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एजुकेशन

भगत सिंह के हाथ से 4 भाषाओं में लिखे ये 4 खत अब हैं देश की अमानत

भगत सिंह के हाथ से 4 भाषाओं में लिखे ये 4 खत अब हैं देश की अमानत
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आज भी जोश, जज्बे, हौसले और सच्चाई का दूसरा नाम भगत सिंह है. महज 23 साल की उम्र का वो युवा जो हमें आजाद कराने की चाहत में हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम गया. आप जानकर हैरान होंगे कि उनकी बुद्धि इतनी प्रखर थी कि उन्होंने छोटी सी ही उम्र में सैकड़ों किताबें पढ़ ली थीं. 20 की उम्र तक वो हिंदी, उर्दू, पंजाबी, संस्कृत और अंग्रेजी आदि कई भाषाएं जानते थे. उनके हाथों से चार भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू और पंजाबी में लिखे ये खत देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं. ये खत आज पूरे देश की अमानत हैं, आइए जानें, उन्होंने ये खत कब, किस भाषा में और किस-किसके लिए लिखे थे.

पत्र का स्रोत: भगत सिंह के ऐतिहासिक दस्तावेज (पुस्तक)
(संपादक: चमनलाल)
भगत सिंह के हाथ से 4 भाषाओं में लिखे ये 4 खत अब हैं देश की अमानत
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ये कार्ड उन्होंने अपने दोस्त जयदेव गुप्त के नाम लिखा था, ये 26 मई 1930 को लिखा था.
ये है खत का मजमून

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उर्दू भाषा में भगत सिंह ने ये खत अपने दादा जी को लिखा था. ये सन 1921 को लिखा था.


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ये खत उन्होंने बचपन में 14 साल की उम्र में लिखा था. जब वो अपने पिता के साथ पढ़ाई के लिए लाहौर आ गए थे.

मेरी परमप्यारी चाची जी,
नमस्ते
मुझे खत लिखने में देरी हो गई, उम्मीद है कि आप मुझे इसके लिए माफ करेंगी. आहिया जी(पिता जी) दिल्ली गए हुए हैं. मां ओरावली (ननिहाल) गई हुई है. बाकी सब राजीखुशी है. बड़ी चाची जी को माथा टेकना, माता जी (दादी) को भी माथा टेकना.

आपका आज्ञाकारी
भगत सिंह
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भगत सिंह ने हिंदी भाषा में ये खत 27 फरवरी महारथी के संपादक को लिखा था.