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इतिहास

जनसंख्‍या से लेकर महंगाई तक, 100 साल में इतना बदली द‍िल्‍ली, 2047 तक ये होगा मंजर

द‍िल्‍ली की एक तस्‍वीर
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कल्‍पना कीजिए 100 साल पहले दिलवालों की दिल्ली कैसी रही होगी. एक छोटा शहर जो साल 1901 में कुल चार लाख लोगों की बसावट वाली थी. फिर धीरे-धीरे दिल्‍ली कैसे बदली, क्‍या हुआ और आगे कितना अनुमान है. हाल ही में दिल्‍ली के उप मुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्‍ली के बदलाव पर सभी का ध्‍यान खींचा था. आइए- दिल्‍ली के इस बदलाव पर नजर डालें.

द‍िल्‍ली कभी ऐसी थी
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साल 1911 में जब अंग्रेजों ने इसे देश की राजधानी बनाया तो आबादी थोड़ा-थोड़ा बढ़ना शुरू हुई. इसमें सबसे ज्यादा तेजी बंटवारे के बाद आई. 14 अगस्‍त 1947 में जिस समय देश का बंटवारा हुआ था, उस समय दिल्ली की आबादी 6.96 लाख थी. 

 

द‍िल्‍ली का जवाहरलाल नेहरू स्‍टेडियम
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फिर बंटवारे के बाद दिल्ली में आने वाले लोगों की बड़ी तादाद के चलते 1951 में यहां की जनसंख्या बढ़कर 17.44 लाख हो गई. अब दिल्ली की आबादी दो करोड़ के लगभग हो चुकी है. जबकि, वर्ष 2047 में दिल्ली की आबादी बढ़कर 3.28 करोड़ हो जाने की संभावना है.

द‍िल्‍ली का राजीव चौक इलाका
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अब आप जरा सोचकर देख‍िए कि जिस शहर की आबादी लाखों से करोड़ों में हो जाए. ऐसे में वहां के पर्यावरण, हवा, पानी और जमीन पर पड़ने वाले दबाव के बारे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. पहले से ही द‍िल्‍ली दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित हिस्से में श‍ामिल है. लेकिन टाउन प्‍लानिंग के साथ साथ किस तरह के बदलाव होंगे.

पुरानी द‍िल्‍ली
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साल 2011 के जनगणना आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश राज्‍यों से सबसे ज्यादा संख्या में लोगों का पलायन दूसरे राज्यों में होता है. इनमें महाराष्ट्र, दिल्ली और गुजरात में प्रवासियों की संख्या सबसे अधिक होती है. राजधानी होने के कारण हर साल कई लाख लोग द‍िल्‍ली में अपने रोजगार की तलाश में आते हैं और यहीं आकर बस जाते हैं.

द‍िल्‍ली मेट्रो
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दिल्‍ली में बढ़ती आबादी के साथ साथ यहां की बसावट घनी होती जा रही है. यहां लोगों को बसाने के लिए फ्लैट कल्‍चर के साथ ही मेट्रो संस्‍कृत‍ि को बढ़ावा भी म‍िला है. विकास के साथ ही यहां वायु और जल प्रदूषण आदि के खतरे भी बढ़े हैं. हर साल अक्‍टूबर नवंबर से ही दिल्‍ली की हवा में जहरीले कणों के मिलने से सांस लेना दूभर हो जाता है.

पीक टाइम पर द‍िल्‍ली की सड़कें
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साल 2047 तक जिस तरह अनुमान लगाया जा रहा है क‍ि दिल्‍ली की पॉपुलेशन तीन करोड़ से ज्‍यादा हो जाएगी, इससे साफ है क‍ि महंगाई और जल संकट जैसी मुश्‍क‍िलें सामने खड़ी होंगी. बेरोजगारी दर बढ़ने के साथ ही अगर पलायन नहीं रुका तो दिल्‍ली किसी गैस चेंबर जैसे हालात उत्‍पन्‍न हो जाएंगे. इसलिए राजधानी को बचाने के लिए क्षेत्रीय स्‍तर पर राज्‍यों को रोजगार के अवसर सृजित करने होंगे.