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छत्तीसगढ़: सिवेट कैट को मारने के आरोप में 6 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज

आखिरकार वन विभाग ने छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9 एवं धारा 51 के तहत मामला दर्ज किया है.

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सिवेट कैट को हाथ में लिए पुलिसकर्मी
सिवेट कैट को हाथ में लिए पुलिसकर्मी

 छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में एक सिवेट कैट को गोली मारना पुलिसकर्मियों को महंगा पड़ गया है. पुलिसकर्मियों ने सिवेट कैट अर्थात कबर बिज्जू को गोली मारने के बाद उसकी तस्वीरें फेसबुक और दूसरी सोशल साइट में पोस्ट कर दी. फिर क्या था , बवाल मचने में देर नहीं लगा.  वन्यजीव प्रेमियों, पर्यावरणविदों से लेकर वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन से जुडी कई संस्थाओं ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

आखिरकार वन विभाग ने छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9 एवं धारा 51 के तहत मामला दर्ज किया है. यह मामला अदालत में साबित हुआ तो आरोपी बनाए गए पुलिसकर्मियों को दस साल तक की कैद और 25 हजार तक का जुर्माना देना पड़ सकता है.

बताया जाता है कि राजनांदगांव स्थित पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में 14 और 15 जून की दरम्यानी रात पुलिसकर्मियों ने एक कबर बिज्जू को गोली मार दी थी. फिर उसके शव के साथ उन्होंने फोटो भी ली. बंदूकधारी पुलिसकर्मी कबर बिज्जू को हाथों में लिए हुए थे.

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ये तस्वीरें तेजी से वायरल हो गई. स्थानीय वन्य जीव प्रेमियों से लेकर  राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पुलिस और वन विभाग के अफसरों के समक्ष तस्वीरों के साथ शिकायत दर्ज कराई.   केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी वन विभाग को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है. आखिरकर  वन विभाग ने एक प्रधान आरक्षक सहित 5 लोगों पर  केस दर्ज किया है.  वन विभाग में एफआईआर की जगह POR होता है.

POR जिनके खिलाफ लिखी गई है उनमें मोहन राव(प्रधान नवआरक्षक),  रमेश कुमार नाग(नवआरक्षक), कन्हैया वैष्णव( नवआरक्षक) , अनिल कुमार मरकाम(नवआरक्षक), हरीश कौशिक के नाम शामिल हैं.    

संरक्षित जीव है कबर बिज्जू  

कबर बिज्जू अर्थात् सिवेट कैट छोटे प्राणियों जैसे चूहे, कीड़े, सांप, खरगोश, बिल्ली और वनों में पाए जाने वाले ऐसे ही छोटे जीवों का शिकार करता है. सघन वनों के घटने और जंगलों के तेजी से हो रहे सफाए के चलते कबर बिज्जुओं की संख्या काफी घटी है.

बताया जाता है कि भारत में कबर बिज्जू अर्थात सिवेट कैट की कुछ प्रजातियां ही शेष बची हैं.  ये खाने-पीने के लिए पूरी तरह से जंगलों पर ही निर्भर हैं. आमतौर पर यह बिल्ली की तरह दिखते हैं, लेकिन उससे कहीं ज्यादा हमलावर होते हैं. कबर बिज्जू लुप्त हो रहे हैं. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की अनुसूची दो के भाग दो में  1-A स्थान पर सिवेट अनुसुचित है जिसको मारने पर दस साल तक की सजा या 25000 जुर्माना या दोनों हो सकता है.      

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शिकायतकर्ताओं के मुताबिक राजनांदगांव के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में कबर बिज्जू को  पहले लाठियों से मारा गया. जख्मी होने के बाद उसे बंदूक से गोली मारी गई.

इस मामले की शिकायत मेनका गांधी की संस्था पीपल फार ऐनिमल की रायपुर इकाई की प्रमुख कस्तूरी बलाल ने वन विभाग के अफसरों से की थी. अंतरराष्ट्रीय संगठन PETA के प्रतिनिधि मीत असहर और  राजनांदगांव के वन्य जीव प्रेमी राजवीर सिंह ने भी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर वन विभाग के आला अफसरों से मुलाकात की थी.

फ़िलहाल पुलिस ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं. दुर्ग रेंज के आईजी जी.पी सिंह ने कहा है कि इस मामले में एसपी राजनांदगांव को जांच रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है. 

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