नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रीसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) नये बदलाव कर रही है. क्लास में बैठने से लेकर टीचर्स और स्टूडेंट्स के नियमों में बदलाव होंगे. एनसीइआरटी ने इससे संबंधित दिशानिर्देश स्कूलों को भेजे हैं. ये दिशानिर्देश 34 नगर निगम स्कूलों में किए गए एक साल के अध्ययन के आधार पर जामिया मिलिया इस्लामिया के साथ मिलकर शिक्षकों की एक टीम ने तैयार किए हैं. आइए जानें- एनसीईआरटी आने वाले वक्त में किस तरह के बदलाव करना चाहती है.
एनसीईआरटी के नये बदलावों के तहत टीचर्स से क्लास में फ्लेक्सिबल सीटिंग अरेंजमेंट करने को कहा गया है. जिससे टीचर्स और स्टूडेंट्स को एक्टिविटीज के लिए जगह मिल सके.
बच्चों को धमकाए बिना पढ़ाएंगे टीचर
बच्चों को आर्ट लर्निंग के दौरान जरा सा भी डराना धमकाना नहीं है, ताकि वो रचनात्मक बन सके. इस दौरान वो ये महसूस न करे कि उसे कोई जज कर रहा है. NCERT ने स्कूलों को इस बारे में दिशानिर्देश दिए हैं. टीचर्स बच्चों की कलात्मक क्षमताओं पर टिप्पणी या उनकी आपस में तुलना न करें.
मूल्यांकन का ढंग भी बदले
एनसीइआरटी का तर्क है कि स्टूडेंट्स का मूल्यांकन उनके लिए खुशी की बात होनी चाहिए. उन बच्चों को आपस में पूर्वाग्रह होने के बजाय उन्हें मूल्यांकन जानने या गतिविधियों में हिस्सा लेने में मजा आना चाहिए. एक दूसरे के प्रति कंपटीशन रखकर पूर्वाग्रह से बच्चों को बचाना चाहिए.
NCERT की ओर से अलग गाइडलाइंस
नये दिशानिर्देश तैयार करने के लिए एक काउंसिल बनाई गई थी. इस काउंसिल के दिशानिर्देश 34 नगर निगम स्कूलों में किए गए एक साल के अध्ययन के आधार पर तैयार किए गए हैं. ये दिशानिर्देश जामिया मिलिया इस्लामिया के साथ मिलकर काबिल शिक्षकों की एक टीम ने तैयार किए हैं.
इस काउंसिल ने दिशानिर्देश में ये भी बताया है कि कैसे लर्निंग के साथ साथ प्री-प्राइमरी, प्राइमरी और अपर प्राइमरी लेवल के बच्चे दूसरी चीजें भी सीखें. जैसे कि कैपेसिटी बिल्डिंग के अलावा दूसरी एक्टिविटीज की प्लानिंग टाइम और रिसोर्स तैयार करना भी वो इस दौरान सीखें. कला को एक संसाधन के रूप में प्रस्तुत करने के लिए इसके उपयोग में स्कूल प्रणाली को टीचिंग टूल के रूप में फिर से बढ़ाने की जरूरत होगी.
India Today की रिपोर्ट के अनुसार एनसीईआरटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि स्कूल प्रबंधन सहित स्कूल शिक्षा से जुड़े सभी हितधारकों को इस शिक्षाशास्त्र के महत्व और प्रासंगिकता को समझने के लिए आगे आने की जरूरत है. कला व शिक्षा उच्च गुणवत्ता वाले नवीकरण के बुनियादी और टिकाऊ घटक के रूप में सुलभ है.