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विवेक तिवारी मर्डर: दोनों आरोपी पुलिसकर्मी बर्खास्त, नई FIR में भी नाम

यह घटना बीते शुक्रवार देर रात की है. यूपी पुलिस की गोली लगने से विवेक की तिवारी की मौत होने का आरोप है, जिसे लेकर दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को जेल भेज दिया गया है. हालांकि, आरोपी का दावा है कि विवेक ने उसके ऊपर कार चढ़ाने की कोशिश की और आत्मरक्षा में उसे फायर करनी पड़ी.

मृतक विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी (फोटो-getty) मृतक विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी (फोटो-getty)

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ऐपल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या के मामले में अब नया मोड़ आ गया है. एफआईआर को लेकर उठे सवालों के बाद अब पुलिस ने मृतक विवेक की पत्नी की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया है. इससे पहले पुलिस ने घटना के वक्त विवेक के साथ कार में मौजूद उनकी सहकर्मी सना के नाम से एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें बहुत की होशियारी के साथ ये साबित करने की कोशिश की गई थी कि पुलिस ने विवेक पर गोली ही नहीं चलाई. दोनों पुलिसवालों को बर्खास्त भी कर दिया गया है.

इस एफआईआर पर बवाल के बीच रविवार को विवेक का अंतिम संस्कार कर दिया गया. यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी से मुलाकात की और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फोन पर उनसे बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिया. जिसके बाद रविवार को ही पुलिस ने कल्पना की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की.

एफआईआर में क्या लिखा

लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दर्ज की गई इस एफआईआर में विवेक की पत्नी ने भी सना के बयान के हवाले से शिकायत दर्ज कराई है. एफआईआर में लिखा गया है, 'मेरे पति एप्पल कंपनी में कार्यरत थे, जिनकी हत्या प्रशांत चौधरी द्वारा की गई है और जिसकी जानकारी मेरे पति के साथ सहकर्मी सना द्वारा बताई गई है, जो कि निम्नलिखित है.

'आज रात में हम और हमारे सहकर्मी ASM साहब रात में लगभग डेढ़ बजे जब घर वापस आ रहे थे, तो अचानक प्रशांत चौधरी व संदीप कुमार, कार के सामने आ गए. ASM साबह डर की वजह से और महिला साथ होने के कारण गाड़ी आगे बढ़ाकर चलने की कोशिश करने लगे, उसी समय मोटर साइकिल से एक सिपाही उतरा, जो पीछे बैठा हुआ था और उसके पास एक डंडा था तथा आगे बैठे हुए प्रशांत चौधरी ने शीशे से अपनी पिस्टल सटाकर जाने से मारने के उद्देश्य से फायर किया, जिससे उनकी हत्या हो गई.'

विवेक की पत्नी ने सना के बयान के आधार पर अपनी एफआईआर में आगे लिखवाया है, 'ठुड्डी में गोली लगी और आधा किलोमीटर बाद गाड़ी खंभे से जाकर टकरा गई. इस बीच वहां जो पुलिसवाले आए, उन्होंने न मुझे किसी को फोन करने दिया और न ही किसी का फोन उठाने दिया और जबरदस्ती सादे कागज पर मुझसे दस्तखत करवा लिए और बाद में मीडिया तथा पुलिस के उच्चाधिकारियों के दबाव में मुझसे जबरदस्ती बोल-बोलकर उसी पन्ने पर लिखवाया भी गया. चूंकि मैं उस वक्त डरी हुई थी, इसलिए लिखती गई.'

फिलहाल, इस मामले में एसआईटी जांच के आदेश दे दिए गए हैं. मुख्यमंत्री योगी ने दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है. ऐसे में अब देखना होगा कि इस घटना से जुड़े अनसुलझे सवालों का जवाब कब तक मिल पाता है.

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