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एजुकेशन न्यूज़

घर में कोई ऑक्‍सीजन सपोर्ट पर है तो ऐसे करें देखभाल, न करें ये गलतियां

प्रतीकात्‍मक फोटो
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कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान अस्‍पतालों में बेड न मिलने समेत कई समस्‍याएं देखने में आ रही हैं. ऐसे में डॉक्‍टर जिन मरीजों में गंभीर लक्षण नहीं हैं, उन्‍हें घर पर होम आइसोलेशन में रहकर इलाज करने की सलाह देते हैं. अगर आपके घर में कोविड पॉजिटिव पर‍िजन को ऑक्‍सीजन सपोर्ट में रखने की सलाह दी गई है तो जानिए आपको उनकी केयर कैसे करनी है. 

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कोविड इन्‍फेक्‍शन के साथ ही कई मरीजों में फेफड़ों का संक्रमण तेजी से बढ़ता है. फेफड़ों में संक्रमण होने से मरीजों में सांस लेने की दिक्‍कत आती है. कई मरीजों में ऑक्‍सीजन का स्‍तर नीचे ग‍िरने लगता है. अब जब अस्‍पतालों में बेड की कमी है तो कई लोग घर पर ही ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के इस्‍तेमाल से ऑक्‍सीजन मैनेज कर रहे हैं. 

 

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विशेषज्ञों का कहना है क‍ि भले ही मरीजों का इलाज घर पर ऑक्‍सीजन सपोर्ट के जरिये किया जा सकता है. लेकिन इसमें सावधानी बरतने की जरूरत भी होती है. जानकारों के अनुसार, अगर आप घर पर ऑक्सीजन लेवल को मैनेज कर रहे हैं तो आपको दोगुनी सावधानी बरतने की जरूरत है. होम ऑक्सीजन सपोर्ट के दौरान आपको मरीज को होने वाले जोखिम और खतरों के बारे में पूरी तरह सचेत होना चाहिए. 

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अगर घर पर कोई होम आइसोलेशन में ऑक्सीजन इस्‍तेमाल कर रहा है, तो पहले आपको यह सुनिश्‍च‍ित करना होगा कि उसका ऑक्‍सीजन लेवल (SpO2) रीडिंग 93% से कम जरूर हो. इसके पीछे की खास वजह ये है कि‍ सामान्‍य व्‍यक्‍त‍ि का ऑक्सीजन लेवल 94-99% के बीच होता है. इससे कम होने पर ही ऑक्‍सीजन दी जा सकती है.

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आपको बता दें कि‍ कभी बिना डॉक्टर की सलाह के ऑक्‍सीजन न दें. डॉक्‍टर ही यह तय करते हैं क‍ि कब किस मरीज को कितनी ऑक्सीजन की जरूरत है. जरूरत से कम या ज्‍यादा दोनों तरह से ऑक्‍सीजन हानिकारक हो सकती है. अक्‍सर डॉक्‍टर 90 प्रतिशत से नीचे ऑक्सीजन जाने पर एक से चार लीटर प्रति मिनट तक ऑक्सीजन देते हैं. इसके बारे में पूरी तरह से डॉक्‍टर तय करते हैं, लेकिन आपको इसे देने की तकनीक समझनी होती है.

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जो मरीज वेंटिलेटर पर होते हैं उन्‍हें डॉक्‍टर 25 लीटर प्रति मिनट की रफ्तार से ऑक्सीजन की सलाह देते हैं. इस तरह 10 से 15 दिन तक वेंटिलेटर पर रहने वाले मरीजों के फेफड़ों में भी फ्री रेडिकल बनने की वजह से स्थाई तौर पर कुछ क्षति हो ही जाती है. डॉक्‍टर कहते हैं कि‍ मरीज का एसपीओटू यानी ऑक्‍सीजन लेवल  90 तक आने पर भी घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन परिजनों को इसके लिए सतर्क रहना जरूरी है. आपको हर वक्‍त मरीज की मॉनिटरिंग करना बहुत जरूरी है.

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घर पर ऑक्‍सीजन सपोर्ट में रह रहे मरीजों के लिए डॉक्‍टर ऑक्सीजन का सिर्फ एक फ्लो सेट नहीं करते. बल्‍क‍ि ये मरीज के ऑक्‍सीजन लेवल के ग‍िरने उठने के साथ साथ घटाया बढ़ाया जाता है. यही नहीं घर पर ऑक्‍सीजन के लिए कुछ घरेलू तकनीक भी अपनाई जानी चाहिए. इस दौरान मरीज पेट के बल आधे से एक घंटे के लिए लेटकर करीब चार फीसद तक ऑक्सीजन का स्तर बढ़ा सकते हैं.