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यादव सिंह के खिलाफ CBI की चार्जशीट, 11 साल में बनाई 5 गुना संपत्ति

सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में नोएडा विकास प्राधिकरण के पूर्व इंजीनियर यादव सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है. गाजियाबाद की एक विशेष अदालत में यादव सिंह और उसके परिजनों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया. उसने 11 साल में 5 गुना अधिक संपत्ति अर्जित की है.

नोएडा विकास प्राधिकरण के पूर्व इंजीनियर यादव सिंह नोएडा विकास प्राधिकरण के पूर्व इंजीनियर यादव सिंह

सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में नोएडा विकास प्राधिकरण के पूर्व इंजीनियर यादव सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है. गाजियाबाद की एक विशेष अदालत में यादव सिंह और उसके परिजनों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया. उसने 11 साल में 5 गुना अधिक संपत्ति अर्जित की है.

सीबीआई प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने बताया कि आय से अधिक संपत्ति मामले में यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता, बेटियों गरिमा भूषण और करुणा सिंह, बेटे सनी सिंह, बहू श्रेष्ठा सिंह और चार्टर्ड एकाउंटेंट मोहन लाल राठी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. इसमें तीन कंपनियों और एक ट्रस्ट का नाम भी शामिल है.

उन्होंने कहा कि ये संपत्तियां 2004 से 2015 के बीच अर्जित की गईं है. इस दौरान आय के ज्ञात स्रोत से 512 फीसदी यानी 5 गुना अधिक संपत्ति अर्जित की गई है. सीबीआई ने यादव सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 466, 467, 469, 481 के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया हुआ है.

आगरा के गरीब दलित परिवार में हुआ जन्म

सत्ता को अपनी उंगलियों पर नचाने का गुमान रखने वाले यादव सिंह का जन्म आगरा के गरीब दलित परिवार में हुआ था. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमाधारी यादव सिंह ने 1980 में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नोएडा अथॉरिटी में नौकरी शुरू की. 1995 में प्रदेश में पहली बार जब मायावती सरकार आई तो 1995 में 19 इंजीनियरों के प्रमोशन को दरकिनार कर सहायक प्रोजेक्ट इंजीनियर के पद पर तैनात यादव सिंह को प्रोजेक्ट इंजीनियर के पद पर प्रमोशन दे दिया गया. उन्हें डिग्री हासिल करने के लिए तीन साल का समय भी दिया गया.

यादव सिंह ने जो चाहा वो हर सरकार ने दिया

इसके बाद 2002 में यादव सिंह को नोएडा में सीएमई पद पर तैनाती मिल गई. अगले नौ साल तक वे इसी पद पर तैनात रहे, जो प्राधिकरण में इंजीनियरिंग विभाग का सबसे बड़ा पद था. यादव सिंह इससे संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने कई पद खत्म कराकर अपने लिए इंजीनियरिंग इन चीफ का पद बनवाया. यानी वे जो चाह रहे था, सरकारें उसे पेश करने को हाजिर थीं. नौकरी के साथ ही वह बेनामी कंपनियों का जाल बुनते गए. कुछ सौ रुपये से शुरू होने वाली ये कंपनियां कुछ ही साल में करोड़ों का कारोबार करने लगीं.

परिवार के नाम कंपनियों का मालिकाना हक

यादव सिंह की ज्यादातर कंपनियों का मालिकाना हक उनकी पत्नी, बेटे और बेटियों के पास है. इनमें से एक कंपनी है चाहत टेक्नोलॉजी प्रा. लि. का दफ्तर 612, गोबिंद अपार्टमेंट्स, बी-2, वसुंधरा एन्कलेव, दिल्ली 96 दिखाया गया. इसके मालिकान में उसकी पत्नी कुसुमलता भी शामिल थीं. 2007-08 में इस कंपनी की कुल परिसंपत्ति और कारोबार 1856 रुपये और पेड अप कैपिटल 100 रुपये थी. लेकिन एक साल में पेड अप कैपिटल एक लाख रुपये और नेट फिक्स्ड परिसंपत्ति 5.47 करोड़ रुपये हो गई.

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