कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा के पेपर लीक मामले में छात्रों का प्रदर्शन जारी है. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दे दिए हैं. हालांकि अभी भी छात्र धरने पर बैठे हुए हैं. आइए समझते हैं इस पूरे मामले को, आखिर ये कब से शुरू हुआ और क्या है पूरा मामला...
आज सरकार ने छात्रों की मांगों को मान लिया. 17 फरवरी से लेकर 22 फरवरी तक जितने भी SSC से संबंधित परीक्षाएं हुई हैं उनकी जांच सीबीआई करेगी और साथ ही 9 मार्च को होने वाली परीक्षा भी सीबीआई की निगरानी में होगी. बता दें कि 17 फरवरी से 22 फरवरी के बीच सीजीएल परीक्षा का आयोजन किया गया था.
कब से शुरू हुआ मामला- पहले आपको बता दें कि एसएससी हर सीजीएल परीक्षा का आयोजन करता है. एसएससी यह परीक्षा केंद्र सरकार के अधीन लगभग 30 पदों के लिए कराता है, जिसमें आयकर इंस्पेक्टर, एक्साइज इंस्पेक्टर, ऑडिटर आदि प्रमुख है. इस परीक्षा में चयनित होने वाले इन पदों पर काम करते हैं. इस परीक्षा में चयन के लिए दो लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में पास होना आवश्यक है.
इसी क्रम में हर साल की तरह पिछले साल अगस्त में 5 से 24 तारीख तक टियर 1 परीक्षा का आयोजन किया गया था. यह इस परीक्षा का पहला चरण होता है. इस परीक्षा में पास होने के बाद उम्मीदवारों को टियर-2 परीक्षा में भाग लेना होता है. टियर-1 के बाद टियर-2 की परीक्षा का आयोजन होना था, लेकिन कई बार इस परीक्षा की तारीख में बदलाव हुआ.
टियर 2 का एग्जाम नवंबर में होना था. लेकिन इसकी तारीख दिसंबर की डेट दे दी गई जिसके बाद इसे फिर कैंसल कर दिया गया और डेट जनवरी की तय की गई. उसके बाद 17 से 21 फरवरी के बीच परीक्षा करवाने का फैसला किया गया.
हालांकि इस परीक्षा में पेपर लीक होने के कई मामले सामने आए. छात्रों का आरोप है कि परीक्षा से पहले ही स्क्रीनशॉट वायरल हो गए थे, जिसमें पेपर और आंसर की की पूरी जानकारी थी. इस परीक्षा में 21 फरवरी को गणित का पेपर था. परीक्षा के 15 मिनट बाद सूचना मिली कि प्रश्न पत्र और आंसर की सोशल मीडिया पर लीक हो गया है. जिसके तुरंत बाद परीक्षा रोक दी गई.
21 फरवरी की परीक्षा रद्द कर दी गई और अब यह परीक्षा 9 मार्च को आयोजित की जाएगी. सरकार ने इस परीक्षा को सीबीआई की देखरेख में करवाने का वादा किया है. हालांकि छात्रों की मांग है कि इस पूरी परीक्षा की सीबीआई जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा दी जानी चाहिए. प्रदर्शन को लेकर एसएससी के चेयरमैन असीम खुराना ने कहा था कि एसएससी टियर-2 परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे छात्र दो कोचिंग इंस्टीट्यूट के छात्र हैं. हालांकि छात्र कर रहे हैं कि ऐसा कुछ नहीं है, पूरे देश में इसका विरोध हो रहा है.
क्या है छात्रों की मांग- सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में कथित एसएससी एग्जाम स्कैम की जांच की जाए. साथ ही 9 मार्च को होने वाली परीक्षा स्थगित की जाए. लैब्स की जांच ग्राउंड लेवल पर हो और चयन प्रक्रिया का समय तय हो. इस दौरान पेपर लीक के साथ ही कई मामले भी सामने आ रहे हैं, जिसमें छात्र नौकरी ना लगने का भी विरोध कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि 2016 में हुई सीजीएल परीक्षा में चयनित हुई कई उम्मीदवारों की नौकरी नहीं लगी है. वहीं कई छात्र नौकरी लगवाने के लिए पैसे लेने की मांग करने के आरोप भी लगा रहे हैं.
सीबीआई जांच के आश्वासन मिलने के बाद भी छात्रों का कहना है कि जब तक उन्हें मंत्रालय से लिखित में आश्वासन नहीं मिलता तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. इतना ही नहीं छात्रों का कहना है कि जब तक सीबीआई जांच शुरू नहीं हो जाती तब तक वो अपना संघर्ष जारी रखेंगे. छात्रों ने ये भी चेतावनी दे दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर छात्र मंगलवार को एक दिन के अनशन पर बैठने की तैयारी में हैं.
कर्मचारी चयन आयोग यानी स्टाफ सलेक्शन कमीशन केंद्र सरकार की ओर से स्थापित एक आयोग है, जो केंद्र सरकार के मंत्रालयों और अन्य विभागों में ग्रुप बी, सी और डी के कर्मचारियों का चयन करता है. साथ ही चयन के लिए परीक्षा और इंटरव्यू का आयोजन करता है. यह तीन तरह की परीक्षाएं करवाता है. पहला सीजीएल (कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल) एग्जाम, दूसरा सीएचएसएल और तीसरा एमटीएस. इन परीक्षाओं से चुनकर जो छात्र आते हैं, वो इनकम टैक्स ऑफिसर, सेल टैक्स, केंद्रीय सचिवालय जैसे कई विभागों में रैंक के आधार पर अधिकारी बनते हैं.