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एजुकेशन

48.2 करोड़ KM लंबा चक्कर...फिर मंगल पर उतरा नासा का 'इनसाइट'

48.2 करोड़ KM लंबा चक्कर...फिर मंगल पर उतरा नासा का 'इनसाइट'
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नासा का रोबोटिक 'मार्स इनसाइट लेंडर' मंगल ग्रह पर लैंड हो गया. नासा ने अपना विमान मंगल ग्रह पर लैंड करवाकर इतिहास रच दिया है. यह 'इनसाइट' मंगल ग्रह की आंतरिक संरचना और इसके निर्माण के बारे में पता लगाएगा और यह जानेगा कि इस सतह पृथ्वी से कितनी अलग है. आइए जानते हैं इस मिशन से जुड़ी कई खास बातें...
48.2 करोड़ KM लंबा चक्कर...फिर मंगल पर उतरा नासा का 'इनसाइट'
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इनसाइट की मंगल पर लैंडिंग के आखिरी 7 मिनट का काफी खास माना जा रहा था और इसी सात मिनट में यह लैंडिंग पूरी की गई. भारतीय समय के मुताबिक सोमवार रात 1.24 बजे 'इनसाइट' ने मंगल की सतह पर उतरा. इसके बाद यह पैराशूट से बाहर आया और अपने तीन पैरों पर लैंड किया. यह पूरी प्रक्रिया 7 चरण में की गई.
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खास बात ये है कि मंगल ग्रह की सतह को खोदने के लिहाज से तैयार किया गया है. नासा के इस एक अंतरिक्ष यान ने 48.2 करोड़ किलोमीटर की यात्रा छह महीने में पूरी करने के बाद यह कारनामा किया है. सौर ऊर्जा और बैटरी से ऊर्जा पाने वाले लैंडर को 26 महीने तक संचालित होने के लिए डिजाइन किया गया है.
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बता दें कि मंगल की कक्षा में पहुंचने के समय 'इनसाइट' की स्पीड 19800 किलोमीटर की थी, जो लैंडिंग के वक्त घटकर 8 किलोमीटर प्रतिघंटा रह गई और 6 मिनट के अंतराल में यह और भी कम हो गई. 'इनसाइट' का ये मिशन मंगल करीब 1 बिलियन डॉलर यानी 7044 करोड़ रुपए का था.
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5 मई को लांच किया गया मार्स 'इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सीस्मिक इंवेस्टिगेशंस, जियोडेसी एंड हीट ट्रांसपोर्ट' (इनसाइट) लेंडर 2012 में 'क्यूरियोसिटी रोवर' के बाद मंगल पर उतरने वाला नासा का पहला अंतरिक्ष यान है. यान के मंगल की धरती पर उतरते ही दो साल का मिशन शुरू हो गया है. कैलिफोर्निया के वंडेनबर्ग एयरफोर्स स्टेशन से एटलस वी रॉकेट के जरिए लांच किया गया था.
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माना जा रहा है कि इंसाइट मंगल ग्रह के बारे में ऐसी जानकारियां दे सकता है, जो अरबों सालों से नहीं मिली हैं. बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, अपने अभियान के दौरान यह यान मंगल पर एक साइज़्मोमीटर रखेगा जो इसके अंदर की हलचलें रिकॉर्ड कर सकेगा.

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इनसाइट यह पता लगाएगा कि मंगल के अंदर कोई भूकंप जैसी हलचल होती भी है या नहीं. साथ ही यह मंगल की खुदाई करके उसकी रहस्यमय जानकारियां जुटाएगा. वहीं, इससे तापमान को लेकर भी कई जानकारी मिलेगी, जिससे मंगल के मौजूदा हालात के बारे में पता चलेगा. (फोटो- नासा से ली गई है)
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