1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की मशहूर लोंगेवाला पोस्ट बैटल के हीरो कुलदीप सिंह चांदपुरी अब हमारे बीच नहीं रहे. 78 साल की उम्र में उनका मोहाली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. लंबे समय से बीमार चल रहे थे. (सनी देओल के साथ ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी (फोटो-Rediff)
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कुलदीप सिंह चांदपुरी वही थे जिनका किरदार 1997 में आई 'बॉर्डर' फिल्म बनाई गई थी. जिसमें उनका किरदार बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल ने निभाया था. (फिल्म बॉर्डर में सनी देओल की एक तस्वीर (फोटो: सोशल मीडिया )
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उन्होंने राजस्थान, जैसलमेर के लोंगेवाला की प्रसिद्ध लड़ाई में महज 120 जवानों के साथ, पाकिस्तानी टैंकों के हमले का डटकर सामना किया था. जिसमें पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी.(फोटो: फेसबुक)
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कुलदीप और उनकी टीम लोंगेवाल में भारतीय सीमा की रक्षा कर रहे थे. उस दौरान पाकिस्तान के करीब 4000 सैनिकों ने उनकी पोस्ट पर हमला बोल दिया था. जिसके बाद पाकिस्तानी फौज 4 दिसंबर करीब 10 बजे भारत के बोर्डर पर आ चुकी थी. जिसके बाद लोंगेवाला में हमला बोल दिया था.
(फोटो: फेसबुक)
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कुलदीप ने बताया था उस जंग के लिए हमारे पास पूरी तैयारी थी. जहां उन्होंने 120 जवानों के साथ, पाकिस्तानी टैंकों के हमले का डटकर सामना किया था और उन्हें खदेड़ दिया था. (फोटो: फेसबुक)
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कुलदीप का जन्म गुर्जर परिवार में 22 नवंबर 1940 को हुआ था. वे एनसीसी के सक्रिय सदस्य थे. साल 1962 में उन्होंने सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की थी. आपको बता दें, कुलदीप सिंह भारतीय सेना में सेवा देने वाले अपने परिवार के तीसरी पीढ़ी के सैन्य अधिकार थे. (फोटो: फेसबुक)
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कुलदीप 1962 में सेना में भर्ती हुए थे. उस समय उनकी उम्र 22 साल की थी. उन्होंने चेन्नई के ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से कमीशन प्राप्त किया और पंजाब रेजीमेंट की 23वीं बटालियन में शामिल हुए. उन्होंने 1965 के युद्ध में भाग लिया जहां वे पश्चिमी सेक्टर में तैनात थे. (फोटो: फेसबुक)
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युद्ध के दौरान उन्होने एक साल के लिए संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन बल को अपनी सेवाएं दी और (UNEF) गाजा (मिस्र) में अपनी सेवाएं दी. साथ ही वह दो बार मऊ (मध्य प्रदेश) के प्रतिष्ठित इन्फैंट्री स्कूल में इन्स्ट्रक्टर भी रहे.
(फोटो: फेसबुक)
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आपको बता दें, वह बचपन से ही फौज में शामिल होना चाहते थे. ये प्रेरेणा उन्हें परिवार से ही मिली है. एक इटरव्यू में उन्होंने कहा था. ' अगर मरने के बाद भी मौका मिले हम तो फौज में ही जाएंगे'. उन्होंने 32 साल का देश की सेवा की है. (फोटो: फेसबुक)
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टैंकों के खिलाफ वीरता से खड़े होने और दुश्मन को पीछे हटने के लिए मजबूर करने के लिए उन्हें महावीर चक्र (एमवीसी) से सम्मानित किया गया.(फोटो: फेसबुक)