आज भी जोश, जज्बे, हौसले और सच्चाई का दूसरा नाम भगत सिंह है. महज 23 साल की उम्र का वो युवा जो हमें आजाद कराने की चाहत में हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम गया. आप जानकर हैरान होंगे कि उनकी बुद्धि इतनी प्रखर थी कि उन्होंने छोटी सी ही उम्र में सैकड़ों किताबें पढ़ ली थीं. 20 की उम्र तक वो हिंदी, उर्दू, पंजाबी, संस्कृत और अंग्रेजी आदि कई भाषाएं जानते थे. उनके हाथों से चार भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू और पंजाबी में लिखे ये खत देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं. ये खत आज पूरे देश की अमानत हैं, आइए जानें, उन्होंने ये खत कब, किस भाषा में और किस-किसके लिए लिखे थे.
पत्र का स्रोत: भगत सिंह के ऐतिहासिक दस्तावेज (पुस्तक)
(संपादक: चमनलाल)