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मॉक ड्रिल: कुंभ के दौरान हुआ मंदिर में 'धमाका', जवानों ने पकड़े तीन आतंकी

प्रयागराज में कुंभ की शुरुआत के ठीक पहले सभी एजेंसियों द्वारा अब तक का सबसे बड़ा मॉक ड्रिल किया गया. यूपी पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पैरामिलिट्री और सेना द्वारा कुंभ के दौरान आतंकी हमलों से निपटने के लिए मॉक ड्रिल किया गया.

प्रयागराज में मॉक ड्रिल प्रयागराज में मॉक ड्रिल

15 जनवरी से शुरू होने वाले कुंभ महापर्व की तैयारियों में शामिल सभी एजेंसियों ने शुक्रवार को प्रयागराज में अब तक का सबसे बड़ा मॉक ड्रिल किया. कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं और सैलानियों की सुरक्षा के लिए अपनी तैयारियों को परखने के लिए एजेंसियों द्वारा किए गए इस मॉक ड्रिल में उत्तर प्रदेश पुलिस एंटी टेरर स्क्वैड, पैरामिलिट्री, भारतीय सेना, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवान शामिल हुए.

मॉक ड्रिल के तहत अचानक ही संगम घाट किनारे एक मंदिर पर धमाका हुआ और कई श्रद्धालु धमाके में घायल हो गए. धमाके के तुरंत बाद कमांड सेंटर को इसकी सूचना मिली और सबसे पहले मेले में तैनात सिविल डिफेंस की टीम बचाव के लिए पहुंची. आतंकी हमले की खबर लगते ही उत्तर प्रदेश पुलिस हथियारों से लैस होकर मंदिर के पास पहुंचे और चारों तरफ से घेराबंदी की ताकि आतंकी को भागने का मौका न मिले.

पुलिस के साथ-साथ एसडीआरएफ की टीम घायलों के बचाव में जुट गई और उन्हें स्ट्रेचर की मदद से एंबुलेंस तक पहुंचाया. इधर, कमांड सेंटर को खबर दी गई कि यह कोई मामूली धमाका नहीं था बल्कि रसायन धमाका किया गया था, जिसके जरिए वहां की हवा में रेडिएशन फैलने की आशंका है. सूचना पाकर तत्काल प्रभाव से एनडीआरएफ का विशेष दस्ता मौका ए वारदात पर पहुंचा.

एनडीआरएफ का यह दस्ता रेडिएशन से निपटने के लिए साजो सामान से पूरी तरह लैस था और धमाके वाली जगह पर कूच करता दिखाई दिया. इस रास्ते से एक जवान ने सबसे पहले हवा में पाउडर गिराकर हवा की दिशा देखी और पीछे से रेडिएशन नापने की मशीन लिए जवान आगे बढ़े. रेडिएशन लीक होने वाली जगह की खोज में जुट गए.

अपने कपड़ों और साजो सामान को देखकर एनडीआरएफ का रेडिएशन से निपटने वाले विशेष दस्ता किसी एलियन जैसा दिख रहा था. इनकी चुस्ती-फुर्ती कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को महफूज रखेगी. कुछ ही देर में रेडिएशन के सोर्स का पता लगा लिया गया. रेडिएशन के चलते मामूली रूप से घायल लोगों को एनडीआरएफ की विशेष मेडिकल टीम एक खास मोबाइल अस्पताल में ले गई.

वहां उन्हें केमिकल से नहलाया गया ताकि रेडिएशन साफ किया जा सके. बचाव का ऑपरेशन खत्म होते ही आतंकियों से निपटने के लिए पैरामिलिट्री फोर्स को बुलाया गया. सीआईएसफ के जवान आधुनिक हथियारों से लैस होकर मंदिर में छुपे आतंकी की खोज के लिए आगे बढ़े और साथ ही इलाके की घेराबंदी शुरू की. कुछ ही देर की जद्दोजहद के बाद सीआईएसफ के जवानों ने पहले आतंकी को खोज निकाला और उसे सरेंडर करने का आदेश दिया.

यूपी पुलिस को पता लगा कि दर्शक इस धमाके में कुल 3 आतंकी शामिल थे और वह सब मंदिर के इलाके में छुपे हो सकते हैं. टुकड़ी आगे बढ़ी और चप्पा चप्पा खंगाला. कुछ ही देर में दूसरे आतंकी की गिरफ्तारी भी हो गई. तीसरे आतंकी की तलाश के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस के एंटी टेरेरिस्ट स्क्वैड के विशेष कमांडो दस्ते को भी बुलाया गया. बेहद चौकस फुर्तीला और रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे इन जवानों ने एक-एक कोने और हर चप्पे को छानना शुरू किया. थोड़ी देर में इस विशेष दस्ते ने तीसरे आतंकी को भी खोज निकाला.

घायलों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर प्रयागराज के अलग-अलग अस्पतालों में भेजा गया और तीनों आतंकियों को पकड़ लिया गया. इस तरह से 15 तारीख को प्रयागराज में शुरू होने वाले अर्धकुंभ के महापर्व से पहले सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती से निपटने के लिए सभी एजेंसियां तैयार हो गई हैं. प्रयागराज के आईजी मोहित अग्रवाल ने आश्वासन दिया कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल में आस्था की डुबकी लगाने का मौका मिलेगा.

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