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छत्तीसगढ़: सीनियर्स ने की रैगिंग की हदें पार, छात्रा ने की खुदकुशी की कोशिश

परिजनों ने रैगिंग का आरोप लगाते हुए छात्रावास अधीक्षक और सीनियर छात्रों पर कार्यवाही की मांग की है. उनका आरोप है कि उनकी बेटी की रैगिंग हो रही थी. सीनियर्स उसे कपड़े धोने को मजबूर करते थे और नहीं करने पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे.

छात्रा से कपड़े तक धुलवाते थे सीनियर्स छात्रा से कपड़े तक धुलवाते थे सीनियर्स

छत्तीसगढ़ में एक नर्सिंग कॉलेज में रैगिंग का गंभीर मामला सामने आया है. कथित तौर पर रैगिंग से तंग आकर नर्सिंग की एक छात्रा ने छत से कूदकर खुदकुशी करने की कोशिश की. पीड़िता की पीठ और पैरों में गंभीर चोट आई है. उसे रायपुर के मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया है. डॉक्टरों के मुताबिक लड़की की हालत स्थिर है.

पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है, हालांकि अब तक पुलिस न तो पीड़िता और न ही कॉलेज प्रबंधन का बयान दर्ज कर पाई है. पुलिस का कहना है कि पीड़िता की हालत स्थिर होते ही उसका बयान दर्ज किया जाएगा. पुलिस का कहना है कि पीड़िता के कमरे से सुसाइड नोट भी नहीं मिला है, ऐसे में पीड़िता के बयान के बाद ही हकीकत से पर्दा उठेगा.

इस मामले में कॉलेज प्रबंधन पर भी लापरवाही के आरोप लग रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, पीड़िता ने अपने साथ रैगिंग के नाम पर हो रहे अत्याचार की शिकायत प्राचार्य और हॉस्टल वार्डन से भी की थी. लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने कोई कार्यवाही नहीं की.

उधर पीड़िता के परिजनों ने रैगिंग का आरोप लगाते हुए छात्रावास अधीक्षक और सीनियर छात्रों पर कार्यवाही की मांग की है. उनका आरोप है कि उनकी बेटी की रैगिंग हो रही थी. सीनियर्स उसे कपड़े धोने को मजबूर करते थे और नहीं करने पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे.

घटना कवर्धा के सुधादेवी सिंह नर्सिंग कॉलेज की है. बताया जाता है कि बीएससी नर्सिंग प्रथम वर्ष की छात्रा ने कॉलेज बिल्डिंग की छत से कूदकर खुदकुशी करने की कोशिश की. पीड़िता की चीख सुनकर कुछ स्टूडेंट्स और कॉलेज स्टॉफ मौके पर पहुंचे और ज्योति को फ़ौरन अस्पताल पहुंचाया.

पीड़िता की हालत बिगड़ते देख डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद उसे रायपुर स्थित मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि ज्योति ने कॉलेज बिल्डिंग के दूसरे या तीसरे या किस मंजिल से छलांग लगाई.

वहीं पीड़िता के परिजनों ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उनका आरोप है कि महीने भर से सीनियर्स उनकी बेटी के साथ नौकरों की तरह व्यवहार कर रहे थे. उसकी रैगिंग हो रही थी. सीनियर्स उससे रोजाना कपड़े धुलवाते थे. परिजनों के मुताबिक इस बात से ज्योति काफी तनावग्रस्त चल रही थी.

पीड़िता के परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि कॉलेज प्रबंधन सीनियर्स द्वारा रैगिंग के मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है. जूनियर स्टूडेंट्स को इस बारे में किसी भी तरह का बयान देने से रोका गया है.

उधर रायपुर में ज्योति का इलाज कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक छात्रा के दोनों पांव बुरी तरह फ्रैक्चर हो चुके हैं. उसके पुरे शरीर में कई जगह गंभीर चोटें आई हैं. पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया है, लेकिन कॉलेज प्रबंधन अब तक मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर सका है.

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