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महाराष्ट्र: तीन साल की मासूम से रेप और हत्या के मामले में दोषी वॉचमैन को सजा-ए-मौत

महाराष्ट्र के ठाणे में 3 साल की बच्ची से रेप और हत्या के दोषी वॉचमैन के लिए हाईकोर्ट ने सजा-ए- मौत को बरकरार रखा है. अदालत ने पाया कि दोषी ने एक खूंखार अपराध को अंजाम दिया है.

Death Sentence Death Sentence
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 3 साल की बच्ची से रेप कर ली जान
  • दोषी वॉचमैन को सजा-ए-मौत

एक ओर जहां शक्ति मिल कंपाउंड गैंगे रेप मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने तीन दोषियों को मौत की सजा सुनाई है वहीं महाराष्ट्र के ठाणे में 3 साल की बच्ची से रेप और हत्या के दोषी वॉचमैन के लिए हाईकोर्ट ने सजा-ए- मौत को बरकरार रखा है. अदालत ने पाया कि दोषी ने एक खूंखार अपराध को अंजाम दिया है. जस्टिस साधना जाधव और पृथ्वीराज चवन ने दोषी पोक्सो एक्ट के तहत रामकिरत गौड़ को मौत की सजा सुनाई.

रेप और हत्या से पहले खेलने निकली थी बच्ची 

गौरतलब है कि 30 सितंबर 2013 को मासूम बच्ची अपने कुत्ते के साथ खेलने के लिए घहर से बाहर निकली लेकिन दोबारा घर नहीं लौटी. बच्ची के पिता ने उसे खोजो तो वह आस पास कहीं नहीं मिली जबकि उसका कुत्ता एक चॉल के पास बंधा दिखाई पड़ा. कुत्ते के पांव मिट्टी में सने हुए थे. इसे देखकर बच्ची के पिता को याद आया कि उसके मिट्टी में पांव सने किसी शख्स को अभी-अभी देखा है. बच्ची  सोसाइटी की बिल्डिंग में दोषी गौड़ वॉचमैन के रूप में काम करता था. 

कीचड़ में मिला बच्ची का शव

लड़की के पिता ने उसके लापता होने की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई. इसके दो दिन बाद पुलिस ने उन्हें फोन कर पुलिस को मिली एक लाश की शिनाख्त के लिए बुलाया. पुलिस को बच्ची का शव कीचड़ के तलाब में मिला था. जांच में पता लगा कि बच्ची की हत्या से पहले उसके साथ बलात्कार किया गया था. 

दो बेटियों का बाप है बलात्कारी

यूपी का रहने वाला गौड़ खेती किया करता था लेकिन पैसों की कमी के चलते वह अपनी पत्नी और बच्चों को छोड़कर शहर में अपने पिता के पास आ गया था. उसने घटना से दो सप्ताह पहले ही बतौर वॉचमैन सोसाइटी का काम संभाला था. सभी सबूतों और बयानों के मद्देनजर अदालत की पीठ ने कहा- मामले में दरिंदगी को देखते हुए साफ है कि गौड़ ने ये सब करने से पहले एक बार भी बच्ची के जीवन के बारे में नहीं सोचा. उसने बच्ची का रेप और हत्या करने से पहले एक बार भी नहीं सोचा कि उसकी खुद की दो बेटियां हैं.  पीठ ने गौड़ से खुद बात की और पाया कि उसे अपने किए का किसी प्रकार का कोई पछतावा नहीं है. कोर्ट ने अपने 35 पन्नों को फैसले में कहा कि ये खौफनाक है कि नन्हीं सी कली को खिलने से पहले ही रौंद दिया गया. 


 

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