केंद्र सरकार ने कॉलेजियम की सिफारिश के आधार पर वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा की सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. वह सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वालीं पहली महिला वकील होंगी. आइए जानते हैं उनके बारे में...
इंदु मल्होत्रा की सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज नियुक्ति होने पर
उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की फाइल को फिलहाल रोक कर रखा गया है.
इस बात की जानकारी पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ट्वीट के जरिेए दी. जहां उन्होंने लिखा , 'खुश हूं कि इंदु मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगी.
वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट में जज बनने वाली पहली महिला इंदु मल्होत्रा का जन्म 14 मार्च 1956 को बंगलुरु में हुआ था. इनके पिता सुप्रीम कोर्ट में वकील थे.
उनकी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के कॉर्मल कॉन्वेंट स्कूल से हुई. जिसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री ली. फिर उन्होंने फैकल्टी ऑफ लॉ पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स किया. जिसके बाद उन्होंने डीयू के मिरांडा हाउस और विवेकानंद कॉलेज में पॉलिटिकल साइंस पढ़ाया. 1979 से 1982 की अवधि के दौरान उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की.
उन्होंने 2014 में ‘The Law and Practice of Arbitration and Conciliation, 2014’ नाम की किताब लिखी है, जो अप्रैल 2014 में छपी थी..
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में शुरुआत के 39 वर्षों में कोई महिला जज नहीं रही. 1989 में फातिमा बीबी को सुप्रीम कोर्ट की जज बनाया गया. इसके बाद जस्टिस सुजाता मनोहर, जस्टिस रुमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस रंजना देसाई को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया. इंदु मल्होत्रा आजादी के बाद से अभी तक सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली छठी महिला होंगी.