इकबाल मिर्ची केस की जांच करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने पाया है कि DHFL ने बीते साल दो कंपनियों को संदिग्ध कर्ज दिए थे. सुधाकर शेट्टी से जुड़ी इन कागज़ी कंपनियों को करीब 4000 करोड़ रुपए के संदिग्ध कर्ज DHFL ने मंज़ूर किए थे.
ED जिस इकबाल मिर्ची केस की जांच कर रही है उसमें DHFL के प्रमोटर कपिल वधावन और धीरज वधावन अभियुक्त हैं. साथ ही मुंबई के कारोबारी सुधाकर शेट्टी पर आरोप है कि उसने वधावन भाइयों को NBFC से हजारों करोड़ निकलवाने में मदद की और कथित मनी लॉन्ड्रिंग में रकम ठिकाने लगाई.
एक तरफ DHFL ने ऐसे ग्राहकों से अमानत में ख्यानत की जिन्होंने 2018 से फिक्स्ड डिपॉजिट्स में रकम का निवेश किया. DHFL प्रमोटर्स ने फंड को कर्ज के नाम पर शेट्टी की कंपनियों में ट्रांसफर किया जिसे बाद में मनी लॉन्ड्रिंग का रास्ता अपनाया गया. ऐसा शक है कि मंजूर किए गए कर्ज की चिट्ठियां या दस्तावेज बाद में तैयार किए गए जब DHFL का नाम RBI, SEBI या SFIO की जांच के रडार पर आ गया.
ED का मानना रहा है कि DHFL से निकाली गई रकम का इस्तेमाल इकबाल मिर्ची को उसकी वर्ली की संपत्तियों के भुगतान के लिए किया गया. ये संपत्तियां धीरज वधावन ने अपनी शैल कंपनी सनब्लिंक डेवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिए खरीदा था.
जिन कंपनियों को कर्ज दिए गए उनके नाम हैं- सिगतिया कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड और दर्शन डेवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, ये दोनों कंपनियां सुधाकर शेट्टी से जुड़ी हैं क्योंकि इनके पते MCA कॉपी में है. DHFL और कंपनियों के बीच लोन एग्रीमेंट में भी कंपनियों का पता भी वही है जो शेट्टी के अंधेरी, मुंबई में दफ्तर का है.
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दर्शन डेवेलपर्स को 5 सितंबर 2019 को 2087 करोड़ का कर्ज मंजूर किया गया. वहीं सिगतिया कंस्ट्रक्शन को 11 सितंबर 2019 को 1910 करोड़ रुपए का कर्ज मंजूर किया गया. इससे पहले जांच के दौरान ED अधिकारियों ने 79 कागज़ी कंपनियों का पता लगाया. इनका इस्तेमाल वधावन भाइयों ने DHFL से 12,773 करोड़ रुपए निकालने के लिए किया. इनमें से 4 कंपनियां शेट्टी की थीं.
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शेट्टी की कंपनी साहाना ग्रुप के सीईओ दयाराम केडिया से मंगलवार को ED ने पूछताछ की. शेट्टी को अभी एजेंसी के सामने पेश होना बाकी है.