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दिल्‍ली गैंगरेप के बाद महिलाएं डरीं, उत्पादकता घटी

क्या दिल्ली में गैंगरेप की घटना के बाद महिलाएं रात में काम करने से डरने लगी हैं? क्या महिलाएं शाम को बाहर नहीं निकलना चाहतीं? क्या इससे कामकाजी महिलाओं की कार्यक्षमता पर असर पड़ा है? एसौचैम के सर्वे के मुताबिक इन सारे सवालों का जवाब 'हां' है. सबसे डरावनी बात ये है कि कई महिलाओं ने नौकरी छोड़ दी.

क्या दिल्ली में गैंगरेप की घटना के बाद महिलाएं रात में काम करने से डरने लगी हैं? क्या महिलाएं शाम को बाहर नहीं निकलना चाहतीं? क्या इससे कामकाजी महिलाओं की कार्यक्षमता पर असर पड़ा है? एसौचैम के सर्वे के मुताबिक इन सारे सवालों का जवाब 'हां' है. सबसे डरावनी बात ये है कि कई महिलाओं ने नौकरी छोड़ दी.

सर्वे के अनुसार दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कामकाजी महिलाओं के कार्यस्थल छोड़कर जल्दी घर निकलने से उनकी कार्य उत्पादकता में 40 प्रतिशत तक गिरावट आई है. एसोचैम के त्वरित सर्वेक्षण में यह परिणाम सामने आया है.

सर्वेक्षण के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं और विदेशी कंपनियों के लिये काम करने वाली बीपीओ इकाइयों में पिछले एक पखवाड़े में महिलायें शाम को काम छोड़कर जल्दी घर निकलने लगीं या फिर कुछ ने नौकरी ही छोड़ दी.

दिल्ली में गत 16 दिसंबर को चार्टर्ड बस में एक फिजियोथेरेपिस्ट छात्रा के साथ बलात्कार, मारपीट और प्रताड़ना के जघन्य कांड के बाद दिल्ली एनसीआर में कामकाजी महिलाओं में असुरक्षा की भावना बढ़ गई और वह सूरज ढलने के बाद जल्दी से जल्दी घर निकलना चाहतीं हैं.

एसोचैम ने सर्वेक्षण में करीब 2,500 महिलाओं से बात की. सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि दिल्ली और एनसीआर स्थित आईटी सेवाओं और बीपीओ कंपनियों में महिलाओं की कार्यउत्पादकता 40 प्रतिशत कम हुई है. दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में आईटी और बीपीओ की 2,200 इकाईयां हैं जिनमें करीब ढाई लाख महिलायें काम करती हैं. सर्वेक्षण में 82 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि उन्होंने सूरज ढलने के बाद कार्यालय से जल्दी निकलना शुरू कर दिया है. बस, चार्टर्ड बस और मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में यह चिंता अधिक पाई गई. दिल्ली, गुड़गांव, नोएडा और फरीदाबाद में काम करने वाली 89 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वह ड्यूटी समाप्त होने के बाद तुरंत दफ्तर से निकल जाना चाहतीं हैं. उन्हें महिलाओं के लिये माहौल असुरक्षित लगता है.

बैंगलोर, हैदराबाद, चेन्नई और मुंबई जैसे शहरों में भी कामकाजी महिलाओं की उत्पादकता पर असर पड़ा है लेकिन दिल्ली-एनसीआर में यह ज्यादा है. एसोचैम महिसचिव डी.एस. रावत ने सर्वेक्षण जारी करते हुये कहा कि बीपीओ केन्द्रों, आईटी सेवाओं और केपीओ क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं के मामले में समस्या ज्यादा है. शिफ्टिंग ड्यूटी और कामकाज के अपेक्षाकृत लंबे घंटे होने की वजह से इनमें सुरक्षा के प्रति ज्यादा चिंता रहती है. यही वजह है इन क्षेत्रों से ज्यादा महिलायें काम छोड़कर जा रही हैं.

एसोचैम ने सुझाव दिया है कि सभी बीपीओ और आईटीसेवाओं से जुड़ी कंपनियों में महिलाओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिये. बीपीओ कंपनियों में शाम और रात की पाली के लिये ट्रांसपोर्ट सुविधा होनी चाहिये, जहां ऐसा संभव नहीं है उनमें रात की पाली में महिलाओं को नहीं रखा चाहिये या फिर दूसरी बीपीओ कंपनियों के साथ मिलकर समूह में उनके आने जाने की व्यवस्था करनी चाहिये. रात की शिफ्ट में महिलायें समूह में एक साथ होनी चाहिये और उन्हें सबसे पहले घर से नहीं लिया जाना चाहिये और छोड़ते समय सबसे अंत में नहीं छोड़ा जाना चाहिये. इसके अलावा और भी कई एहतियात महिलाओं के मामले में बरती जानी चाहिये. वाहन चालकों के सबंधित परिवहन कंपनी और स्थानीय पुलिस स्टेशन में पूरी जांच और उनका रिकार्ड होना चाहिये.

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