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वेनेजुएला में किस धर्म का बोलबाला है? जानिए देश का धार्मिक तानाबाना

वेनेजुएला जैसे देश में, जहां धर्म सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा है, देश में पैदा हुआ संकट केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहता. इसका असर धार्मिक संस्थाओं, अलग-अलग समुदायों और आपसी संतुलन पर भी पड़ सकता है. इसी वजह से मौजूदा हालात में लोग वेनेजुएला की धार्मिक संरचना और सामाजिक ताने-बाने को समझने की कोशिश कर रहे हैं.

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वेनेजुएला में ईसाई धर्म सबसे प्रमुख है (Photo:AFP)
वेनेजुएला में ईसाई धर्म सबसे प्रमुख है (Photo:AFP)

दक्षिण अमेरिका का देश वेनेजुएला इन दिनों वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है. अमेरिका ने इस देश में अचानक हमला और राष्ट्रपति को को अगवा करके वहां एक अनिश्चचता का माहौल बना दिया है. इसके साथ ही ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर निकोलस मादुरो की एक तस्वीर शेयर की है. साथ ही फ्लोरिडा में एक प्रेस कॉन्फेंस भी की है, जिसमें उन्होंने बताया है कि वेनेजुएला में अब अमेरिका की क्या भूमिका होगी.वहीं अमेरिका की अटॉर्नी जनरल ने बताया है कि न्यूयॉर्क के सदर्न डिस्ट्रिक्ट में मादुरो और उनकी पत्नी के खिलाफ कानूनी मामला चलेगा.

इसके तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में अपने आवास मार-आ-लागो में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया है कि अमेरिका वेनेजुएला को तब तक चलाएगा तब तक कि सत्ता का सुरक्षित, सही और समझदारी भरा परिवर्तन नहीं हो जाता.


क्यों धर्म और समाज पर भी असर अहम

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े भू-राजनीतिक संकट का असर केवल सेना या सरकार तक सीमित नहीं रहता. वेनेजुएला जैसे देश में, जहां धर्म सामाजिक जीवन से गहराई से जुड़ा है, वहां सत्ता संकट से धार्मिक संस्थाओं, समुदायों और आपसी संतुलन पर भी प्रभाव पड़ सकता है. यही वजह है कि लोग अब देश की धार्मिक संरचना को समझने की कोशिश कर रहे हैं.

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.वेनेजुएला का सबसे बड़ा धर्म

वेनेजुएला में ईसाई धर्म सबसे प्रमुख है, जिसमें रोमन कैथोलिक समुदाय सबसे बड़ा हिस्सा रखता है. अनुमान के मुताबिक, देश की करीब 65 से 70 प्रतिशत आबादी खुद को कैथोलिक मानती है. कुछ सर्वे में यह आंकड़ा और भी ज्यादा दिखता है, हालांकि इनमें कई लोग धार्मिक रूप से सक्रिय नहीं होते, बल्कि सांस्कृतिक रूप से जुड़े रहते हैं.निकोलस मादुरो रोमन कैथोलिक पृष्ठभूमि से हैं .वे कैथोलिक परिवार में पैदा हुए और खुद को ईसाई बताते हैं.

Photo:AFP

कैथोलिक चर्च की ऐतिहासिक भूमिका

कैथोलिक धर्म की जड़ें वेनेज़ुएला में स्पेनिश शासन के दौर से जुड़ी हैं. लंबे समय तक चर्च ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन में अहम भूमिका निभाई. स्कूल, अस्पताल और सामाजिक सेवाओं में चर्च की मौजूदगी रही. हालांकि, बीते कुछ दशकों में राजनीति से टकराव और सामाजिक बदलावों के कारण चर्च का प्रभाव पहले जैसा व्यापक नहीं रहा.

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प्रोटेस्टेंट और इवेंजेलिकल ईसाई

वेनेजुएला की लगभग 10 से 17 प्रतिशत आबादी प्रोटेस्टेंट ईसाई मानी जाती है. इनमें इवेंजेलिकल चर्च से जुड़े लोग तेजी से बढ़े हैं. कई परिवार पहले कैथोलिक थे, लेकिन बाद में प्रोटेस्टेंट चर्च से जुड़े. यह समुदाय सामाजिक कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों के जरिए अपनी पहचान मजबूत करता रहा है, हालांकि सरकार से इनके रिश्ते कभी-कभी तनावपूर्ण रहे हैं.

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एम्स्टर्डम स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शनकारी (Photo:AFP)

 

वेनेजुएला में मुस्लिम आबादी

वेनेजुएला में मुसलमानों की संख्या कम है, लेकिन समुदाय को संगठित और प्रभावशाली माना जाता है. यहां करीब एक लाख मुसलमान रहते हैं, जो कुल आबादी का लगभग 0.4 प्रतिशत हैं. इनमें से अधिकांश लोग लेबनान और सीरिया मूल के हैं, जिनके पूर्वज बीसवीं सदी में व्यापार और रोजगार के लिए यहां आए थे.

 मुसलमान कहां रहते हैं और क्या करते हैं

मुस्लिम समुदाय मुख्य रूप से काराकास और नुएवा एस्पार्टा जैसे इलाकों में केंद्रित है. यहां मस्जिदें, इस्लामिक सेंटर और सांस्कृतिक संस्थान मौजूद हैं. मुसलमान व्यापार, शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं. वे आम तौर पर राजनीति से दूरी रखते हुए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर देते हैं.

वेनेजुएला में धर्म की संवैधानिक स्थिति

वेनेज़ुएला का संविधान देश को सेक्युलर स्टेट घोषित करता है. यहां धर्म की स्वतंत्रता है, लेकिन राज्य और धर्म को अलग रखा गया है. कानूनन किसी भी धर्म को सरकारी धर्म का दर्जा नहीं मिला है और न ही शासन व्यवस्था किसी धार्मिक नियम पर आधारित है.

 धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल

हालांकि वेनेजुएला कोई धार्मिक शासन नहीं है, लेकिन पिछले वर्षों में धर्म का इस्तेमाल राजनीतिक औजार के रूप में हुआ है. समर्थक धार्मिक समूहों को फंडिंग और संरक्षण मिला, जबकि आलोचक चर्चों को दबाव और बाधाओं का सामना करना पड़ा. कुल मिलाकर, धर्म सत्ता का केंद्र नहीं, बल्कि राजनीतिक नियंत्रण का जरिया बना रहा.

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