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गुरदासपुर SP को लेकर NIA टीम ने किया घटनाक्रम का रूपांतरण

एसपी सलविंदर सिंह का कहना है कि वह अक्सर मजार पर जाते रहते थे. लेकिन मजार के संचालक का कहना है कि उन्होंने एसपी को वहां पहले कभी नहीं देखा था. सवाल यह भी है कि उनके दोस्त और कुक सुबह ही उस दिन मजार पर क्यों गए थे?

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सवालों के घेरे में गुरदासपुर के एसपी
सवालों के घेरे में गुरदासपुर के एसपी

पठानकोट हमले से पहले अगवा हुए एसपी सलविंदर सिंह के साथ एनआईए की टीम ने पूरे घटनाक्रम का रूपांतरण किया. बुधवार को उनको उसी तरीके से गाड़ी की अगली सीट पर बैठाकर गुरदासपुर से मजार के पास से होते हुए पठानकोट लाया गया. बीच में कोलिआं मोड़ पर उनको उतार कर पूरा मामला समझा गया. यहीं से एसपी की गाड़ी छीनी गई थी. फिलहाल एनआईए को एसपी के दलीलों पर भरोसा नहीं हो रहा है.

सूत्रों के मुताबिक, एसपी सलविंदर सिंह का कहना है कि वह अक्सर मजार पर जाते रहते थे. लेकिन मजार के संचालक का कहना है कि उन्होंने एसपी को वहां पहले कभी नहीं देखा था. सवाल यह भी है कि उनके दोस्त और कुक सुबह ही उस दिन मजार पर क्यों गए थे? उसके बाद 9:30 बजे मजार से जाने के बाद वे सभी 2 घंटे तक कहां रहे. क्योंकि आतंकियों ने उनकी गाड़ी 11:30 बजे छीनी थी. जबकि मजार से वहां का रास्ता सिर्फ 10 मिनट का था.

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पल-पल बदलता रहा है एसपी का बयान
बताते चलें कि गुरदासपुर के एसपी सलविंदर सिंह शक के घेरे में हैं. एनआईए की टीम मंगलवार से ही उनसे पूछताछ कर ही है. किडनैपिंग के बाद एसपी, उनके दोस्त और कुक के विरोधाभासी बयानों से शक गहराता जा रहा है. रिहाई के बाद इन तीनों ने किडनैपिंग की जो कहानी बताई है, उसके बाद वो खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं. एनआईए के महानिदेशक शरद कुमार ने कहा कि सलविंदर सिंह का पल-पल बदलता बयान, शक के घेरे में ले जाता है.


एसपी सलविंदर सिंह ने बताया था वह खुद पीड़ित है, संदिग्ध नहीं. उनको गंभीर चोटें लगी हैं. वह किसी तरह मौत के मुंह से वापस आए हैं. पठान कोट के कोलिआं मोड़ पर उन लोगों ने गाड़ी रोकी थी. गाड़ी उनका दोस्त राजेश वर्मा चला रहा था. उसी समय अचानक आतंकी उनकी गाड़ी में घुस गए. उन्होंने अंदर की लाइट बंद करने के लिए कहा. उन्हें पीछे धकेल दिया. उनके हाथ सीट के पीछे बांध दिए. उन सभी को गन प्वाइंट पर ले रखा था.


उन्होंने बताया था कि आतंकियों के ये नहीं पता चला था कि वे पुलिस अफसर की गाड़ी में हैं. अगवा किए जाने के करीब 30-40 मिनट बाद पंजाब पुलिस की चेक पोस्ट पार करते ही आतंकियों ने सबसे पहले उनको गाड़ी से गिरा दिया. उस समय वह बेहोश थे. होश में आने के बाद उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को आतंकियों की जानकारी दी, लेकिन पुलिस उनकी जानकारी पर यकीन नहीं हुआ. वह दरगाह पर मत्था टेकने के बाद वापस आ रहे थे.

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