उन्होंने बताया वैसे तो नौकरी और शादी के बाद धीरे-
धीरे फाइनेंशियली सिक्योरिटी आती रही. फिर कुछ समय बाद मन हुआ कि जीवन में कुछ और करना
चाहिए.
इसी के साथ कॉरपोरेट नौकरी के डेली
रूटीन से नीरसपन आ गया था. ऐसा
महसूस होता है कि "क्या एक्सल फाइल,
प्रेजेंटेशन और बैक एंड वर्क करते रह जाएंगे सारी
जिंदगी." मैंने महसूस किया कि इस नौकरी से मेरी फाइनेंशियली जरूरतें पूरी हो रही
है लेकिन मैं आंतरिक रूप से संतुष्ट नहीं हूं.
जिसके बाद मेरा ये एहसास धीरे- धीरे मजबूत
होता जा रहा था.