आज के दौर में नौकरी के मार्केट में सैलरी बढ़ना अक्सर बड़ी जीत की तरह देखा जाता है लेकिन कई बार ये आपकी नौकरी भी खत्म कर देती है. HR एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कोई कर्मचारी दूसरी कंपनी का ऑफर मिलने के बाद अपनी मौजूदा कंपनी से काउंटर ऑफर स्वीकार करता है, तो यह हमेशा उसके लिए फायदेमंद नहीं होता.
इसे लेकर HR प्रोफेशनल और एक्स (X) यूजर साइमन इंगारी का एक पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. उन्होंने हायरिंग से जुड़ा एक किस्सा शेयर किया है, जिसमें उम्मीदवार को एक ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा जिसके बारे में उसने सोचा नहीं होगा.
क्या है पूरा मामला?
पोस्ट में साइमन इंगारी ने बताया कि एक उम्मीदवार को दूसरी कंपनी से अच्छा जॉब ऑफर मिला था. लेकिन उसकी मौजूदा कंपनी ने उसे ज्यादा सैलरी देने का वादा किया, जिसके बाद उसने नई कंपनी का ऑफर छोड़कर अपनी पुरानी कंपनी में ही रहने का फैसला कर लिया. उन्होंने आगे बताया कि कर्मचारी की सैलरी करीब 1 लाख रुपये प्रति महीने थी. उसे दूसरी कंपनी से 1.7 लाख रुपये प्रति माह का नया जॉब ऑफर मिला,जो उसकी सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी शो कर रहा था और उसके करियर ग्रोथ के लिए भी बड़ा अवसर था. लेकिन ऑफर लेटर मिलने के कुछ ही मिनट बाद उसने अपना नाम वापस ले लिया. ऐसा इसलिए क्योंकि उसकी मौजूदा कंपनी ने उसे 1.9 लाख रुपये प्रति माह का काउंटर ऑफर दे दिया था, जिसके बाद उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया.
नौकरी से निकाल दिया...
शुरुआत में यह फैसला समझदारी वाला लग रहा था क्योंकि बिना कंपनी बदले ही उसकी सैलरी बढ़ गई थी. लेकिन कुछ ही समय बाद हालात बदल गए. करीब चार महीने बाद उसी उम्मीदवार ने साइमन से संपर्क किया. इंगारी ने बताया कि कर्मचारी को उसकी कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया था और वह दूसरी नौकरी के तलाश में था. उसने फोन करके कहा कि मुझे बहुत खेद है, लेकिन क्या आपके पास हायरिंग के लिए कोई पद खाली है. इंगारी ने कहा कि यह घटना उस पैटर्न को दर्शाती है जिसे उन्होंने हायरिंग के क्षेत्र में काम करते हुए कई बार देखा है. एचआर में होने के नाते, मैंने इसे आपकी सोच से कहीं अधिक बार होते देखा है.
उन्होंने अपनी पोस्ट में नौकरी चाहने वालों को Counter Proposal स्वीकार करने के जोखिमों के बारे में चेतावनी दी है. वह कहते हैं कि Counter Proposal अक्सर कंपनियों कर्मचारी के साथ लंबे समय तक रहने का वादा नहीं बल्कि थोड़े समय के लिए उठाया गया कदम होता है. इंगारी ने पोस्ट में कहा कि Counter Proposal कोई इनाम नहीं है. यह तब तक समय खरीदने की एक प्लानिंग है जब तक उन्हें कोई सस्ता विकल्प नहीं मिल जाता. हायरिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसी स्थितियां असामान्य नहीं हैं. जब कोई कर्मचारी इस्तीफा देता है, तो कई बार कंपनी उसे कुछ समय के लिए ज्यादा सैलरी देकर रोक लेती है, ताकि काम में रुकावट न आए और तब तक नया कर्मचारी ढूंढने का समय मिल जाए.
टूट जाता है भरोसा
एचआर एक्सपर्ट का मानना है कि जब कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ने की बात करता है, तो कंपनी का भरोसा भी थोड़ा कम हो सकता है. ऐसे में भले ही कर्मचारी बाद में वहीं रुक जाए, लेकिन कंपनी उसकी जगह भविष्य में किसी और को रखने के बारे में सोचने लगती है. इंगारी का कहना है कि अगर किसी कर्मचारी की सैलरी सिर्फ इस्तीफा देने के बाद बढ़ाई जाती है, तो यह भी सोचने वाली बात है. अगर कंपनी सच में कर्मचारी की कद्र करती, तो उसे पहले ही अच्छी सैलरी दे देती है.
Counter Proposal का ऑफर
करियर एक्सपर्ट मानते हैं कि काउंटर ऑफर स्वीकार करने से पहले कर्मचारियों को अपने भविष्य, काम के माहौल और नौकरी की स्थिरता के बारे में अच्छी तरह सोचना चाहिए. कई बार ज्यादा सैलरी का ऑफर अच्छा लगता है, लेकिन आगे चलकर यह करियर और नौकरी की सुरक्षा पर असर डाल सकता है. साइमन इंगारी की यह स्टोरी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है. इससे लोगों के बीच वेतन बढ़ाने के ऑफर और नौकरी बदलने के फैसलों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.