आज के दिन 16 फरवरी, 1923 को प्राचीन मिस्र के शासक राजा तूतनखामेन के सीलबंद मकबरे में पहली बार किसी ने प्रवेश किया था. जब मिस्र के थेब्स स्थित उनके मकबरे के अंदर अंग्रेज पुरातत्वविद् हॉवर्ड कार्टर पहुंचे थे. यह एक बड़ी खोज थी. हालांकि, राजा तूत को लेकर कई किस्से कहानियां और मिथ प्रचलित है. तूतनखामेन और उनका श्राप हमेशा से खोजकर्ताओं से लेकर आम लोगों और इतिहासकारों के लिए भी एक रहस्य रहा है.
प्राचीन मिस्रवासी अपने फराओ को देवता मानते थे, इसलिए वे मृत्यु के बाद उनके शवों को सावधानीपूर्वक संरक्षित करते थे और उन्हें समृद्ध खजानों से भरी भव्य कब्रों में दफनाते थे ताकि शासकों को परलोक में भी ये खजाने साथ ले जा सकें. 19वीं शताब्दी में, दुनिया भर के पुरातत्वविद मिस्र पहुंचे, जहां उन्होंने इनमें से कई कब्रों का पता लगाया. इनमें से कई कब्रों को बहुत पहले लुटेरों ने तोड़ दिया था और उनमें से धन-संपत्ति लूट ली थी.
जब कार्टर 1891 में मिस्र पहुंचे, तो उन्हें पूरा विश्वास हो गया कि वहां कम से कम एक अनखोजा मकबरा जरूर है - वह है तूतनखामेन या राजा टुट का, जो लगभग 1400 ईसा पूर्व में रहते थे और किशोरावस्था में ही उनकी मृत्यु हो गई थी.एक धनी ब्रिटिश नागरिक लॉर्ड कार्नार्वोन के फंडिंग से कार्टर ने पांच वर्षों तक खोज की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.
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1922 की शुरुआत में, लॉर्ड कार्नार्वोन खोज बंद करना चाहते थे, लेकिन कार्टर ने उन्हें एक और वर्ष रुकने के लिए मना लिया. नवंबर 1922 में, उनका इंतजार आखिरकार रंग लाया, जब कार्टर की टीम को एक और मकबरे के प्रवेश द्वार के पास मलबे में छिपी सीढ़ियां मिलीं. ये सीढ़ियां एक प्राचीन सीलबंद द्वार तक जाती थीं, जिस पर तूतनखामेन का नाम अंकित था.
26 नवंबर को जब कार्टर और लॉर्ड कार्नार्वोन ने मकबरे के आंतरिक कक्षों में प्रवेश किया, तो वे यह देखकर रोमांचित हो गए कि यह लगभग पूरी तरह से सुरक्षित था और 3,000 से अधिक वर्षों के बाद भी इसके खजाने अछूते थे. दोनों ने मकबरे के चारों कमरों की खोज शुरू की और 16 फरवरी 1923 को, कई महत्वपूर्ण अधिकारियों की निगरानी में, कार्टर ने अंतिम कक्ष का दरवाजा खोला.
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अंदर एक ताबूत था जिसमें तीन ताबूत एक दूसरे के अंदर रखे हुए थे. अंतिम ताबूत, जो ठोस सोने का बना था, उसमें राजा तुतनखामेन का ममीकृत शरीर था. मकबरे में मिली बहुमूल्य वस्तुओं में - सोने के मंदिर, आभूषण, मूर्तियां, रथ, हथियार, वस्त्र - सबसे मूल्यवान वह पूरी तरह से संरक्षित ममी थी, क्योंकि यह अब तक खोजी गई सबसे पहली ममी थी.
ऐसी अफवाहों के बावजूद कि जो भी मकबरे को छेड़ेगा उस पर श्राप लगेगा, इसके खजाने को सावधानीपूर्वक सूचीबद्ध किया गया, निकाला गया और "तूतनखामेन के खजाने" नामक एक प्रसिद्ध यात्रा प्रदर्शनी में शामिल किया गया. इस प्रदर्शनी का स्थायी स्थान काहिरा में स्थित मिस्र संग्रहालय है.