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क्रिकेट टीम में खेलने लायक हैं या नहीं, तय करता ये मुश्किल टेस्ट

क्रिकेट टीम में खेलने लायक हैं या नहीं, तय करता ये मुश्किल टेस्ट
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अगर आप भारतीय क्रिकेट टीम में खेलना चाहते हैं तो आपको फिजिकल टेस्ट से भी गुजरना होगा. ये टेस्ट खेल कौशल, मानसिक शक्ति, सहनशक्ति और शारीरिक धीरज को परखता है. जिसमें सफल होने के बाद ही आप भारत की क्रिकेट टीम में खेलने के काबिल बनते हैं. आइए जानते हैं इस टेस्ट के बारे में...
क्रिकेट टीम में खेलने लायक हैं या नहीं, तय करता ये मुश्किल टेस्ट
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भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए यो-यो टेस्ट को बेंचमार्क माना गया है. आपको बता दें,  भारतीय टीम ने फिटनेस टेस्ट पास करने के लिए यो-यो टेस्ट को पैमाना बनाया है, जो खिलाड़ी के दमखम और फिटनेस का विश्लेषण करता है. भारत की सीनियर और ए टीम के लिए मौजूदा मानक 16.1 है.
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क्या है यो-यो टेस्ट..?

यो- यो टेस्ट में कुल मिलाकर 25 मीटर की लेन तैयारी की जाती है. जिसमें तीन छोर होते हैं. पहले छोरे से दूसरे छोर की दूरी 5 मीटर की होती है. 5 मीटर की इस लेन को रिकवरी लेन भी कहा जाता है. इसमें खिलाड़ी को पैदल चलना होता है. जिसके बाद दूसरे छोरे से तीसरे छोर की दूरी 20 मीटर की होती है. जिसमें खिलाड़ी को तेजी से दौड़ना होता है. इस लिए इन लेन को स्पिन या शटल लेन भी कहा जाता है.




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यो-यो टेस्ट की शुरुआत दूसरे छोर से होती है क्योंकि पहले छोर से दूसरे छोर की बीच सिर्फ पैदल चलना होता है. इसके बाद खिलाड़ी दूसरे छोर तक तेजी से दौड़ लगाता है. फिर उन्हें तीसरे छोर से वापस आना पड़ता है. इसके बाद खिलाड़ी 5 मीटर की लेन में पैदल चलते हैं ताकि उस समय वह अपनी सांस को बैलेंस कर सके. इसके बाद फिर खिलाड़ी दूसरे छोर से तीसरे छोर तक तेजी से दौड़ लगाते हैं और फिर वापस आ जाते हैं. बता दें, यह पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर पर आधारित है, जिसमें नतीजे रिकॉर्ड किए जाते हैं.



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क्या है यो-यो टेस्ट के मापदंड

भारत में यो- यो टेस्ट को पास करने के लिए एक पैमाना सेट किया गया है. जिसके चलते हर खिलाड़ी को निर्धारित समय में इस टेस्ट को खत्म करना होता है. कम से कम 16.1 अंक हासिल करने होते हैं. जो भी खिलाड़ी 16.1 से कम अंक हासिल करता है तो उसे टेस्ट से फेल कर दिया जाता है. जिसके साथ ही उसे टीम से बाहर कर दिया जाता है.



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इन देशों में यो- यो टेस्ट पास करने के ये पैमाने


भारत ही नहीं बाकी देशों में यो- यो टेस्ट करने के अलग- अलग पैमाने हैं. न्यूजीलैंड की टीम में शामिल होने के लिए खिलाड़ियों को 20.1 अंक लाने होते हैं. वेस्टइंडीज टीम को 19 अंक लाने होते हैं.
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वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान के खिलाड़ियों को टीम में शामिल होने के लिए 17. 4 अंक लाने होते हैं. अगर पाकिस्तान टीम के खिलाड़ी इतने अंक नहीं लाते हैं तो उन्हें भी टीम से बाहर कर दिया जाएगा.
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आपको बता दें, यो-यो टेस्ट में मोहम्मद शमी फेल हो गए थे, जिस वजह से उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ हुए एकमात्र टेस्ट मैच के लिए टीम से बाहर कर दिया गया था. ऐसा नहीं है यो- यो टेस्ट हर मैच से पहले खिलाड़ियों के लिए आयोजित किया जाता है. BCCI खिलाड़ियों की फिनटेस को देखते हुए इस टेस्ट का आयोजन करता है.

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वहीं जब कोई खिलाड़ी चोटिल होता है तो उस स्थिति में खिलाड़ियों को आराम देने नेशनल क्रिकेट एकेडमी भेजा जाता है जब वह पूरी ठीक हो जाते हैं तो उसके बाद उस खिलाड़ी के लिए  यो- यो टेस्ट  आयोजित किया जाता है, ये देखने के लिए कि वह मैदान में खेलने के फिजिकल है या नहीं.


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भारत या पाकिस्तान, कौन से कैप्टन हैं फिट

साल 2018 में पाकिस्तान के कप्तान सरफराज अहमद ने एशिया कप से पहले यो-यो टेस्ट पास तो अच्छे अंकों के साथ कर लिया लेकिन वह विराट कोहली से आगे नहीं निकल पाए हैं. गौरतलब है कि विराट कोहली ने यो-यो टेस्ट 19 अंकों के साथ पास किया था वहीं, सरफराज अहमद 18.2 अंक तक सिमट कर रह गए थे.


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