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CrPC Section 87: समन के स्थान पर वारंट जारी करने से जुड़ी है सीआरपीसी की धारा 87

सीआरपीसी (CrPC) की धारा 87 (Section 87) में समन के स्थान पर या उसके अतिरिक्त वारंट के जारी किए जाने का प्रावधान (Provision) है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 87 इस बारे में क्या कहती है?

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • समन के स्थान पर अतिरिक्त वारंट जारी करना बताती है ये धारा
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए हैं संशोधन

Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता में धाराओं के माध्यम से उन कानूनी प्रक्रियाओं (Legal procedures) को परिभाषित किया गया है, जिनका प्रयोग अदालती कार्यवाही (Court proceedings) और पुलिस अपने काम के दौरान करती है. इसी तरह से सीआरपीसी (CrPC) की धारा 87 (Section 87) में समन के स्थान पर या उसका अतिरिक्त वारंट का जारी किए जाने का प्रावधान (Provision) है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 87 इस बारे में क्या कहती है?

सीआरपीसी की धारा 87 (CrPC Section 87)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Proced) की धारा 87 समन के स्थान पर या उसके अतिरिक्त वारंट का जारी किया जाना बताती है. CrPC की धारा 87 के अनुसार, न्यायालय (Court) किसी भी ऐसे मामले में, जिसमें वह किसी व्यक्ति की हाजिरी के लिए समन (Summons for appear) जारी करने के लिए इस संहिता द्वारा सशक्त (Empowered by the code) किया गया है, अपने कारणों को अभिलिखित (Reasons to be recorded) करने के पश्चात्, उसकी गिरफ्तारी (Arresting) के लिए वारंट (Warrant) जारी कर सकता है.
 
(क) यदि या तो ऐसा समन (Summon) जारी किए जाने के पूर्व या पश्चात् (Before or after) किंतु उसकी हाजिरी (Appear) के लिए नियत समय (Fixed time) के पूर्व न्यायालय को यह विश्वास करने का कारण दिखाई पड़ता है कि वह फरार (Absconding) हो गया है या समन का पालन न करेगा; या

(ख) यदि वह ऐसे समय पर हाजिर (Appear) होने में असफल रहता है और यह साबित (Prove) कर दिया जाता है कि उस पर समन की तामील (Service of summons) सम्यक् रूप से ऐसे समय में कर दी गई थी कि उसके तद्नुसार हाजिर होने के लिए अवसर था और ऐसी असफलता (Failure) के लिए कोई उचित प्रतिहेतु (Justified reason) नहीं दिया जाता है.

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क्या है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.

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