अनशन के नौवें दिन अन्ना हजारे ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि देश से भ्रष्टाचार मिटाने की मंशा आज भी सरकार में नहीं है क्योंकि अगर भ्रष्टाचार मिट गया तो अपना खाना बंद होगा, ये डर लगता है सरकार को.
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अन्ना ने कहा कि सरकार की नीयत पहले से ही साफ नहीं है और सरकार भ्रष्टाचार मिटाना नहीं चाहती. मंगलवार को टीम अन्ना और सरकार के बीच हुई बातचीत को बारे में बोलते हुए अन्ना ने कहा कि तीन मुद्दे पर सरकार अब भी सहमत नहीं है.
अन्ना ने कहा, 'गांव से लेकर मंत्रलाय तक सभी अफसर लोकपाल के दायरे में आने चाहिए क्योंकि आज गरीबों का जीना मुश्किल हो गया है और उनकी सुनने वाला कोई नहीं है. बिना पैसे दिए कोई काम नहीं होता. अगर गांव का कोई नागरिक किसी योजना में भ्रष्टाचार की जानकारी लेकर बीडीओ के पास जाता है तो वो कुछ नहीं करता, डीओ और कमिश्नर भी कुछ नहीं करते ना तो मंत्रालय कुछ करता है. भ्रष्टाचार की पूरी श्रृंखला बन गई है.
अन्ना ने कहा कि प्रशासनिक सेवा के लिए भी संविधान ने दंड देने के कई अधिकार दिए हैं लेकिन उनपर कोई अमल नहीं कर रहा. जिस तरह जनता सांसदों और विधायकों को चुनती है उसी तरह राष्ट्रपति आईएएस, आईपीएस अधिकारियों को चुनता है और वो जनता के सेवक हैं और जनता सर्वोच्च है. हजारे ने कहा कि लोकपाल आने से भ्रष्टाचार मिटेगा.
उन्होंने कहा कि देश के ऊपर कर्ज का पहाड़ है. जब देश में कोई बच्चा जन्म लेता है तो उसके सिर पर पहले से ही 25000 का कर्ज होता है. अन्ना ने गरीबों की सेवा को भगवान की पूजा बताया.
उन्होंने कहा कि सरकार में इच्छाशक्ति की कमी है और वो भ्रष्टाचार मिटाना नहीं चाहती. उन्होंने कहा कि हर दफ्तर में पारदर्शिता होनी चाहिए जिससे आम आदमी को अपना काम कराने में कोई परेशानी ना हो. उन्होंने कहा कि लोकपाल बिल केवल केंद्र के ना हो बल्कि हर राज्य में लोकपाल की नियुक्ति होनी चाहिए जिससे राज्यों में भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगे.