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टेंट में रहा, भूखे पेट सोया, गोलगप्पे बेचे, अब U-19 में हुआ सिलेक्ट

टेंट में रहा, भूखे पेट सोया, गोलगप्पे बेचे, अब U-19 में हुआ सिलेक्ट
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जीवन में जो इंसान कुछ हासिल करना वह कड़ी मेहनत और  लगन के साथ अपना लक्ष्य हासिल कर ही लेते हैं. आज ही कहानी एक ऐसे ही लड़के की है जो टेंट में रहता था, भूखे पेट सोता था और कुछ पैसे कमाने के लिए पानी पूरी/गोलगप्पे बेचा करता था. वहीं आपको जानकर हैरानी होगी. इस लड़के का सेलेक्शन भारत की अंडर 19 क्रिकेट टीम में हो गया है. आइए जानते हैं- इस लड़के की पूरी कहानी..
(प्रतीकात्मक फोटो)
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इस 17 साल के लड़के नाम यशस्वी जायसवाल है.  (फोटो: फेसबुक)
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जब यशस्वी 11 साल के थे तो उत्तर प्रदेश के भदोही से एक बड़ा क्रिकेटर बनने का सपना लिए आजाद मैदान में 'मुस्लिम यूनाइटेड क्लब' में रहे.
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आपको बता दें, श्रीलंका दौरे पर भारतीय अंडर- 19 टीम को चार दिवसीय मैच के साथ एक वन-डे मैच भी खेलना है. कुछ दिन पहले ही भारतीय अंडर- 19 क्रिकेट टीम का ऐलान किया गया था. जिसमें सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर का भी नाम है. (फोटो: सोशल मीडिया)
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भारतीय अंडर- 19 क्रिकेट टीम में यशस्वी का सेलेक्शन होना किसी सपने से कम नहीं है. इस जगह पर पहुंचने के लिए उन्होंने काफी कठिनाईयों का सामना भी किया.
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उनके पिता बेहद गरीब थे, लेकिन वह गुजारा करने के लिए पूरे नहीं थे. इसलिए वह अपना खर्चा चलाने के लिए पानी पूरी बेचा करता था.
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मुंबई क्रिकेट अंडर-19 के कोच सतीश सामंत का कहना है कि क्रिकेट को लेकर उसका फोकस कमाल का है. कोच यशस्वी के खेल से खास प्रभावित हैं. उन्होंने कहा वह आगे जाकर एक बड़े क्रिकेटर बनेंगे.
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यशस्वी के दो भाई हैं और वह दोनों से छोटे हैं. उनके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी फिर भी यशस्वी जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते थे, जिसके बाद वह अपने सपनों को पंख देने के लिए मुंबई आ गए है. जिसके बाद उसके घर वालों ने उसे रोका नहीं.
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यशस्वी मुंबई तो आ गए थे लेकिन सवाल ये था कि वह इतने बड़े शहर में कहां और किसके पास रहेंगे. (प्रतीकात्मक फोटो)
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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यशस्वी के एक अंकल संतोष मुंबई में रहते थे, जिनका घर वर्ली में था. हालांकि घर इतना बड़ा नहीं था किसी अन्य व्यक्ति को रहने की जगह मिल सके. जिसके बाद उनके अंकल ने मुस्लिम यूनाइटेड क्लब के मालिकों से अनुरोध किया था, जहां वह एक मैनेजर जिसने यशस्वी को टेंट में रहने की इजाजत दी. (फोटो:सोशल मीडिया)
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संघर्ष के तीन साल तक टेंट की उनके लिए उनका घर बन गया था.  (फोटो: getty images )
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उनके पिता खर्चे के लिए कुछ पैसे भेजा करते थे लेकिन खर्चा चलाने के लिए पैसे कम पड़ जाते थे, जिसके बाद उन्होंने गुजारा करने के आजाद मैदान में राम लीला के दौरान पानी पूरी बेचने का काम किया. साथ ही फल भी बेचे. (फोटो:getty images )
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यशस्वी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया राम लीला के दौरान, मैंने अच्छी कमाई की. इसी के साथ उन्होंने कहा मैं इस बात से घबराता था कि जहां मैं पानीपूरी बेच रहा हूं वहां मेरे दोस्त न आ जाए. पानीपूरी से वह हफ्ते में 200 से 300 रुपये कमा लेते थे. (फोटो:getty images )
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उन्होंने बताया मेरा लंच और डिनर टेंट में ही होता था. मेरा काम रोटी बनाने का था. और अक्सर अंधेरे में ही खाना खाता था. क्योंकि टेंट में लाइट नहीं होती थी. न जाने कितनी ही रातें वह भूखे पेट सोए हैं. (फोटो: getty images )
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उन्होंने कहा मेरे लिए संघर्ष का समय बेहद ही कष्टदायक था. मैं देखता था मेरी साथ खेलने वाले मेरे साथ अपने साथ लंच और खाने की काफी अच्छी चीजें लेकर आते थे क्योंकि उनके माता-पिता उनके लिए लंच पैक करते थे, लेकिन मैं हमेशा सोचता था कि मेरे लिए मैं ही हूं. क्योंकि यहां तो 'खुद खाओ और खुद बनाओ'. यशस्वी ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि- एक बार अपनी टीम के दोस्तों के साथ लंच करने गया, मैं जानता था कि मेरे पास पैसे नहीं है, जिसके बाद मैंने अपने दोस्तों से कहा- 'पैसा नहीं है, भूख हैं.

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वहीं सतीश सामंत ने बताया यशस्वी के अंडर-19 टीम में सेलेक्शन का श्रेय उनके कोच ज्लावा सिंह को जाता है, जहां ज्वाला ने उन्हें आजाद मैदान पर देखा और उनके खेल को निखारने के लिए कहा.
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जब यशस्वी अंडर-19 में सिलेक्ट हुए तो उनसे प्रेशर के बारे में पूछा गया था उन्होंने जवाब दिया कि वह रोजाना जीवन में प्रेशर झेलते हैं जो उन्हें मजबूत बनाते हैं. उन्होंने कहा- ' मैं जानता हूं मुझे खेल में ज्यादा रन और विकेट लेने है'.
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