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360 किलो विस्फोटक, तेज लाइट और एक चूक... इस वजह से कश्मीर के नौगामा थाने में हुआ भयंकर धमाका!

नौगाम पुलिस स्टेशन में हुई भीषण दुर्घटना ने पूरे घाटी को दहला दिया है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह कोई आतंकी हमला नहीं, बल्कि फोरेंसिक प्रक्रिया के दौरान हुई गंभीर त्रुटि थी. अल-फलाह यूनिवर्सिटी से बरामद विस्फोटकों की जांच के वक्त तेज प्रकाश ने बेहद संवेदनशील रसायनों की प्रतिक्रिया को ट्रिगर कर दिया. इसके बाद धमाका हो गया.

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कश्मीर के नौगामा थाने में रखा गया था मौत का जखीरा, जांच के दौरान हुआ धमाका. (File Photo: ITG)
कश्मीर के नौगामा थाने में रखा गया था मौत का जखीरा, जांच के दौरान हुआ धमाका. (File Photo: ITG)

श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में बीते शुक्रवार रात 11.20 बजे हुए धमाके में अब तक नौ लोगों की जान जा चुकी है. इस मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि ये कोई आतंकी घटना नहीं, बल्कि फोरेंसिक जांच के दौरान हुई चूक थी. फोरेंसिक की टीम फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी से ज़ब्त की गई विस्फोटक सामाग्री की जांच कर रही थी.

इसमें एसिटोफेनोन, हाइड्रोजन पेरोक्साइड और सल्फ्यूरिक एसिड जैसे केमिकल थे. इनके मिश्रण की जांच के दौरान लाइट तेज की गई, जिसके बाद केमिकल रिएक्शन हुआ, जो तेज धमाके में बदल गया. 

एसिटोफेनोन अपने आप में एक सामान्य औद्योगिक रसायन है. लेकिन यह एसीटोन पेरोक्साइड के निर्माण में एक महत्वपूर्ण प्रीकर्सर की तरह इस्तेमाल होता है. एसीटोन पेरोक्साइड दुनिया के सबसे खतरनाक, संवेदनशील और फ्रिक्शन-ट्रिगर्ड विस्फोटकों में से एक माना जाता है. सल्फ्यूरिक एसिड और अन्य रसायनों के धुएं ने इस अस्थिरता को और गहरा कर दिया.

इन कारकों ने मिलकर समय से पहले विस्फोट की भयावह स्थिति पैदा कर दी. अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर सहित कुल 360 किलो के रासायनिक जखीरे थाने में रखे गए थे.

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी नलिन प्रभात और संयुक्त सचिव (कश्मीर) प्रशांत लोखंडे ने कहा कि ये एक हादसा था. उन्होंने कहा, "बरामदगी की अस्थिर और संवेदनशील प्रकृति के कारण एफएसएल टीम अत्यधिक सावधानी बरत रही थी. लेकिन दुर्भाग्य से नमूना प्रक्रिया के दौरान अचानक ये हादसा हो गया." इस जांच का नेतृत्व श्रीनगर के एसएसपी डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती ने किया.

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यह हादसा उस व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की परतों से भी जुड़ा है जिसे श्रीनगर पुलिस ने अक्टूबर में पकड़ा था. इस मॉड्यूल का पर्दाफाश नौगाम में लगाए गए पोस्टरों के बाद हुआ.

इन पोस्टरों की जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए. इसके आधार पर आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद की गिरफ्तारी की गई. इन तीनों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि दीवारों पर चिपकाए गए पोस्टरों के पीछे मौलवी इरफान अहमद है.

उसने डॉक्टरों को कट्टरपंथ की राह दिखाने और पोस्टर उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई थी. इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस जांच के लिए फरीदाबाद पहुंची. यहां अल-फलाह यूनिवर्सिटी से डॉ. मुज़फ़्फ़र गनी और डॉ. शाहीन सईद को गिरफ्तार किया गया.

जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि डॉक्टरों की एक तिकड़ी डॉ. गनई, उमर नबी और मुज़फ़्फ़र राथर टेरर मॉड्यूल चला रही थी. इन्ही में से एक उमर नबी ने लाल किले के पास धमाका किया था. इस मॉड्यूल के बेनकाब होने के बाद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पुलिस की सराहना की है.

उन्होंने कहा कि पुलिस ने देश में फैले व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का खात्मा करके कई आतंकवादी घटनाओं को नाकाम किया. इसके साथ ही उन्होंने नौगाम पुलिस स्टेशन के अंदर हुए आकस्मिक विस्फोट के पीड़ितों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की है.

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मनोज सिन्हा ने कहा कि शुक्रवार रात की घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं. इस धमाके के पीछे कोई आतंकी साजिश या बाहरी हस्तक्षेप नहीं है. यह विस्फोट ज़ब्त सामग्री से नमूने एकत्र करने के दौरान रात हुआ, जिसकी वजह से पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की जानें चली गईं.

उन्होंने जोर देकर कहा कि अखिल भारतीय आतंकवादी नेटवर्क का पर्दाफ़ाश करके, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने देश में कई आतंकवादी घटनाओं को विफल किया है. आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में बड़ी सफलता हासिल की है.

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