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एजुकेशन न्यूज़

क्‍या है कोरोना की थर्ड वेव, जिससे डर रहे इंडियन, दूसरे देश ऐसे कर रहे बचाव

प्रतीकात्‍मक फोटो (Getty)
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भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में कोरोना वायरस की थर्ड वेव ने आहट दे दी है. इससे निपटने के लिए कई देश लॉकडाउन समेत  तमाम प्रतिबंधों में विस्तार कर रहे हैं. कोरोना वायरस की तीसरी लहर के बारे में कहा जा रहा है क‍ि ये तभी रुकेगी जब सभी लोग एक जगह थम जाएं. भारत में आज कोरोना की दूसरी लहर का खौफ व्‍याप्‍त है. लेकिन इन दिनोंं हर तरफ कोरोना की तीसरी लहर की चर्चा ने यह डर और बढ़ा दिया है. आइए जानते हैं इस थर्ड वेव के बारे में...

प्रतीकात्‍मक फोटो (Getty)
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क्‍या है थर्ड वेव 
डब्ल्यूएचओ के यूरोप के निदेशक, हैंस क्लूज ने कहा कि‍ थर्ड वेव में वायरस के नए वेरिएंट B117 का म्‍यूटेशन पहली बार यूनाइटेड किंगडम में पाया गया था. यह कहा जाता है कि यह मूल वायरस की तुलना में 50% अधिक संक्रमणीय और अधिक घातक भी हो सकता है. उन्होंने कहा, 'वेरिएंट का प्रसार बढ़ रहा है. लेकिन ये तब और तेजी से बढ़ेगा अगर लोग सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से नहीं रहते हैं. 

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अब जर्मनी का उदाहरण ही ले लीजिए. यहां फरवरी के अंत में स्कूलों को फिर से खोलने समेत तमाम तरह की जरूरी दुकानों को मार्च में खोलने का फैसला लिया गया. यहां व्यापार फिर से शुरू करने की अनुमति देने के बाद, जर्मनी ने वायरस की आहट के साथ ही आंशिक लॉकडाउन लगा दिया. अब थर्ड वेव के बाद इस लॉकडाउन को और लम्बा खींचने की कोश‍िश है. यहां एक दिन में 29,000 नए मामले दर्ज होने के साथ ही कई फैसले लेने पड़े. बता दें कि‍ यहां संक्रमित होने वालों में से अधिकांश 15 से 49 आयु वर्ग में थे, जबकि पहले दो वेव की तुलना में इसमें कम आयु वर्ग के लोग थे.

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जर्मनी में 80-90 साल के मरीजों के मामलों की संख्या भी बढ़ रही है. यहां मृत्यु दर पिछले दो या तीन हफ्तों में नीचे नहीं गई है. अब तक जर्मनी में लगभग 80,000 लोग वायरस से मर चुके हैं. इसके अलावा लगभग 5,000 आईसीयू बेड कोविड-19 रोगियों से भरे हैं, और यह आंकड़ा मई के अंत तक और बढ़ने की उम्मीद है. रॉबर्ट कोएज़ इंस्टीट्यूट द्वारा जारी आंकड़ों में कहा गया है कि कोविड के रोगियों ने हृदय और फेफड़ों की प्रतिस्थापन मशीनों पर अस्पताल में 80% लोगों को जीवित रखने के लिए रखा गया है. 

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वहीं फ्रांस में अप्रैल की शुरुआत में तीसरा राष्ट्रीय लॉकडाउन लगाया गया. इसके बावजूद यहां कोविड-19 के मामलों में वृद्धि हुई है. यहां सभी स्कूल और गैर-जरूरी दुकानें अप्रैल के अंत तक बंद कर दी गईं और शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगाया गया. यहां भी वैक्‍सीनेशन का काम तेजी से हो रहा है ताकि इस वायरस पर किसी भी तरह लगाम लगाई जा सके. देश के 11.6 मिलियन लोगों को वैक्‍सीन की पहली डोज दी जा चुकी है.

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इटली में भी अप्रैल के अंतिम सप्‍ताह तक कोरोना मरीजों की संख्‍या औसतन बढ़ी है. यहां जहां जनवरी में 12 हजार कोरोना पॉजिट‍िव सामने आए, वहीं ये संख्‍या मार्च और अप्रैल में बढ़कर 20 हजार के करीब पहुंच गई है. इटली में भी वहां की सरकार किसी तरह वैक्‍सीनेशन के जरिये कंट्रोल पाने की कोश‍िश में लगी है. जर्मनी में अप्रैल तक एक लाख 15 हजार से ज्‍यादा मौतें हो चुकी हैं.

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नीदरलैंड की डच सरकार ने अप्रैल के अंतिम सप्‍ताह में कहा था कि लॉकडाउन में अभी क‍िसी तरह की ढील देना सही नहीं होगा न ये संभव ही होगा.  यहां अप्रैल में दैनिक संक्रमण में लगभग 35% वृद्धि एक महीने पहले हुई है. डच सरकार ने इससे पहले कहा था कि वे 21 अप्रैल को कर्फ्यू हटाकर और बार व रेस्तरां के ओपन स्‍पेस में मेहमानों का स्वागत करने की अनुमति देकर प्रतिबंधों में ढील देंगे लेकिन हालात बिगड़ने के साथ ही यहां फ‍िर से ये सभी प्रतिबंध लगा दिए गए. 

 

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वहीं पोलैंड की पोलिश सरकार ने देशव्यापी कोविड-19 लॉकडाउन जारी रखा है. यहां अप्रैल में मामलों में स्पाइक ने देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर एक चेतावनी दी है. देश में अप्रैल के तीसरे वीक तक 2,621,116 पुष्ट मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि मरने वालों की संख्या 59,930 है. भारत में भी थर्ड वेव की आहट से लोग डरे हुए हैं. यहां पहले ही कोरोना की सेकेंड वेव ने लोगों की सांसें फुला दी हैं. देश में स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं में भारी कमी देखी गई है.

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भारत में भी सरकार वैक्‍सीनेशन का दूसरा चरण शुरू कर चुकी है. यहां पहले चरण में स्‍वास्‍थ्‍य कर्म‍ियों समेत फ्रंट लाइन वरियर्स को वैक्‍सीन की दोनों डोज दी जा चुकी हैं. अब दूसरे चरण में एक मई से 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को वैक्‍सीन देने का अभ‍ियान चल रहा है. लेकिन थर्ड वेव को लेकर लोगों में डर देखा जा रहा है. यहां भले ही देशव्‍यापी लॉकडाउन नहीं है, लेकिन राज्‍य सरकारें अपने स्‍तर पर बंदी कर रही हैं. यही नहीं लोग खुद भी अपने को घरों में बंद क‍रने की कोश‍िश में जुटे हैं.