महज 18 साल की उम्र में महारानी बनी क्वीन विक्टोरिया का जन्म 24 मई, 1819 को हुआ था. क्वीन विक्टोरिया ने 40 करोड़ से ज्यादा लोगों पर राज किया. महारानी विक्टोरिया दुनिया की पहली महारानी बनीं, जिन्होंने दुनिया के एक चौथाई हिस्से पर राज किया. ब्रिटेन का विश्व शक्ति बन भी महारानी विक्टोरिया की कोशिशों का ही नतीजा था.
विक्टोरिया के जन्म के 8 महीने बाद ही पिता का देहांत हो गया. विक्टोरिया के मामा ने उनकी शिक्षा-दीक्षा का कार्य बड़ी निपुणता से संभाला. वे स्वयं भी बड़े योग्य और अनुभवी व्यक्ति थे. साथ ही वे पुरानी सभ्यता के पक्षपाती थे.
विक्टोरिया को किसी भी पुरुष से एकांत में मिलने नहीं दिया गया. यहां तक कि बड़ी उम्र के नौकर-चाकर भी उनके पास नहीं आ सकते थे. जितनी देर वे शिक्षकों से पढ़तीं, उनकी मां या दाईमां उनके पास बैठी रहतीं.
18 साल की उम्र में विक्टोरिया गद्दी पर बैठीं. वे लिखती हैं कि मंत्रियों की रोज इतनी रिपोर्टें आती हैं और इतने अधिक कागजों पर हस्ताक्षर करने पड़ते हैं कि मुझे बहुत श्रम करना पड़ता है. किंतु इसमें मुझे सुख मिलता है. राज्य के कामों के प्रति उनका यह भाव अंत तक बना रहा. इन कामों में वे अपना एकछत्र अधिकार मानती थीं.
अपने अधिकारों और शक्ति को लेकर विक्टोरिया इतनी सख्त थीं कि वे मामा और मां तक का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करती थीं. यहां तक कि कामकाज के मामले में उन्हें किसी पर भरोसा नहीं था.
उनमें बुद्धि-बल चाहे कम रहा हो पर चरित्रबल बहुत अधिक था. पत्नी, मां और रानी - तीनों रूपों में उन्होंने अपना कर्तव्य अत्यंत ईमानदारी से निभाया. घर के नौकरों तक से उनका व्यवहार बड़ा सुंदर होता था. भारी वैधव्य-दुःख से दबे रहने के कारण दूसरों का दुःख उन्हें जल्दी स्पर्श कर लेता था. रेल और तार जैसे उपयोगी आविष्कार उन्हीं के काल में हुए.
रानी विक्टोरिया पर उनके जीवन काल में कुल पांच बार जानलेवा हमले हुए लेकिन वो इन सब से बच निकलीं. साल 1883 में रानी विक्टोरिया विंडसर किले की सीढ़ियों से गिर गयी और इसके बाद वो इससे कभी उभर नहीं सकीं. हालांकि इसके बावजूद भी उन्होंने अपनी गोल्डन जुबली और डायमंड जुबली सालगिरह मनाई और साल 1901 में इस दुनिया से चली गयीं. वो सबसे लंबे समय तक ब्रिटेन की रानी बनी रहीं पर बाद में एलिज़ाबेथ द्वितीय ने इससे भी लंबे समय तक रानी बने रहने का रिकॉर्ड बनाया.