की महिलाओं के लिए हमेशा एक आदर्श रहेंगी. छोटी उम्र में राजनीति में आकर न सिर्फ उन्होंने राजनीतिक पेचोखम समझे, बल्कि बीजेपी में खुद को स्थापित किया. भाजपा में उनका कद अटल आडवाणी के बाद दूसरी पंक्ति की सबसे ताकतवर नेता का था. राजनीति में आने वाली लड़कियों की तमाम पीढ़ियां सुषमा स्वराज के व्यक्तित्व और कामों से सीखती रहेंगी.
कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा
  • 2/10
इंदिरा के बाद देश की ताकतवर महिला नेता
देश की राजनीति में महिला राजनेताओं की कतार में इंदिरा गांधी के बाद सबसे ज्यादा ताकतवर महिला नेता के तौर पर उन्हीं का नाम आता है. चाहे फिर वो राजनीतिक समझ हो या लोगों से मेलजोल, वो सबमें माहिर थीं. शब्दों की जादूगर सुषमा ने विदेश मंत्री रहते हुए सोशल मीडिया में लोगों के दिल जीतने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी थीं. इंदिरा गांधी के बाद वो देश की दूसरी महिला विदेश मंत्री भी बनी थीं.
कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा
  • 3/10
सबसे कम उम्र की मंत्री का रिकॉर्ड

महज 27 वर्ष की छोटी उम्र में ही सन 1979 में सुषमा स्वराज जनता पार्टी से हरियाणा की प्रदेश अध्यक्ष बनी थीं. सबसे कम उम्र की कैबिनेट मिनिस्टर बनने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है. सुषमा ने बीते साल 2018 में ही कह दिया था कि वो 2019 का चुनाव नहीं लड़ेंगी. इसके पीछे अपने स्वास्थ्य कारण ही बताए थे.

Advertisement
कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा
  • 4/10
मोदी से पहले था उनका नाम

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जब राजनीति में आना हुआ तब सुषमा स्वराज एक स्थापित नेता बन चुकी थीं. कहा जाता है कि मोदी सरकार में मुस्लिम देशों खासकर सऊदी अरब और कुवैत आदि के साथ अच्छे संबंध बनाने की पहल उन्होंने ही की. संसद के छठे सत्र में सांसद के तौर पर 15वीं लोक सभा में वो विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा थीं. सन 1977-1982 और 1987-1909 के दौरान दो बार हरियाणा से और 1998 में एक बार दिल्ली से विधायक बनीं. अक्टूबर 1998 में इन्होंने दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री का पद संभाला. सुषमा स्वराज सत्ताधारी पार्टी की सदस्य और विपक्ष की सदस्य दोनों ही भूमिकाओं में अपनी मजबूत पहचान दर्ज करा चुकी हैं.
कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा
  • 5/10

सुषमा स्वराज ने भारतीय राजनीति में साल 1970 में छात्र नेता के तौर पर कदम रखा. वो इंदिरा गांधी की सरकार के विरोध में हुए आंदोलनों में भी शामिल हो चुकी थीं. जनता पार्टी में शामिल होने के बाद वो आपातकाल के खिलाफ मुखर होकर सामने आईं. सुषमा स्वराज के नाम दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और विपक्ष की पहली महिला नेता के रिकॉर्ड भी दर्ज हैं.
कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा
  • 6/10
ये हैं उनके नाम रिकॉर्ड

25 साल की उम्र में देश की सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री (हरियाणा विधान सभा) बनी.
27 साल की उम्र में, हरियाणा में जनता पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष
नेशनल पार्टी की पहली महिला प्रवक्ता रहीं
पहली महिला मुख्यमंत्री, पहली महिला केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, विपक्ष की पहली महिला नेता

कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा
  • 7/10
ये मिले सम्मान
सुषमा स्वराज को हरियाणा राज्य विधानसभा द्वारा सर्वश्रेष्ठ वक्ता पुरस्कार दिया गया था. इसके अलावा उन्हें वर्ष 2008 और 2010 में दो बार सर्वश्रेष्ठ संसदीय पुरस्कार मिला था. उत्कृष्ट संसदीय पुरस्कार को प्राप्त करने वाली पहली और एकमात्र महिला सांसद का खिताब उनके नाम है.
कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा
  • 8/10
ये है उनका राजनीतिक सफर

सबसे पहले जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्या
फिर हरियाणा राज्य में जनता पार्टी की अध्यक्षा रहीं
भारतीय जनता पार्टी की अखिल भारतीय सचिव रहीं
1977 में हरियाणा में कैबिनेट मंत्री बनीं
1977 से 1979 तक सामाजिक कल्याण, श्रम और रोजगार जैसे आठ पद संभाले
1987 में सुषमा स्वराज को हरियाणा विधान सभा से दोबारा चुना गया
1987 से 1990 तक सिविल आपूर्ति, खाद्य और शिक्षा के पदों पर कैबिनेट मंत्री रहीं
 अप्रैल 1990 में राज्य सभा की सदस्य के रूप में निर्वाचित हुईं
कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा
  • 9/10
1996 में सुषमा स्वराज 11वीं लोकसभा के दूसरे कार्यकाल की सदस्य बनी
1996 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 13 दिन की सरकार में सूचना और प्रसारण की केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनीं
1998 में तीसरी बार 12वीं लोकसभा की सदस्या के रूप में फिर से निर्वाचित किया गया
13 अक्टूबर से 3 दिसंबर 1998 तक दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं
1998 में इन्हें दिल्ली विधानसभा के हौज खास विधानसभा से जीतीं
लोकसभा सीट के लिए विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया
अप्रैल 2000 में सुषमा स्वराज को दोबारा राज्यसभा की सदस्या के रूप में निर्वाचित किया गया
30 सितंबर 2000 से 29 जनवरी 2003 तक सूचना एवं प्रसारण मंत्री के पद पर सेवा की

Advertisement
कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा
  • 10/10
19 मार्च से 12 अक्टूबर 1998 तक सूचना एवं प्रसारण और दूरसंचार (अतिरिक्त प्रभार) विभाग में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहीं.
29 जनवरी 2003 से 22 मई 2004 तक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री व संसदीय मामलों की मंत्री रहीं.
अप्रैल 2006 में इन्हें पांचवे सत्र के लिए राज्य सभा की सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया था.
16 मई 2009 को सुषमा स्वराज को छठी बार 15वीं लोकसभा की सदस्य के रूप में चुना गया था.
लोकसभा में 3 जून 2009 को विपक्ष की उप नेता बनी.

Advertisement
Advertisement