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नए दौर में छात्रों के बदलते करियर पाथ, AI से लेकर अकाउंटिंग तक क्या-क्या है नया?

फाइनेंशियल इंक्लूजन में तेजी से बदलाव हो रहा है. AI और फिनटेक टेक्नोलॉजी की मदद से अब ऐसे लोगों को भी आसानी से लोन मिल पा रहा है, जो फुल टाइम नौकरी नहीं कर रहे हैं पर फ्रीलांसर, गिग वर्कर या छोटे काम में हैं. ये नई टेक्नोलाजी उनके काम और आय के डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर लोन देने में मदद करती है. इस बदलाव के कारण टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिसिस और फाइनेंशियल नियमों को समझने वाले लोगों के लिए नए करियर अवसर भी बढ़ रहे हैं. 

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फाइनेंशियल इंक्लूजन में तेजी से बदलाव हो रहा है. (Photo: Pexels)
फाइनेंशियल इंक्लूजन में तेजी से बदलाव हो रहा है. (Photo: Pexels)

पहले फाइनेंशियल इंक्लूजन को केवल सरकारी जिम्मेदारी माना जाता था. लोगों को बैंकिंग और लोन की सुविधा देने के लिए कानून, सब्सिडी और नियम बनाए जाते थे. लेकिन अब सोच बदल रही है. आज के दौर में AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से बैंक और फिनटेक कंपनियां डेटा के आधार पर फैसले ले रही हैं. इससे ज्यादा लोगों तक आसानी से बैंकिंग और लोन की सुविधा पहुंच रही है. 

इस बदलाव के चलते उन छात्रों के लिए नए करियर मौके पैदा हो रहे हैं, जो AI, फाइनेंस और समाज के लिए काम करने वाले क्षेत्रों में दिलचस्पी रखते हैं. 

फाइनेंशियल इंक्लूजन क्यों बनती जा रही है समस्या?

पहले बैंकिंग सिस्टम उन लोगों के लिए काम करते थे जिनकी नौकरी पक्की थी. हर महीने तय सैलरी और लंबा क्रेडिट रिकॉर्ड होता था. लेकिन आज कई गिग वर्कर, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी या ब्लू-कॉलर कामगार हैं. उनकी आय कभी ज्यादा, कभी कम हो सकती है. उनके पास पूरा बैंकिंग रिकॉर्ड भी नहीं होता. इस वजह से उन्हें लोन नहीं मिल पाता. यह इसलिए नहीं कि वे लायक नहीं हैं, बल्कि इसलिए कि पुराना सिस्टम उनके अनुसार बना ही नहीं है. अब इस समस्या को हल करने के लिए सिर्फ नियम बदलना काफी नहीं है. जरूरत अब ऐसे लोगों की है, जो नई तकनीक और AI की मदद से बेहतर फाइनेंशियल सिस्टम डिजाइन कर सकें. इसमें कुछ उद्योग विशेषज्ञ रूप से काम कर रहे हैं, जिन्होंने गिग और ब्लू-कॉलर कामगारों के लिए खास तरह के क्रेडिट और जोखिम प्लेटफॉर्म बनाए हैं. AI से चलने वाले सिस्टम यह तय करने में मदद करते हैं कि किसे सुरक्षित तरीके से लोन दिया जा सकता है. सही तकनीकी डिजाइन से ज्यादा लोगों को बैंकिंग सुविधा मिलती है, साथ ही भरोसा और पारदर्शिता भी बढ़ती है. 

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AI से हो रहा है काम 

आज के दौर में क्रेडिट प्लेटफॉर्म और फाइनेंशियल टूल केवल पुराने बैंकिंग सिस्टम पर बने सिंपल से एप्लीकेशन नहीं हैं. अब ये AI पर आधारित स्मार्ट सिस्टम बन गए हैं, जो बड़े और कॉम्प्लेक्स डेटा का विश्लेषण करते हैं. साथ ही उन्हें सरकारी नियमों और नैतिक मानकों का भी पालन करना होता है. 

इन नौकरियों की बढ़ रही है मांग

इस कारण नई तरह की नौकरियों की मांग बढ़ी है, जैसे- 

  • AI और मशीन लर्निंग इंजीनियर
  • सिस्टम आर्किटेक्ट और प्लेटफॉर्म इंजीनियर
  • टेक्नोलॉजी की जानकारी रखने वाले लोगों की

छात्रों के लिए इसका मतलब साफ है कि अब फाइनेंस में करियर सिर्फ बैंकिंग या अकाउंटिंग तक सीमित नहीं है और टेक्नोलॉजी में करियर सिर्फ कोडिंग या सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट तक सीमित नहीं है. 

इन क्षेत्रों में भी बढ़ रही छात्रों की दिलचस्पी 

आज के AI आधारित फाइनेंशियल सिस्टम में सिर्फ तेज काम करना ही काफी नहीं है बल्कि उसकी अच्छी समझ होना भी जरूरी है. सिस्टम के फैसले समझाए जा सकें, ट्रैक किए जा सकें और जरूरत पड़ने पर जांचे जा सकें. जो छात्र इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, उन्हें इन स्किल्स पर फोकस करने की खास जरूरत है. जैसे-

  • मुख्य तकनीकी नॉलेज जैसे डेटा साइंस, AI और क्लाउड सिस्टम
  • फाइनेंस की समझ – जैसे अर्थशास्त्र और रिस्क मैनेजमेंट 
  • इंटर फंक्शनल थिंकिंग यानी कि मिलकर काम करने की सोच – टेक्नोलॉजी, कानून और नीति को साथ समझना

अच्छी बात यह है कि यह फील्ड केवल इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए नहीं है. इकोनॉमिक्स , स्टैटिसटिक्स , मैनेजमेंट या पब्लिक पॉलिसी के छात्र भी इसमें सफल करियर बना सकते हैं. 

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टेकओवर कर रहा है AI

जैसे-जैसे AI का इस्तेमाल लोन, बीमा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बढ़ रहा है, कंपनियां और सरकार जवाबदेही और डेटा सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. सिस्टम से सिर्फ फैसले लेने की उम्मीद नहीं है बल्कि यह भी दिखाना जरूरी है कि फैसले कैसे और क्यों लिए गए हैं. इसका मतलब है कि भविष्य के करियर उन पेशेवरों को आगे बढ़ाएंगे जो नई टेक्नोलॉजी के साथ जुड़ रहे हैं. 

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