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छत्तीसगढ़: PG काउंसिलिंग‍ विवाद के बाद मॉप-अप राउंड की अलॉटमेंट लिस्‍ट फिर कैंसिल

NEET PG Counselling Cancelled: छत्तीसगढ़ में पीजी काउंसलिंग में विवाद के बाद मापअप राउंड की पूरी आवंटन सूची फिर कैंसिल कर दी गई. इस खबर को aajtak.in ने प्रमुखता से उठाया था. इस खबर का संज्ञान लेते हुए बुधवार को नए सिरे से आवंटन सूची जारी की जाएगी.

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प्रतीकात्मक फोटो (Getty)
प्रतीकात्मक फोटो (Getty)

NEET PG Counselling Cancelled: छत्तीसगढ़ में लगातार विवादों के बाद चिकित्सा शिक्षा संचनालय ने मेडिकल पीजी के मॉप-अप राउंड की पूरी आवंटन सूची ही रद्द कर दी. अब आज बुधवार को नए सिरे से आवंटन सूची जारी की जाएगी. aajtak.in ने इस खबर को 16  नवंबर प्रमुखता से छापा था. खबर के अनुसार 29 छात्रों को केंद्र और राज्य कोटे दोनों से ही सीट आवंटित कर दी गई थी. इसके बाद मामला आला अफसरों तक पहुंच गया. बढ़ते विवाद के बाद सूची ही रद्द कर दी गई. पुरानी आवंटन सूची में एक और बड़ी खामी सामने आई कि NRI कोटे की सीटों को एससी  कैटेगरी के छात्रों को आवंटन कर दिया था.

नियमानुसार एससी नो क्लास की खाली सीटों को एनआरआई एससी नो क्लास में परिवर्तित करना था लेकिन यह सीटें सीधे एससी कैटेगरी के छात्रों को आवंटित कर दी गई क्योंकि टाइपिंग में एनआरआई शब्द छूट गया था. डीएमई की वेबसाइट पर जो नोटिस जारी किया गया था उसमें कंप्यूटर प्रोग्रामर्स ने संचालन चिकित्सा शिक्षा को मॉप-अप राउंड की त्रुटि के बारे में बताया है. साथ ही कहा गया है कि गलत आवंटन में पूरी सूची प्रभावित हुई है. प्रोग्रामर्स के पत्र के बाद डीएमई डॉ विष्णु दत्त ने पूरी सूची को रद्द कर नए सिरे से आवंटन सूची जारी करने को कहा है. 

आवंटन सूची  पर पहले से बवाल, हाईकोर्ट में याचिका की आज सुनवाई

ऑल इंडिया कोटा के मॉप-अप राउंड के साथ स्टेट कोटे के मॉप-अप राउंड की आवंटन सूची पर सोमवार से ही बवाल मचा हुआ है. मंगलवार को 3 छात्रों ने इस सूची के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाई है. इस पर आज बुधवार को सुनवाई होगी. छात्रों ने याचिका में कहा है कि ऑल इंडिया के साथ  स्टेट कोटे की आवंटन सूची जारी की गई है जो आपत्तिजनक है. इसमें 29 सीटें ब्लॉक हो जाएंगी. 

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आवंटन मिलने के बाद यह  छात्र स्टेट राउंड में शामिल हो जाएंगे. इस राउंड में वही शामिल होंगे जिन्हें अब तक कोई आवंटन नहीं मिला है. छात्रों ने स्टेट राउंड के लिए नियम शिथिल करने की भी मांग की है. यूनाइटेड डॉक्टर एसोसिएशन ने भी सूची पर आपत्ति करते हुए इसे रद्द करने की मांग की थी. 

सरकारी व निजी कॉलेजों की फीस में बड़ा अंतर

एडमिशन के लिए छात्र सरकारी कॉलेजों को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की फीस में भारी अंतर है. सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सालाना फीस 20 हजार और तीन साल की फीस 60 हजार रुपये है. वहीं निजी कॉलेज में पीजी 1 साल में 10 लाख से 25 लाख रुपये तक लेते हैं. इस हिसाब से 3 साल के कोर्स की फीस 30 लाख से 75 लाख तक होती है इसलिए ज्यादातर छात्र  चाहते हैं उनका एडमिशन सरकारी कॉलेज में ही हो. इसमें पढ़ाई पर उनका खर्चा कम होगा. पढ़ाई के दौरान पीजी छात्रों को 55 हजार से 60 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड भी दिया जाता है. 

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव आर. प्रसन्ना ने कहा टाइपिंग की त्रुटि से आवंटन सूची प्रभावित हुई है. इसलिए सूची को रद्द कर नए सिरे से जारी की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट और एमसी की गाइडलाइन के अनुसार ही काउंसलिंग की जा रही है. 26 नवंबर तक काउंसलिंग खत्म करना है नहीं तो बची सीटें निरस्त हो जाएंगी.

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 6 छात्रों को काउंसलिंग से बाहर किया तो हाईकोर्ट ने कहा शामिल करें

नीट यूजी में अच्छी रैंक आने के बावजूद 6 छात्रों को एमबीबीएस काउंसलिंग से बाहर कर दिया गया था. उन्होंने हाईकोर्ट में फिर से काउंसलिंग में शामिल करने का आदेश दिया है. दूसरे चरण की काउंसलिंग में सभी छात्रों को शामिल किया जाए. इन छात्रों को सरकारी के अलावा निजी कॉलेज में एमबीबीएस सीटें मिलने की संभावना के चलते छात्रों को काउंसलिंग से बाहर किया था. उन पर आरोप था कि उन्होंने फॉर्म री-सेट करने के बाद उसे पूरा नहीं भरा.

DME कार्यालय की यह दलील हाईकोर्ट ने खारिज कर दी और छात्रों को काउंसलिंग में शामिल करने का आदेश दिया. काउंसलिंग से अपात्र छात्रों को 720 में 531 ,465 ,463 380 ,362 व 154 नंबर मिले हैं. मेडिकल  जानकार का मानना है कि इन्हें 531 नंबर वाले को सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिल जाएगी. वहीं बाकी को भी सरकारी निजी कॉलेजों में एमबीबीएस सीट मिलने की पूरी उम्मीद है.

 

 

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