मिलान में इटली का सबसे बड़ा एक कैथड्रल (गिरजाघर) है, जिसका नाम डुओमो हैं. यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विरासत है. इस कैथेड्रल में 3000 से भी ज्यादा ऐतिहासिक मूर्तियां हैं, जो विभिन्न काल खंडों में अलग-अलग कलाकारों द्वारा बनाई गईं हैं. कला के इन बेजोड़ नमूनों को संरक्षित करने के ख्याल से डुओमो की ओर से एक मुहिम शुरू की गई. इसका नाम 'एडॉप्ट अ स्टैच्यू' है.
इस मुहिम के माध्यम से लोग इन मूर्तियों को गोद लेते हैं और इन्हें नया जीवन देते हैं. मिलान के डुओमो का निर्माण 1386 में शुरू हुआ और 1965 में पूरा हुआ. अब, इसकी कुछ सदियों पुरानी मूर्तियों को जो टूट-फूट रही हैं, उन्हें रिस्टोर करने का एक अभियान शुरू हुआ है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, मिलान के डुओमो के बाहर कभी खड़ी रही 15वीं शताब्दी की एक प्रतिमा को नया ठिकाना मिल गया है.'पुस्तक लिए दाढ़ी वाले संत' की इस प्रतिमा को 'एडॉप्ट अ स्टैच्यू' कार्यक्रम के तहत हाल ही में रिस्टोर करने किया गया है.
इस मुहिम के तहत इस ऐतिहासिक चर्च में रखी गई 3000 से भी ज्यादा मूर्तियों को एक एग्रीमेंट के तहत गोद लेने वाले को दिया जाता है, जो इसके रेस्टोरेशन के लिए पैसे देते हैं. फिर इन प्रतिमाओं का पहले जैसी साफ-सफाई और मरम्मत कर कुछ समय के लिए डोनर्स को दे दिया जाता है. वे इसे अपने साथ दूसरी जगह ले जा सकते हैं और इसका प्रदर्शन कर सकते हैं. फिर एक तय समय सीमा के बाद इसे डुओमो में वापस लौटा दिया जाता है.
ये प्रतिमाएं सैकड़ों साल पुरानी है. इसलिए इसे पुराने रूप में रिस्टोर करने पर अच्छी-खासी रकम खर्च होती है. डुओमो को संचालित करने वाले संस्थान ने इन खर्चों के लिए रकम जुटाने का का एक अनोखा उपाय निकाला और 'एडॉप्ट अ स्टैच्यू' नाम की मुहिम शुरू की. इस मुहिम को 2020 में डुओमो के संरक्षण की देखरेख करने वाली सदियों पुरानी संस्था ने शुरू किया गया था. यह प्रतिमा अब मिलान के मध्य में स्थित कैडोर्ना स्क्वायर में परिवहन कंपनी एफएनएम के मुख्यालय में एक कांच की खिड़की के पीछे डिस्प्ले है.
यह कार्यक्रम दानदाताओं, कंपनियों या व्यक्तियों को एक प्राचीन प्रतिमा के रेस्टोरेशन के लिए धन जुटाने को लेकर लोन एग्रीमेंट के तहत मूर्ति को समय-समय पर डुओमो के बाहर प्रदर्शित करने की छूट देता है.
इस कार्यक्रम की प्रोजेक्ट मैनेजर एलिसा मंटिया कहती हैं कि जो मूर्तियां हमारे संग्रह में ही पड़ी रहतीं, उन्हें रिस्टोर करके उनकी मूल सुंदरता में वापस लाया जाता है. इस तरह, वे स्मारक से दूर स्थित स्थानों में भी डुओमो की कहानी बयां करती रहती हैं.ये समझौते कुछ मामलों में प्रारंभिक एक वर्ष की अवधि के लिए दिए जाते हैं और इन्हें रिन्यू किया जा सकता है.
यह पहल पिछले फंड रेजिंग अभियानों के बाद शुरू की गई है, जिनमें डोनर्स डुओमो के डोनर रजिस्टर में शामिल होने के बदले में यहां की कलाकृतियों को गोद ले सकते हैं. इससे दानदाताओं के नाम गिरजाघर के लंबे समय से सपोर्ट करने वाले इतिहास के हिस्से के रूप में दर्ज हो जाता है.
600 साल में डुओमो कैथेड्रल का निर्माण पूरा हुआ
मिलान के तत्कालीन शासक जियान गैलेज़ो विस्कोन्टी के शासनकाल में, शहर के आर्कबिशप के सहयोग से, डुओमो का निर्माण 1386 में शुरू हुआ था. यह गिरजाघर का निर्माण पूरा होने में पांच शताब्दियों से अधिक का समय लगा. इसके कांसे के दरवाजों में से एक को 1965 तक स्थापित नहीं किया गया था.
चूंकि, डुओमो निर्माण कार्य सदियों तक चला. इसलिए डुओमो की मूर्तियों को विभिन्न क्षेत्रों और कालों के कलाकारों द्वारा तराशा गया. इसके परिणामस्वरूप यह जगह एक ऐसी कलात्मक शैलियों के विकास की एक श्रृंखला के रूप में गढ़ी गई, जहां कई काल खंडों में अगल-अलग क्षेत्र के अलग-अलग कलाकारों द्वारा अपनी तरह की अनूठी कलाकृतियों का निर्माण किया जा सका.
3000 से ज्यादा ऐतिहासिक कलाकृतियां हैं मौजूद
अमेरिकी ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी ट्रिपएडवाइजर का कहना है कि इटली का सबसे बड़ा और दुनिया के सबसे बड़े चर्चों में से एक होने के नाते, इसे बनने में 600 साल लगे. इसके अंदर प्रदर्शित धार्मिक कलाकृतियों का विशाल संग्रह है. यहां गॉथिक शैली की बाहरी दीवारों पर सजी 3,000 मूर्तियों को देखकर लोग अचंभित रह जाते हैं.
वेनेरंडा फैब्रिका डेल डुओमो, जो गिरजाघर के संरक्षण की देखरेख करती है, उन्होंने कहा कि रखरखाव या सुरक्षा कारणों से सदियों से यहां रखी गई मूर्तियों को रिस्टोर करने के लिए फंड की जरूरत थी. इसके तहत 'एडॉप्ट अ स्टैच्यू' मुहिम शुरू हुई. इस मुहिम के तहत 13 फरवरी को 'हाथ में किताब लिए दाढ़ी वाले संत' की प्रतिमा का अनावरण किया गया. इसे परिवहन कंपनी एफएनएम ने गोद लिया है.
इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न प्रायोजकों द्वारा अपनाई गई अन्य मूर्तियों में 16वीं शताब्दी की डेविड की मूर्ति, सैमसन और शेर का चित्रण और संत मैथ्यू प्रेरित की मूर्ति शामिल हैं. हालांकि स्वीकृत मूर्तियों की संख्या का खुलासा नहीं किया गया है और सभी मूर्तियां सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित नहीं हैं. फिर भी वेनेरांडा फैब्रिका डेल डुओमो ने लगभग 30 मूर्तियों को जीर्णोद्धार के लिए योग्य माना है.
मंटिया का कहना है कि हम आमतौर पर इन्हें इसलिए चुनते हैं क्योंकि ये बहुत सुंदर होते हैं और इतने क्षतिग्रस्त नहीं होते कि इन्हें उधार देना असुरक्षित हो. दानदाता के संपर्क करने पर, मंटिया जैसे विशेषज्ञ उनके साथ डुओमो के भंडारण स्थलों तक जाते हैं ताकि वे एक मूर्ति का चयन कर सकें. चयन के बाद, उसके जीर्णोद्धार में आमतौर पर एक से तीन महीने का समय लगता है.
डुओमो की हाल में गोद ली गई मूर्ति पर कालिख जम गई है
'पुस्तक लिए दाढ़ी वाले संत' की मूर्ति मूल रूप से खुले में प्रदर्शित की गई थी. वायु प्रदूषण के कारण इसकी सतह पर जमी काली परत के अलावा, इसमें कोई संरचनात्मक क्षति नहीं थी जिससे इसे उधार देने में कोई बाधा उत्पन्न हो.मंटिया का कहना है कि इसमें अक्सर केवल सतही परिष्करण या कंप्रेस या यांत्रिक सफाई के साथ हस्तक्षेप शामिल होता है.
मूर्तियों और डुओमो के लिए इस्तेमाल किया गया संगमरमर इटली के पीडमोंट क्षेत्र में स्थित कैंडोग्लिया की खदानों से आता है. इसी पत्थर का इस्तेमाल 14वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से वेनेरांडा फैब्रिका डेल डुओमो की देखरेख में किया जा रहा है. मिलान का प्रतीक होने के अलावा, डुओमो इसके इतिहास का भी प्रतीक है. मंटिया कहते हैं कि यह एक ऐसा स्मारक है जो शहर के साथ-साथ विकसित हुआ है, जो अपनी मूर्तियों और सजावट की शैली में शहर के पूरे इतिहास को समेटे हुए है.