आज दुनियाभर में विश्व पुस्तक दिवस मनाया जा रहा है. 23 अप्रैल 1995 को पहली बार यूनेस्को ने इस दिवस की शुरुआत की थी. अब यह पूरी दुनिया के 100 से अधिक देशों में मनाया जाता है. हम सभी जानते हैं किताबें हम सब के लिए कितनी महत्वपूर्ण हैं. लेकिन देश और दुनिया में ऐसे भी कई बच्चे भी हैं जो पढ़ना तो चाहते हैं लेकिन उनके पास किताबें नहीं है. विश्व पुस्तक दिवस के मौके पर हम ऐसे ही एक शख्स की कहानी लेकर आए हैं जो पिछले 20 साल से गरीब बच्चों के लिए एक अनोखी लाइब्रेरी चला रहा है.
कोलंबिया के रहने वाले इस शख्स का नाम लुईस सोरियानो हैं. वह कोलंबिया के ग्रामीण इलाके 'ला ग्लोरिया' में टीचर थे. इस इलाके के ज्यादातर बच्चों के पास किताबें नहीं थीं.
बच्चों की पढ़ाई के खातिर वह गधों पर किताबें लादकर मीलों का सफर तय करते हैं.
आप ये कह सकते हैं लुईस गधों पर एक चलती-फिरती लाइब्रेरी चला रहे हैं.
उनकी इस अनोखी लाइब्रेरी का नाम Biblioburro है.
एक टीचर होने की वजह से वह जानते थे कि एजुकेशन कितनी जरूरी है. जब उन्हें मालूम चला जब मालूम चला कि इलाके के बच्चों के पास पढ़ने के लिए किताबें नहीं हैं तो उन्होंने बच्चों तक किताबें पहुंचाने का काम शुरू कर दिया.
किताबें बच्चों तक पहुंचाने के वह अपने दो गधों
का भी इस्तेमाल करते हैं.
इन दोनों गधों का नाम 'अल्फा' और 'बेटो' है.
बता दें, वह पिछले बीस सालों से गधों की मदद से बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक कर कर रहे हैं.
वह अपने गधों बच्चों की जरूरत की सभी किताबें लेकर जाते हैं. जब उन्होंने
गधे पर ये लाइब्रेरी शुरू की थी उस दौरान उनके पास करीब 70 किताबें थीं.
इनमें इतिहास, भूगोल, विज्ञान, फिलॉसफी से लेकर बच्चों के लिए कहानियों की
किताबें शामिल थी.
लुईस जहां बच्चों को किताबें पहुंचा कर उनका भविष्य बना रहे हैं, वहीं
उन्होंने इस बात को भी साबित कर दिखाया गधों का इस्तेमाल सिर्फ बोझ उठाने
के लिए ही नहीं किया जाता.
आपको बता दें, जब लुईस के बारे में लोगों को पता चला कि वह गधों के जरिए
किताबें गरीब बच्चों तक पहुंचा रहे हैं, तो दुनिया भर से लुईस की गधा
लाइब्रेरी के लिए मदद आने लगी.
लुईस की लाइब्रेरी में अब करीब 3 हजार किताबें शामिल हो गई है. वह अपनी
लाइब्रेरी में और किताबें शामिल करना चाहते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा
बच्चों की मदद कर सके.
उन्हें देखकर इलाके के और लोग भी अब गधों पर किताबें लादकर बच्चों को
शिक्षा के प्रति जागरूक करते हैं. ये कहना सही होगा लुईस की ये लाइब्रेरी
दुनिया की अनोखी लाइब्रेरी है.
(फोटोज साभार: youtube, facebook, twitter)