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CrPC Section 85: कुर्क की गई संपत्ति को निर्मुक्त कराने का प्रावधान करती है सीआरपीसी की धारा 85

सीआरपीसी (CrPC) की धारा 85 (Section 85) में कुर्क की हुई संपत्ति को निर्मुक्त करना, विक्रय और वापस करने की प्रक्रिया (Procedure) को परिभाषित किया गया है. आइए आपको बताते हैं कि सीआरपीसी की धारा 85 इस बारे में क्या कहती है?

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • कुर्क की हुई संपत्ति को निर्मुक्त करने से जुड़ी है धारा 85
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए है संशोधन

Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता में उन कानूनी प्रक्रियाओं (Legal procedures) को परिभाषित (Defined) किया गया है, जिनका इस्तेमाल अदालती कार्यवाही (Court proceedings) और पुलिस कार्य प्रणाली के दौरान किया जाता है. इसी तरह से सीआरपीसी (CrPC) की धारा 85 (Section 85) में कुर्क की हुई संपत्ति को निर्मुक्त करना, विक्रय और वापस करने की प्रक्रिया (Procedure) को परिभाषित किया गया है. आइए आपको बताते  हैं कि सीआरपीसी की धारा 85 इस बारे में क्या कहती है?

सीआरपीसी की धारा 85 (CrPC Section 85)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) की धारा 85 में कुर्क की गई संपत्ति की मुक्ती, बिक्री और वापसी की प्रक्रिया को लेकर कानूनी प्रावधान किया गया है. CrPC की धारा 85 के मुताबिक-

(1) यदि उद्भोषित व्यक्ति (Exasperated person) उद्घोषणा में विनिर्दिष्ट समय (Specified time) के अंदर हाजिर (Appear) हो जाता है तो न्यायालय (Court) संपत्ति को कुर्की से निर्मुक्त (Free from attachment) करने का आदेश (Order) देगा.

(2) यदि उद्घोषित व्यक्ति उद्घोषणा (Announcement) में विनिर्दिष्ट समय के अंदर हाजिर (Appear) नहीं होता है तो कुर्क संपत्ति (Attached Property), राज्य सरकार (State Govt.) के व्ययनाधीन (Under disposal) रहेगी, और, उसका विक्रय (Sale) कुर्की की तारीख से छह मास का अवसान (Expire) हो जाने पर तथा धारा 84 (Section 84) के अधीन किए गए किसी दावे या आपत्ति (Claim or objection) का उस धारा के अधीन निपटारा हो जाने पर ही किया जा सकता है किंतु यदि वह शीघ्रतया और प्रकृत्या क्षयशील (Quickly and naturally decaying) है या न्यायालय के विचार में विक्रय करना स्वामी के फायदे के लिए होगा तो इन दोनों दशाओं में से किसी में भी न्यायालय, जब कभी ठीक समझे, उसका विक्रय करा सकता है.

(3) यदि कुर्की (Attachment) की तारीख से दो वर्ष के अंदर कोई व्यक्ति, जिसकी संपत्ति (Property) उपधारा (2) के अधीन राज्य सरकार के व्ययनाधीन (Under disposal of the state government) है या रही है, उस न्यायालय के समक्ष, जिसके आदेश से वह संपत्ति कुर्क की गई थी या उस न्यायालय के समक्ष, जिसके ऐसे न्यायालय अधीनस्थ (Subordinate court) है, स्वेच्छा से हाजिर (Voluntarily Appear) हो जाता है या पकड़ कर लाया जाता है और उस न्यायालय को समाधानप्रद (Satisfactory) रूप में यह साबित कर देता है कि वह वारंट के निष्पादन (Execution of warrant) से बचने के मकसद से फरार नहीं हुआ या नहीं छिपा और यह कि उसे उद्घोषणा की ऐसी सूचना नहीं मिली थी जिससे वह उसमें विनिर्दिष्ट समय के अंदर हाजिर हो सकता तो ऐसी संपत्ति का, या यदि बह् विक्रय (Multi sale) कर दी गई है तो विक्रय के शुद्ध आगमों (Pure agamas) का, या यदि उसका केवल कुछ भाग विक्रय (Sale) किया गया है तो ऐसे विक्रय के शुद्ध आगमों और अवशिष्ट संपत्ति (Residuary asset) का, कुर्की के परिणामस्वरूप (As a result of attachment) उपगत सब खचों को उसमें से चुका कर, उसे परिदान (delivery) कर दिया जाएगा.

इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 84: कुर्की के बारे में दावे और आपत्तियों को लेकर प्रावधान करती है धारा 84 

क्या है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.

 

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