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याकूब की फांसी का आदेश सुनते ही खुश हुआ ये 'जल्लाद'

कोर्ट जैसे ही किसी को फांसी देने का आदेश सुनाती, वैसे ही ये जल्लाद जोश से लबरेज हो जाता है. वो हर पल केवल फांसी देने के लिए मन में मंथन करता रहता है. जी हां, हम बात कर रह हैं मेरठ के पवन जल्लाद की.

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मुंबई बम धमाकों के आरोपी याकूब मेमन को फांसी देना चाहता है पवन जल्लाद.
मुंबई बम धमाकों के आरोपी याकूब मेमन को फांसी देना चाहता है पवन जल्लाद.

कोर्ट जैसे ही किसी को फांसी देने का आदेश सुनाती, वैसे ही ये जल्लाद जोश से लबरेज हो जाता है. वो हर पल केवल फांसी देने के लिए मन में मंथन करता रहता है. जी हां, हम बात कर रह हैं मेरठ के पवन जल्लाद की. मुंबई बम धमाकों के आरोपी याकूब मेमन को फांसी देने का आदेश आते ही सबसे ज्यादा खुशी पवन जल्लाद को हुई है.

पवन ने नागपुर जेल को मेल भेजा है कि याकूब को फांसी देने के लिए उसे बुलाया जाए. वह इसके लिए दिन-रात फांसी देने की तैयारी में लगा हुआ है. जंगल में जाकर रस्सी से फांसी का फंदा बनाकर अभ्यास कर रहा है. वह कहता है कि उसके परिवार की तीन पीढ़ियों से फांसी देने का काम होता रहा है. यदि उसका बेटा ये काम करने के लिए तैयार होगा, तो उसे भी सिखाएगा.


पवन देश की इकलौती जल्लाद फैमिली से है, जहां यह काम पीढ़ी-दर-पीढ़ी होता चला आ रहा है. परदादा से लेकर पोते तक ने इस पेशे को अब तक कायम रखा है. उसके दादा कल्लू जल्लाद ने दिल्ली की सेंट्रल जेल में रंगा-बिल्ला को फांसी दिया था. कल्लू ने ही इंदिरा गांधी के हत्यारों को भी फांसी दी थी. भगत सिंह को भी फांसी देने के लिए उसके परदादा मजबूर हुए थे.


उसके पिता मम्मू सिंह ने देश के विभिन्न जगहों पर 12 अपराधियों को फांसी दिया था. उसके पिता फांसी का फंदा तैयार करने के लिए पूर देश में जाने जाते थे. फांसी के लिए प्लेटफार्म तैयार करने और फंदा बनाने का गुर उसने अपने दादा से सीखा था. उसका कहना है कि वो अपराधियों को फांसी देना चाहता है. मेरठ जेल से उसे तीन हजार की पगार मिलती है.

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