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Explainer: किस केस में देशमुख की हुई गिरफ्तारी, 100 करोड़ की वसूली का क्या है पूरा मामला?

महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख को प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार देर रात गिरफ्तार कर लिया. उन्हें 100 करोड़ रुपये की वसूली के मामले में गिरफ्तार किया गया है. इससे पहले उनसे 12 घंटे तक सवाल-जवाब किए गए थे.

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आरोपों के बाद देशमुख ने अप्रैल में गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. (फाइल फोटो) आरोपों के बाद देशमुख ने अप्रैल में गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अनिल देशमुख को देर रात किया गया गिरफ्तार
  • गृहमंत्री रहते पद का दुरुपयोग करने का है आरोप

100 करोड़ की वसूली के मामले में महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) आखिरकार गिरफ्तार हो ही गए. सोमवार को देशमुख मुंबई स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश हुए थे. उनसे करीब 12 घंटे तक पूछताछ की गई और उसके बाद देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया है. सूत्रों ने बताया कि देशमुख को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वो जांच में 'सहयोग' नहीं कर रहे थे. लेकिन क्या है ये पूरा मामला? और कैसे शुरू हुई इसकी कहानी?

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

इस साल 25 फरवरी को उद्योगपति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के घर एंटीलिया (Antillia Case) के घर के बाहर विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी खड़ी मिली थी. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जब इस मामले की जांच शुरू की तो इसमें मुंबई पुलिस के सचिन वाजे (Sachin Vaze) के शामिल होने की बात सामने आई. इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने उस समय के मुंबई पुलिस के कमिश्नर परमबीर सिंह (Param Bir Singh) का ट्रांसफर कर दिया गया और उन्हें होमगार्ड का डीजी बना दिया गया.

इसके बाद परमबीर सिंह की एक चिट्ठी सामने आई जो उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को लिखी थी. इस चिट्ठी में परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख ने सचिन वाजे को हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली करने का आदेश दिया था. ये वसूली बार और रेस्टोरेंट के मालिकों से वसूली जाती थी. परमबीर सिंह के आरोपों के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी. बाद में अनिल देशमुख ने गृहमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया.

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आगे क्या हुआ...

प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस केस की जांच कर रहा है. ED ने अपनी जांच में पाया कि मुंबई पुलिस में क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का हेड रहते हुए सचिन वाजे ने दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 तक मुंबई के ऑर्केस्ट्रा बार से 4.70 करोड़ रुपये की वसूली की थी, जिसे बाद में सहायक के जरिए अनिल देशमुख को सौंप दिया गया था. 

आजतक को मिले दस्तावेजों के मुताबिक, ED को नागपुर स्थित एक चैरिटेबल ट्रस्ट श्री साइं शिक्षण संस्था के बारे में भी पता चला है. इस ट्रस्ट को देशमुख का परिवार चला रहा है. ED का दावा है कि हाल ही में दिल्ली की एक शेल कंपनी के जरिए इस ट्रस्ट को 4.18 करोड़ रुपये का चंदा मिला है.

ED के दस्तावेजों के मुताबिक, महाराष्ट्र के गृहमंत्री रहते हुए अनिल देशमुख ने अपने पद का दुरुपयोग किया और मुंबई के ऑर्केस्ट्रा बार के मालिकों से 4.70 करोड़ रुपये वसूले. बाद में इस पैसे को उनके बेटे ऋषिकेश देशमुख (Hrishikesh Deshmukh) ने दिल्ली की एक शेल कंपनी को कैश के रूप में ट्रांसफर किए. उसके बाद यही रकम डोनेशन के रूप में श्री साईं शिक्षण संस्था को ट्रांसफर कर दी गई.

आखिरकार गिरफ्तार हो गए देशमुख

अनिल देशमुख सोमवार सुबह करीब 11 बजकर 50 मिनट पर ED के दफ्तर पहुंचे थे. इससे पहले उन्हें 5 बार समन जारी किए गए थे, लेकिन वो पेश नहीं हुए थे. उन्होंने फिर से समन रद्द करवाने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्हें ED के सामने पेश होना पड़ा. इससे पहले ED ने जून में देशमुख के पीए कुंदन शिंदे (Kundan Shinde) और पीएस संजीव पलांदे (Sanjeev Palande) को गिरफ्तार कर लिया था.

 

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