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Report: AI के दौर में मेंटल स्किल है सबसे जरूरी, इन लोगों की नहीं खत्म होगी डिमांड

AI के बढ़ते प्रभाव ने दुनियाभर में नौकरियों और भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है. लेकिन हाल में आई मैकिन्से रिपोर्ट कुछ और ही बताती है.

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AI के बढ़ते प्रभाव ने दुनियाभर में नौकरियों और भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है. (Photo : Pexels)
AI के बढ़ते प्रभाव ने दुनियाभर में नौकरियों और भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है. (Photo : Pexels)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से अर्थव्यवस्था और नौकरी के बाजार को बदल रही है. इस वजह से लोगों के मन में नौकरी को लेकर डर बना हुआ है. इसी बीच मैकिन्से की एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जो बताती है कि एआई के दौर में रिलेवेंट बने रहने के लिए सबसे जरूरी चीज है मजबूत इंटेलेक्चुअल  एबिलिटी. 

रिपोर्ट के अनुसार, अब कंपनियां ऐसे लोगों को प्राथमिकता दे रहा है, जिनकी दिमागी क्षमता बेहतर हो. मैकिन्से का कहना है कि बौद्धिक क्षमता का मतलब सिर्फ तेज दिमाग होना नहीं है, बल्कि मानसिक रूप से स्वस्थ और सक्रिय दिमाग होना है. 

इन बातों का भी है जिक्र 

दिमाग और स्किल की बात करें तो, मैकिन्से का कहना है कि इसमें सोचने-समझने की क्षमता, नई चीजें बनाने की क्षमता, परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता और बदलाव को अपनाने की क्षमता शामिल है. रिपोर्ट बताती है कि AI अब ईमेल लिखने, डेटा एनालिसिस करने और कोड बनाने जैसे कई नियमित काम आसानी से कर सकता है. इसलिए, अब कंपनियों को इन रोजमर्रा के कामों के लिए इंसानों की जरूरत कम हो सकती है. इसके बजाय, वे उन लोगों को महत्व देंगे जिनकी ऐसी क्षमताएं हों जिन्हें मशीन आसानी से नहीं दोहरा सकें. रिपोर्ट में कहा गया है कि AI काम करने के तरीके को बदल देगा और प्रतियोगिता अब मानव और मशीन की क्षमताओं पर निर्भर करेगी. साथ ही यह चेतावनी दी गई है कि जो देश और कंपनियां इन मानवीय क्षमताओं में निवेश नहीं करतीं, वह आने वाले समय में पीछे हो जाएंगी. 

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पहली बार नहीं... 

यह पहली बार नहीं है जब टेक्निकल स्किल से ज्यादा ह्यूमन स्किल पर फोकस किया जा रहा है.  इससे पहले एक्सेल स्प्रिंगर के सीईओ मैथियास डोप्फनर के साथ बातचीत में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने कहा था कि एआई की दुनिया में रिलेवेंट रिलेवेंट बने रहने के लिए लोगों को सिर्फ दिमाग से काम नहीं चलेगा. उन्होंने बताया कि दिमाग कामों को पूरा करने में मदद करती है, लेकिन एम्पैथी और इमोशनल इंटेलिजेंस (EQ) ही इंसान और मशीन के बीच असली अंतर बनाती है. नडेला ने कहा कि बुद्धि का महत्व है, लेकिन यह अकेली दुनिया में जरूरी चीज नहीं है. अगर आपके पास सिर्फ दिमाग है और इमोशन नहीं है, यह दिमाग बेकार है.  

इसी तरह, ओपनएआई के सीईओ सैम अल्टमैन ने भी माना कि एआई कुछ नौकरियों में इंसानों की जगह ले सकता है. लेकिन उन्होंने कहा कि रिलेवेंट बने रहने के लिए लोगों को खुद को अनुकूलित करना होगा.  

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