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पापड़ और मसाले बनाने की आड़ में होता था करोड़ों रुपये का 'गोरखधंधा'

जांच में यह बात सामने आई है कि अब तक 300 करोड़ रुपये से ज्यादा जो इस संस्था ने सरकारी खजाने से अवैध रुप से निकाले थे. इस पैसे को बाजार में निवेश किया बल्कि रियल एस्टेट में भी लगाया. इन पैसों से लोगों को 16% ब्याज दर पर लोन भी मुहैया कराया गया.

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गोरखधंधे की मास्टरमाइंड मनोरमा देवी और बेटी प्रिया गोरखधंधे की मास्टरमाइंड मनोरमा देवी और बेटी प्रिया

भागलपुर में सरकारी खाते से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले में नए-नए खुलासे हो रहे हैं. अब तक की जांच में जो बात सामने आई है वह यह है कि 'सृजन' एक गैर सरकारी संस्था है, जो जिले में महिलाओं के विकास के लिए कार्य करती थी, असल में इस संस्था का मुख्य धंधा करोड़ों का गोरखधंधा था. इस संस्था ने पिछले कई वर्षों से बैंकों की मिलीभगत से सरकारी जमा खाते से तकरीबन 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध निकासी की.

शुक्रवार को 'आज तक' भागलपुर के सबौर ब्लॉक में पहुंचा, जहां पर 'सृजन' का मुख्य दफ्तर था. वैसे तो इस दफ्तर को आर्थिक अपराध शाखा, जो इस पूरे गोरखधंधे की जांच कर रही है, द्वारा सील किया जा चुका है लेकिन 'आज तक' की टीम इस दफ्तर के अंदर गई और पाया कि यहां पर महिलाओं को सशक्त और रोजगार प्रदान करने के लिए इस संस्था के द्वारा पापड़, मसाले, साड़ियां और हैंडलूम के कपड़े बनवाए जाते थे. इस दफ्तर में पाए गए मसाले और पापड़ सभी 'सृजन' ब्रांड से बाजार में बेचे जाते थे.

सामने आएगा करोड़ों का घोटाला

अब यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि पापड़ और मसाले बनाने का धंधा केवल दुनिया को गुमराह करने के लिए था और असल में करोड़ों रुपये सरकारी खजाने से अवैध निकासी करना इस संस्था का मुख्य काम था. जांच में यह बात सामने आई है कि अब तक 300 करोड़ रुपये से ज्यादा जो इस संस्था ने सरकारी खजाने से अवैध रुप से निकाले थे. इस पैसे को बाजार में निवेश किया, साथ ही रियल एस्टेट में भी लगाया. इन पैसों से लोगों को 16% ब्याज दर पर लोन भी मुहैया कराया गया.

दो तरीकों से होती थी अवैध निकासी

'आज तक' को जानकारी देते हुए भागलपुर के एसएसपी मनोज कुमार ने बताया कि यह संस्था दो तरीकों से इस पूरे सरकारी खजाने से अवैध निकासी का काम करती थी. एक तरीका था स्वाइप मोड और दूसरा था चेक मोड. स्वाइप मोड के जरिए भारी रकम राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा भागलपुर जिले के सरकारी खातों में जमा कराए जाते थे. स्वाइप मोड में राज्य सरकार या केंद्र सरकार एक पत्र के माध्यम से बैंक को सूचित करती थी कि कितनी राशि बैंक में जमा करा दी गई है. बैंक के अधिकारी भी इस पूरे गोरखधंधे में शामिल थे. वह सरकारी खाते में इस पैसे को जमा नहीं दिखाकर 'सृजन' के खाते में इस पूरे पैसे को जमा कर दिया करते थे.

दूसरा तरीका था चेक मोड, जहां पर राज्य सरकार या केंद्र सरकार जो भी पैसे भागलपुर जिले के सरकारी खातों में जमा कराना था वह चेक के माध्यम से किया जाता था. एक बार सरकारी खाते में चेक जमा हो जाता था तो फिर जिलाधिकारी के दफ्तर में शामिल कुछ लोग जो कि इस गोरखधंधे में हिस्सा थे, जिलाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से अगले दिन वही राशि 'सृजन' के अकाउंट में जमा करा दिया करते थे.

गोरखधंधे की मास्टरमाइंड थी मनोरमा देवी

गौरतलब है कि इस पूरे मामले में अब तक 7 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी हैं और 5 प्राथमिकी भी दर्ज की जा चुकी हैं. 'सृजन' के संस्थापक मनोरमा देवी के पुत्र और बहू, अमित कुमार और बेटी प्रिया कुमार फिलहाल फरार चल रहे हैं और पुलिस उनको गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रही है. मनोरमा देवी जो इस पूरे गोरखधंधे की मास्टरमाइंड थी, उसकी मृत्यु इसी साल फरवरी महीने में हो चुकी है.

 

 

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