सालों से महंगाई के चक्रव्यूह में फंसे आम इंसान को इससे निकालने के लिए प्रकाश झा ने जो 'चक्रव्यूह' रचा है उसे कैलाश खेर ने अपनी सुरीली आवाज में पिरोया है. उम्मीद है कि महंगाई से परेशान जनता इस धुन से अपनी जिन्दगी की ताल जरूर समझ पाएगी.