सुरभि बिश्नोई पिछले सात सालों से UPTET की तैयारी कर रही हैं. वह कहती हैं कि जब उन्होंने तैयारी शुरू की थी, तब मन में यही भरोसा था कि एक बार नौकरी मिल जाएगी तो भविष्य की चिंता खत्म हो जाएगी और परिवार को आर्थिक सहारा दे सकेंगी. लेकिन, हकीकत में हो कुछ और रहा है. परीक्षा के नतीजों में कोई असफल हो जाए, वो तो अलग बात है, लेकिन यूपीटीईटी के केस में तो परीक्षा ही नहीं हो पा रही है. एक-दो साल से नहीं, परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवार कई सालों से परीक्षा होने का वेट कर रहे हैं. जी हां, हैरानी की बात ये है कि उत्तर प्रदेश टीचर्स भर्ती के लिए जरूरी परीक्षा यूपीटेट आखिरी बार 2022 में आयोजित हुई थी. अब उम्मीदवार प्रदर्शन करते हैं, ट्विटर पर ट्रेंड चलाते हैं और नतीजा कुछ नहीं निकलता.
वैसे ये कहानी सिर्फ एक सुरभि की नहीं है, ऐसी ही कहानियां उत्तर प्रदेश में कई उम्मीदवारों की है, जो परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं. साल की शुरुआत में भी छात्रों ने सोशल मीडिया के जरिए अपील की थी कि परीक्षा की तारीख 2026 के कैलेंडर के साथ ही घोषित हो जानी चाहिए. अब देखते हैं आखिर होता क्या है.
बता दें कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) की ओर से आयोजित परीक्षा 29 व 30 जनवरी, 2026 को आयोजित होनी थी, लेकिन कुछ वक्त पहले इस तारीख पर परीक्षा को रद्द कर दिया गया. इससे पिछली बार यूपीटीईटी परीक्षा का आयोजन 23 जनवरी, 2022 को किया गया था यानी 4 साल से परीक्षा का आयोजन नहीं हुआ है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर परीक्षा को लेकर उम्मीदवार क्या कहते हैं जो लंबे वक्त से परीक्षा होने के नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे हैं...
एज लिमिट भी खत्म हो रही है...
सुरभि बिश्नोई ने आजतक को बताया, 'हर साल दर साल परीक्षा टलती रही और उनका आत्मविश्वास धीरे-धीरे टूटता चला गया. डीएलएड के फॉर्म हर साल निकलते रहे, नए छात्र जुड़ते गए, लेकिन परीक्षा का कोई ठोस संकेत नहीं मिला. इसी असमंजस में मैं किसी दूसरी सरकारी परीक्षा की तैयारी भी नहीं कर सकीं, क्योंकि जब तक उन्हें समझ आया कि यह परीक्षा शायद लंबे समय तक नहीं होगी, तब तक कई परीक्षाओं की आयु-सीमा निकल चुकी थी. अब हालात ऐसे हो गए हैं कि परीक्षा होने की उम्मीद भी कमजोर पड़ चुकी है.'
आगे सुरभि कहती हैं, 'चुनाव के समय जरूर भर्तियों की बातें सुर्खियों में आती हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं बदलता. अगर अब भी परीक्षा हो जाती है तो उन्हें डर है कि भर्ती प्रक्रिया फिर अदालतों में उलझ जाएगी और जॉइनिंग में सालों लग जाएंगे. वह आर्थिक रूप से अपने परिवार पर पूरी तरह निर्भर हैं और अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी घर से पैसे मांगने पड़ते हैं, जो उन्हें अंदर से तोड़ देता है. उनके मुताबिक, अगर उन्हें इतना बुरा लग रहा है तो उन छात्रों की हालत क्या होगी, जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर है.
हाथ जोड़ रहे हैं....
वहीं, प्रीत त्रिपाठी का कहना है, 'मैं 2019 से लगातार इस उम्मीद में तैयारी कर रही हूं कि अब कभी भी वैकेंसी आएगी. शुरुआत में सपना था कि नौकरी मिलते ही वह परिवार की आर्थिक मदद कर पाएंगी और आत्मनिर्भर बनेंगी. लेकिन, अब हकीकत यह है कि इतने साल पढ़ाई करने के बाद भी वह आर्थिक रूप से सुरक्षित नहीं है. इंतज़ार इतना भारी हो गया है कि हर सुबह इसी उम्मीद के साथ जागता है कि शायद आज कोई अच्छी खबर मिले, लेकिन निराशा ही हाथ लगती है. हाथ जोड़कर सरकार से अनुरोध है कि प्लीज कुछ स्टेज स्टेप ले लीजिए.'
भर्ती भी कोर्ट के चक्कर काटती है..
नोएडा की रानू गुप्ता कहती हैं, 'मैंने साल 2019 में D.ed (Diploma in Education) hearing impairment का कोर्स किया था. शिक्षक बनने का सपना लेकर मैंने यह तैयारी शुरू की थी. उम्मीद थी कि एक सम्मानजनक सरकारी शिक्षक बन पाउंगी, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार का सहारा भी दे पाउंगी. जब मैंने तैयारी शुरू की थी, तब उम्मीद थी कि UPTET / SUPER TET के एग्जाम होंगे और जो सही उम्मीदवार होगा, उसे मौका मिलेगा. हकीकत कुछ और निकली. जनवरी 2022 में UPTET एक बार आयोजित हुआ, उसके बाद से आज तक कोई एग्जाम नहीं हुआ, हर बार चुनाव के टाइम खबर आती है कि UPTET होगा, जिससे उम्मीद बढ़ती है, लेकिन कुछ भी नहीं होता.
वो बताती हैं, 'इस लंबे इंतजार के कारण अब हम ओवरएज होने की स्थिति में पहुंच गए , जिसके बाद हम किसी भी भर्ती के लिए कैपेबल ही नहीं रहेंगे, यह स्थिति न केवल हमारी मेहनत और योग्यता के साथ अन्याय है, बल्कि हमारे भविष्य को भी अंधकार में धकेल रही है. इस इंतजार में हमारी आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. मानसिक तनाव भी इतना है कि कुछ नहीं कर सके.
पहले भर्ती नहीं आती है तो एग्जाम नहीं हो पाते, फिर सालों तक रिजल्ट नहीं आता. रिजल्ट आ गया तो काउंसलिंग नहीं होगी और फिर सालों तक कोर्ट में केस चलता है, फिर जॉइनिंग नहीं होती.
लोग पूछते हैं अब तक क्या हुआ?
फर्रुखाबाद की आहूति कहती हैं, 'मैं कई साल से तैयारी कर रही हूं. उम्मीद थी कि परिवार की मदद करुंगी, लेकिन हकीकत यह है कि मेहनत के बावजद चयन प्रक्रिया अधूरी हैं, भर्तियां समय पर नहीं हो रहीं और रिजल्ट नहीं आ पा रहे. इस दौरान कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा है सबसे बडी समस्या आर्थिक है. तैयारी के कारण न ढंग से नौकरी कर पा रहे हैं, न ही कोई दूसरा करियर शरू कर पा रहे हैं. घरवालों पर निर्भर रहना मानसिक बोझ बन जाता है. समाज सवाल करता है " अब तक क्या हआ? और हमारे पास कोई ठोस जवाब नहीं होता.'
बता दें कि यूपीटीईटी की परीक्षा में दो पेपर होते है. पेपर-1 कक्षा पहली से पांचवीं के लिए और पेपर-2 कक्षा छठी से आठवीं के लिए आयोजित कराया जाता है. पेपर-1 में उम्मीदवारों से बाल विकास और शिक्षाशास्त्र, पर्यावरण अध्ययन और गणित विषय से 150 अंकों के 150 बहुविकल्पीय प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं. पेपर-2 में उम्मीदवारों से बाल विकास और शिक्षाशास्त्र, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा से 150 अंकों के 150 बहुविकल्पीय प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं.