दिल्ली के पीरागढ़ी झुग्गी बस्ती की एक महिला छात्रा ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. उसे ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने के लिए स्कॉलरशिप दी गई है. यह महिला पिछले कई सालों से शिक्षा के क्षेत्र में लगातार मेहनत कर रही थी. मुश्किल परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उसने अपने लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ा. पीरागढ़ी की यह महिला छात्रा अब ऑस्ट्रेलिया में हायर एजुकेशन प्राप्त करेगी, जिससे उसके सपनों को नई उड़ान मिलेगी. कैनबरा में आयोजित एक राष्ट्रीय उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन में ऑस्ट्रेलियाई शिक्षा मंत्री ने उनकी इस उपलब्धि की सराहना की.
बस्ती में पली -बढ़ी
दिल्ली स्थित एनजीओ आशा की ओर से चलाई जा रही एक झुग्गी बस्ती में पली-बढ़ी नैंसी को मेलबर्न विश्वविद्यालय के मास्टर ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस कार्यक्रम में एडमिशन मिला है. नैंसी को मेलबर्न वेलकमिंग यूनिवर्सिटीज स्कॉलरशिप से सम्मानित किया गया है और उनका पाठ्यक्रम अगले हफ्ते शुरू होने वाला है. उन्हें कैनबरा में आयोजित यूनिवर्सिटीज ऑस्ट्रेलिया सॉल्यूशंस समिट 2026 में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था.
शिक्षा मंत्री ने की तारीफ
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने नैंसी की भागीदारी को स्वीकार किया. इतना ही नहीं मंत्री ने एनजीओ की संस्थापक किरण मार्टिन की भी प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि एक युवती जिसे डॉ. किरण की बदौलत वह शिक्षा मिली. उसने स्कूल की पढ़ाई पूरी की, विश्वविद्यालय गई और ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. उसने पॉलिटिकल साइंस में अपनी पढ़ाई पूरी की और सम्मान के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.
आसान नहीं था सफर
झुग्गी बस्ती की तंग गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का यह सफर आसान नहीं था. आर्थिक तंगी, पढ़ाई के लिए सीमित साधन और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी. कई बार परिस्थितियां उसके रास्ते में बाधा बनीं, लेकिन उसने हार नहीं मानी. उसकी लगन, अनुशासन और लगातार प्रयासों का ही परिणाम है कि अब उसे ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने का अवसर मिला है. यह स्कॉलरशिप न केवल उसकी प्रतिभा की पहचान है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि मेहनत और दृढ़ संकल्प से कोई भी बाधा पार की जा सकती है.