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एजुकेशन न्यूज़

CA ने बनाया तैयारी का खास फॉर्मूला, दूसरे अटेम्‍प्‍ट में क्रैक किया IAS एग्जाम, पाई 81वीं रैंक

ईशू अग्रवाल (Photo: Ishu Agrawal/aajtak.in)
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यूपीएससी परीक्षा देश की सबसे कठ‍िन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. इस एग्जाम में पास होने का वैसे तो कई तय फॉर्मूला नहीं है, लेकिन तैयारी करने वाले अक्सर कोई एक फॉर्मूला अपनाकर ही इसे क्रैक करते हैं. ये फार्मूला एक तरह से उनके लिए एक तरीका होता है खुद को अपडेट करने का. छत्तीसगढ़ के रहने वाले पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट ईशू अग्रवाल ने एग्जाम की तैयारी के लिए अपना एक अलग फार्मूला बनाया, जिसे लागू करके उन्होंने ये परीक्षा दूसरे प्रयास में न‍िकाल दी. आइए जानते हैं ईशू अग्रवाल की यूपीएससी की तैयारी की पूरी जर्नी और इस खास फार्मूले के बारे में...

अपने दोस्तों के साथ ईशू अग्रवाल (Photo: Ishu Agrawal/aajtak.in)
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छत्तीसगढ़ का धमतरी इलाका जहां न यूपीएससी तैयारी का कोचिंग हब है और न ही कोई बड़ा महानगर. यहीं के रहने वाले ईशू अग्रवाल ने इस साल (UPSC2020-21) एग्जाम पास करके उसमें 81वीं रैंक हासिल की है. इस परीक्षा की तैयारी के साथ साथ उन्होंने सीए (चार्टर्ड अकाउंटेंट) की प्रैक्ट‍िस भी की. ईशू अग्रवाल ने सीए की प्रैक्ट‍िस के साथ साथ यूपीएससी परीक्षा पास करने की अपनी स्ट्रेटजी के बारे में aajtak.in से खास बातचीत की. 

ईशू अग्रवाल (Photo: Ishu Agrawal/aajtak.in)
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ईशू अग्रवाल ने बताया कि उनके पिता विजय अग्रवाल धमतरी में ट‍िम्बर का काम करते हैं और मां सविता होम मेकर हैं. मध्यमवर्गीय पर‍िवार के ईशू की एक छोटी बहन ईशा इंटीरियर डिजाइनर है. वहीं ईशू ने 26 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा क्रैक कर ली है, इससे पहले वो सीए की पढ़ाई पूरी करके इसकी प्रैक्ट‍िस करने लगे थे. बेटा बेटी के सेटल होने से पूरा परिवार खुश था.

परिवार के साथ ईशू अग्रवाल (Photo: Ishu Agrawal/aajtak.in)
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वहीं, दूसरी तरफ युवा ईशू के मन में एक सपना उमड़-घुमड़ रहा था. यह सपना था आईएएस या आईपीएस अफसर बनने का. ईशू कहते हैं कि कॉमर्स मेरा प्रिय विषय था, इसलिए मैंने आसानी से सीए परीक्षा पास कर ली. इसके बाद मेरे पास मोटी मोटी सैलरी वाली अच्छी नौकरियों के ऑफर थे. लेकिन मेरे मन में बचपन से कहीं एक सपना दबा थाा, वो था कि जब मैं अपने शहर के डीएम एसपी को देखता था तो उनकी तरह बनने का मेरा ख्वाब था.  


 

परिवार को मिला सम्मान (Photo: Ishu Agrawal/aajtak.in)
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लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, सो तीन साल पहले ईशू ने यूपीएससी एग्जाम की तैयारी की ठानी. पहले अटेम्प्ट में उनका सेलेक्शन नहीं हुआ लेकिन उन्हें एग्जाम के बारे में काफी कुछ पता चल चुका था, कि प्री में कैसे किस तरह के सवाल पूछे जाते हैं. फिर पूरा पैटर्न और सिलेबस जानने के लिए उन्होंने अपने कस्बे में ही कुछ दिन कोचिंग ज्वाइन की. 
 

परिवार को मिला सम्मान (Photo: Ishu Agrawal/aajtak.in)
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अब ईशू ने पहला अटेंप्ट किया तो इस बार उन्होंने प्री एग्जाम निकाल लिया, लेकिन मेंस में नौ नंबर से चूक गए. ईशू कहते हैं कि मेंस में बहुत अच्छी तैयारी के बावजूद जब नौ नंबर से चूके तो मन में थोड़ा हौसला कमजोर हुआ. लेकिन अगले ही पल खुद को समझा लिया कि मेरा लक्ष्य तो यूपीएससी ही है, जिसके लिए मैंने लाखों रूपये पैकेज के जॉब ऑफर ठुकराए हैं. 

परिवार को मिला सम्मान (Photo: Ishu Agrawal/aajtak.in)
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इसके बाद दूसरे अटेंप्ट की तैयारी के लिए उन्होंने अपना एक सेट फॉर्मूला तैयार किया. जिसका नाम उन्होंने रखा ट्रैकिंग फार्मूला. ईशू बताते हैं कि दिन में अपना सारा काम करने के साथ साथ मैं बीच बीच में पढ़ाई करता था. इस बीच मैं टाइम को ट्रैक करता था, इससे यह पता चलता था कि कितना वक्त पढ़ाई में लगाया और कितने घंटे बर्बाद किए. 
 

प्रतीकात्मक फोटो
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इसके बाद दूसरे अटेंप्ट की तैयारी के लिए उन्होंने अपना एक सेट फॉर्मूला तैयार किया. जिसका नाम उन्होंने रखा ट्रैकिंग फार्मूला. ईशू बताते हैं कि दिन में अपना सारा काम करने के साथ साथ मैं बीच बीच में पढ़ाई करता था. इस बीच मैं टाइम को ट्रैक करता था, इससे यह पता चलता था कि कितना वक्त पढ़ाई में लगाया और कितने घंटे बर्बाद किए. 
 

परिवार को किया सम्मानित
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इस तरह उन्होंने देखा कि वो दिन में सात से आठ घंटे तक पढ़ाई करते थे. उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान हमेशा यह फार्मूला अपनाकर अपने बर्बाद होने वाले वक्त को हमेशा उपयोगी बनाने का सोचा. फिर दूसरे अटेंप्ट में उन्होंने पहले प्री फिर अच्छे नंबरों से मेंस निकाल द‍िया. फिर इंटरव्यू दिया. जिस दिन यूपीएससी का रिजल्ट आया, ईशू और उनके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में देश भर में 81वां स्थान प्राप्त किया था. उन्हें हर तरफ से बधाईयां मिलने लगीं. उनके पूरे इलाके में उनकी ये सफलता चर्चा का विषय बन गई थी.