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CrPC Section 89: हाजिरी का बंधपत्र भंग करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान करती है धारा 89

सीआरपीसी (CrPC) की धारा 89 (Section 89) हाजिरी का बंधपत्र (Bond) भंग करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान (Provision) करती है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 89 इस बारे में क्या कहती है?

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इस धारा में हाजिरी का बंधपत्र भंग करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान है इस धारा में हाजिरी का बंधपत्र भंग करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हाजिरी का बंधपत्र भंग करने से जुड़ी है ये धारा
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए हैं संशोधन

दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) की धाराओं (Sections) में उन कानूनी प्रक्रियाओं (Legal procedures) को परिभाषित (Define) किया गया है, जिनका प्रयोग कोर्ट (Court) और पुलिस (Police) अपने काम के दौरान करती है. इसी तरह से सीआरपीसी (CrPC) की धारा 89 (Section 89) हाजिरी का बंधपत्र (Bond) भंग करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान (Provision) करती है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 89 इस बारे में क्या कहती है?

सीआरपीसी की धारा 89 (CrPC Section 89)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Proced) की धारा 89 में हाजिरी (Appearance) का बंधपत्र भंग करने (Breach of Bond) पर गिरफ्तारी के प्रावधान को परिभाषित किया गया है. CrPC की धारा 89 के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति, जो इस संहिता के अधीन (Under the code) लिए गए किसी बंधपत्र (Bond) द्वारा न्यायालय के समक्ष हाजिर (Appear before the court) होने के लिए आबद्ध (Bound) है, हाजिर नहीं होता है तब उस न्यायालय का पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) यह निदेश देते हुए वारंट (Warrant) जारी कर सकता है कि वह व्यक्ति गिरफ्तार (Arrest) किया जाए और उसके (Court) समक्ष पेश किया जाए.

इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 88: हाजिरी के लिए बंधपत्र लेने की शक्ति बताती है सीआरपीसी की धारा 88

क्या है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.

 

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